--Advertisement--

खुले दरबार में महिला सरपंच ने नहीं दिया एक भी सवाल का जवाब, बैठी रहीं घूंघट में

डकौरा गांव में ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के लिए एसडीएम प्रीति ने मंगलवार को खुला दरबार लगाया।

Danik Bhaskar | Nov 29, 2017, 08:37 AM IST

होडल। डकौरा गांव में ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के लिए एसडीएम प्रीति ने मंगलवार को खुला दरबार लगाया। इस दौरान एसडीएम ने महिला सरपंच पूजा देवी से पंचायत सदस्यों के बारे में पूछा तो वह बगले झांकने लगीं। वह यह नहीं बता सकीं कि पंचायत में कितनी महिला और कितने पुरुष सदस्य हैं। खुले दरबार में सरपंच पूरे समय घूंघट में ही बैठी रहीं। उसने पंचायत से संबंधित एसडीएम के किसी भी सवाल का जबाव दिया और ग्रामीणों की किसी भी समस्या से एसडीएम को अवगत कराया।


महिला सरपंच के परिजन ही ग्रामीणों की समस्याओं पंचायत से संबंधित कार्यों के बारे में एसडीएम को अवगत कराते रहे। यह देख एसडीएम ने सरपंच के परिजनों से कहा कि एक ओर तो सरकार महिलाओं को बढ़ावा दे रही, वहीं दूसरी ओर महिला सरपंच को पंचायत के सदस्यों तक के बारे में पता नहीं। उन्होंने दरबार में कहा कि अगर किसी गांव की सरपंच महिला है तो वह गांव की समस्या को लेकर उनसे मिलने के लिए खुद आए। महिला सरपंच के परिजन अपने को सरपंच बताकर उनके कार्यालय में आए तो वह उनकी एक सुनेंगी।

शिकायतें एक सप्ताह में निपटाने के आदेश
डकौरा गांव स्थित वाल्मीकि चौपाल पर मंगलवार को खुले दरबार में डकौरा, सीहा, मर्रोली और जटयानी गांवों के लोगों द्वारा बिजली, पानी, फिरनी के रास्ते पक्के कराने, जोहड़ों की सफाई कराने, जर्जर बिजली के तारोंं को बदलवाने, लड़कियों के लिए अलग से विद्यालय की व्यवस्था कराने, राशन डिपो पर राशन उपलब्ध नहीं होने जैसी विभिन्न शिकायतें रखीं। एसडीएम प्रीति ने मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को एक सप्ताह में समाधान करने के आदेश दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच पूजा देवी ने की। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा डकौरा गांव स्थित अंबेडकर भवन के प्रांगण में डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा का अनावरण एसडीएम प्रीति ने किया। इस मौके पर गांव की महिला सरपंच पूजा देवी, ओमवती, सुमन, सागर, सोनिया देवी, ममता, संगीता, रचना देवी, ज्ञानचंद, अजीत सिंह आदि द्वारा डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। एसडीएम ने कहा कि डा. भीमराव अम्बेडकर ने हमेशा सभी वर्गों को साथ लेकर कार्य किया। हमेशा शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो का नारा दिया।