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मथुरा शटल के विक्रेता कोचों में खुलेआम चल रही थी शराब पार्टी

आरपीएफ और जीआरपी को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं, यात्रियों का कोच में सफर करना मुश्किल।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2017, 07:17 AM IST
Mathura shuttle salesman was running openly in coaches liquor party

फरीदाबाद। गाजियाबाद से चलकर नई दिल्ली-फरीदाबाद होते हुए मथुरा को जाने वाली 64910 मथुरा शटल के विक्रेता कोच शाम के वक्त मयखाना (शराब पीने वाला अड्‌डा) बन जाते हैं। ऐसे में आम यात्रियों का कोच में चलना मुश्किल हो जाता है। गलती से यदि कोई महिला कोच में सवार हो गई तो उसका एक पल भी खड़ा होना खतरे से खाली नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि आरपीएफ आैर जीआरपी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।

- मथुरा शटल में फरीदाबाद से लेकर पलवल तक शराब की पार्टी को कभी भी देखा जा सकता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि शराब की पार्टी करने वाले इन शरारती तत्वों को आखिर रोकेगा कौन? गाजियाबाद से चलकर मथुरा जाने वाली दूसरी मथुरा शटल 64910 सोमवार को करीब 30 मिनट की देरी से चल रही थी।

- ट्रेन रात 8.06 बजे फरीदाबाद पहुंची। गार्ड की साइड में पीछे लगे विक्रेता कोच में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। ट्रेन करीब 8.10 बजे न्यूटाउन स्टेशन पहुंची। दो मिनट रुकने के बाद ट्रेन जैसे ही बल्लभगढ़ के लिए रवाना हुई, गेट के पास बैठे युवकों ने बैग से दारू और गिलास निकाली और पीना शुरू कर दिया। उनका यह सिलसिला असावटी स्टेशन तक चलता रहा। पलवल ट्रेन पहुंचने पर शराब की पार्टी करने वाले यात्री उतरकर चलते बने।

मथुरा की ओर जाने वाली लोकल ट्रेनों में होती है शराब पार्टी
- दैनिक यात्रियों की मानें तो शाम के वक्त पलवल और मथुरा की ओर जाने वाली लगभग सभी लोकल ट्रेनों में शराब पार्टी होती है, लेकिन कोई उन्हें रोकने का प्रयास नहीं करता। यही नहीं ओखला से लेकर कोसीकलां तक किसी भी रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेनों की जांच पड़ताल तक नहीं होती।

- शराब पीने के बाद शोर शराबा और गाली गलौच तक होती है। ऐसे में अन्य यात्रियों का सफर करना भी मुश्किल हो जाता है। इनमें सबसे अधिक बदनाम 64910 दूसरी मथुरा शटल ट्रेन है।

- लोकल ट्रेनों में तीन-चार विक्रेता कोच लगे होते हैं। ऐसे में शराब पार्टी करने वाले लोग झुंड बनाकर एक साथ सवार होते हैं अौर गेट के पासबैठकर अपनी पार्टी जमा लेते हैं। शाम के वक्त मथुरा की आेर जाने वाली एक भी लोकल ट्रेनों की तो आरपीएफ जांच करती है और ही जीआरपी की।

ट्रेन में शराब पीना अपराध
रेलवे एक्ट के तहत रेल परिसर और लोकल ट्रेनों में बैठकर शराब पीकर शोर शराबा करना अपराध की श्रेणी में आता है। यदि कोई यात्री शराब पीते हुए पकड़ा जाता है उसका रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत छह माह की सजा और 500 रुपए तक जुर्माना भी हो सकता है।

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