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1500 गांव गोद लेकर शिक्षा, हेल्थ और पर्यावरण सुधारेंगे, ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर / 1500 गांव गोद लेकर शिक्षा, हेल्थ और पर्यावरण सुधारेंगे, ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर

Bhaskar News Network

Dec 24, 2018, 02:11 AM IST

Faridabad News - भारत विकास परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को सेक्टर-12 के हुडा ग्राउंड में संपन्न हो गया। इस सम्मेलन...

Faridabad News - improve education health and environment by adopting 1500 villages emphasizing the empowerment of rural women
भारत विकास परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को सेक्टर-12 के हुडा ग्राउंड में संपन्न हो गया। इस सम्मेलन में देशभर के विभिन्न प्रांतों से करीब 4000 सदस्यों ने भाग लिया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में दो संकल्पों पर गहन मंथन हुआ। गांवों काे गोद लेकर विकास करने और महिला सशक्तिकरण का प्रस्ताव पास हुआ। देशभर में संचालित 1500 शाखाएं इन विषयों पर काम करेंगी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए परिषद के सदस्य एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाने का संकल्प लेकर अधिवेशन से रवाना हो गए। सम्मेलन में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु तक के सदस्य शामिल हुए।

शिक्षा और पर्यावरण के जरिए गांवों का विकास

भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय अधिवेशन में दो प्रस्ताव पास किए गए हैं। पहले प्रस्ताव के तहत देशभर की शाखाएं एक-एक गांव को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के विकास पर जोर देंगी। शाखाएं गांव चयनित कर वहां प्राइमरी, जूनियर व हाईस्कूलों में शिक्षा के माध्यम से बच्चों में संस्कार का निर्माण करेंगी। ग्रामीण बच्चों को कॉम्पटीशन के लिए तैयार करेगी, कोचिंग भी उपलब्ध कराएगी। पर्यावरण सुरक्षा में भी बच्चों को जोड़ेगी।

इंजीनियरिंग कॉलेज गांवों गोद लेकर तकनीक कौशल का करेंगे विकास, एआईसीटीसी से हुआ एमओयू

मिशन में इंजीनियरिंग कॉलेज भी करेंगे सहयोग

डॉ. गुप्ता ने बताया कि भारत विकास परिषद ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से एक एमओयू किया है। इसके तहत सभी सरकारी व निजी इंजीनियरिंग कॉलेज गांवों में तकनीकी कौशल का विकास करेंगे। परिषद इसकी खुद मॉनिटरिंग करेगी। जैपसन कंपनी के सहयोग से किसानों को आर्गेनिक खेती करने पर जोर देने के साथ साथ स्वाइल टेस्टिंग कर खेती को उपजाऊ बनाने का काम किया जाएगा।

महिलाओं की ट्रेनिंग पर भी जोर

एक लाख गांवों की स्थिति जांचेगी परिषद

वक्ताओं ने कहा कि पूर्वोत्तर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में बहुत से ऐसे गांव हैं जहां आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं है। मेघालय, अरुणाचल, आईजोल आदि में महिलाओं को पहनने के लिए वस्त्र तक नहीं हैं। उड़ीसा, बंगाल और छत्तीसगढ़ आदि राज्य अभावग्रस्त हैं। उक्त राज्यों में सेवा की अपार संभावनाएं हैं। परिषद के सदस्यों को वहां के लोगों के आंसू पोंछने में मदद करनी होगी। वक्ताओं ने बताया कि परिषद देशभर के एक लाख गांवों की स्थिति का मूल्यांकन करेगी कि वहां किन किन चीजों का अभाव है। अभाव दूर करने को परिषद योजनाएं बनाएगी और उसे क्रियान्वित करेगी।

फरीदाबाद. भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए डाक्टर सोनल मान सिंह।

राष्ट्रीय अधिवेशन में यह भी प्रस्ताव पास हुआ कि समाज में सामाजिक समरसता के लिए महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया जाए। गांवों में सेनेटरी पैड की मशीनें लगाई जाएंगी। महिलाओं की शिक्षा के अनुरूप उन्हें ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। प्रांतीय टीम में अब दो पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है।

समाज के लिए प्रेरणा बने परिषद के दो सदस्य

परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश गुप्ता ने बताया कि परिषद के दो सदस्य अपने कार्यों से समाज के लिए प्रेरणा बने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन दोनों के कार्यों से प्रसन्न होकर उनकी हौसला अफजाई की। इनमें एक हैं बीकानेर राजस्थान के मोहन सिंह यादव। ये प्रिंसिपल हैं। इन्होंने परिषद के सहयोग से अपने क्षेत्र के 24 स्थानों से प्रतिदिन कूड़ा उठाने की व्यवस्था खुद की है। बनारस के डॉ. एमके श्रीवास्तव और उनकी प|ी क्षिप्राधर अपने नर्सिंग होम में पैदा होने वाली बेटियों के परिजनों से कोई शुल्क चार्ज नहीं करते। इनके नर्सिंग होम में अब तक 239 बेटियां जन्म ले चुकी हैं। साथ ही यह दंपती अपनी ओर से एक-एक हजार रुपए का एफडी भी कराते हैं।

बेटे को पढ़ाओ, सिखाओ की बेटियों का सम्मान कैसे करें: सोनल मानसिंह

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारीं देश की प्रख्यात नृत्यांगना एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा सरकारें दे चुकी हैं। इसके आगे महिलाओं का सम्मान करने के लिए नया नारा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब नया नारा बेटे को पढ़ाओ, उसे सिखाओ की बेटियों का सम्मान कैसे करें। जब तक यह भावना बेटों में नहीं पैदा की जाएगी तब तक समाज में महिलाएं खुद काे असुरक्षित महसूस करती रहेंगी। केवल नवरात्र में ही मां, देवी व दुर्गा की आराधना हो बाकी दिनों में महिलाओं का सम्मान न हो ऐसा नहीं होना चाहिए।

सामाजिक समरसता के साथ विकास का संकल्प

समापन पर परिषद के वक्ताओं ने कहा कि आज सामाजिक समरसता देश की बड़ी समस्या है। जाति और धर्म के आधार पर गांवों का बंटवारा हो चुका है। इस व्यवस्था को खत्म कर बगैर किसी भेदभाव के देश के विकास में योगदान दिया जाएगा।

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