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सबसे व्यस्त ट्रैक पर ट्रेनाें को सुरक्षित दौड़ाने में जुटीं सुमन व वंदना

भोला पांडेय | Last Modified - Nov 06, 2017, 08:34 AM IST

देश के सबसे व्यस्त रेलवे ट्रैक पर फरीदाबाद में ट्रेनों को सुरक्षित दौड़ाने में सुमन और वंदना नाम की दो महिलाएं भी लगी हुई
सबसे व्यस्त ट्रैक पर ट्रेनाें को सुरक्षित दौड़ाने में जुटीं सुमन व वंदना
फरीदाबाद. अभी तक आपने पुरुषाें के वर्चस्व वाले बीएसएफ में सरहद की सुरक्षा करने में जुटी सब इंस्पेक्टर रोशनी चाहर, मुंबई में डीजल रेल इंजन चलाने वाली मोटर वूमेन के नाम से मशहूर मुमताज एम काजी, चेन्नई में मेट्रो की पहली महिला चालक ए प्रीति जैसी महिलाओं के बारे में सुना होगा। लेकिन आप यह जानकर चौंकेंगे कि देश के सबसे व्यस्त रेलवे ट्रैक पर फरीदाबाद में ट्रेनों को सुरक्षित दौड़ाने में सुमन और वंदना नाम की दो महिलाएं भी लगी हुई हैं। इन दोनों का जज्बा देखिए कि संपन्न परिवारों से होने के बाद भी ट्रैकमैन जैसे चुनौतीपूर्ण काम को रही हैं। इनकी उड़ान अभी बाकी है।

पलवल जिले के जोधपुर गांव निवासी ट्रैकमैन वंदना व राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव बीनारगेट निवासी सुमन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि वर्ष 2013 में रेलवे में ग्रुप डी के तहत इंजीनियरिंग विभाग की वैकेंसी निकली थीं। इंजीनियरिंग विभाग में नौकरी करने के लिए अावेदन किया। परीक्षा पास कर ली। जब ज्वाइनिंग लेटर मिला तो उसमें पद ट्रैक मैन दिया था। रेलवे में ही नौकरी करने की इच्छा के चलते नौकरी ज्वाइन कर ली। वंदना को पहली तैनाती काेटा और सुमन को मुरादाबाद में मिली थी। वंदना के पति अनिल कुमार प्रॉपर्टी डीलर हैं। परिवार ने प्रोत्साहित किया इसलिए नौकरी ज्वाइन की। वह सुबह सात से शाम छह बजे तक ड्यूटी करती हैं। इसके बाद घर संभालती हैं। ग्रेजुएट पास वंदना ने अब इसी क्षेत्र में पब्लिक वर्क्स इंस्पेक्टर बनने का सपना संजो रखा है। जबकि सुमन के पिता राजेंद्र प्रसाद दिल्ली के प्राइमरी स्कूल में हिंदी विषय के टीचर हैं। जेबीटी पास सुमन नौकरी करने के साथ-साथ डीयू से पत्राचार के जरिए ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही हैं। अभी वह अपने पिता के साथ तुगलकाबाद में रहती हैं। उनका लक्ष्य है कि वह विभागीय परीक्षा देकर उच्च पद पर काम करें।
टीटीई बनने का था शौक, बन गई ट्रैकमैन
वंदना के पिता भी रेलवे में ट्रैकमैन थे। ट्रेन में सफर के दौरान टिकट चेक करने वाले टीटीई को बहुत गौर से देखती थीं कि वे किस तरह से यात्रियों का टिकट चेक करते हैं। बड़ी होकर उन्होंने भी टीटीई बनने का सपना देखा था। ट्रैकमैन का पद उनके लिए पहली सीढ़ी है। रेलवे में योग्यता के अनुसार उन्हें उच्च पद मिले इसके लिए दोनों प्रयास कर रही हैं।
दोनों महिलाएं यह करती हैं काम
नियमित रूप से ट्रैक की जांच पड़ताल करना, स्लीपर बदलना, टूटी हुई लाइनों को बदलना आदि शामिल है। इसी के साथ चाबियों की देखभाल, उनकी रंगाई, ट्रैक व स्लीपर के बीच में रबर पैड लगाना तथा एलाइमेंट सेट करना भी शामिल है। वह साइट पर चाबी को रंगने, चाबियों की देखभाल, लाइनर लगाना, रबर पैड लगाने आदि में पुरुष साथियों का सहयोग करती हैं।
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Web Title: sabse vyst traik par trenaaen ko surksit dauड़aane mein jutin sumn v vndnaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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