• Hindi News
  • Haryana
  • Faridabad
  • पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
--Advertisement--

पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता

Faridabad News - प्याला निवासी युवा इंजीनियर ललित रावत के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शक जताया था कि आगरा नहर की तलाश की जाए।...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:00 AM IST
पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
प्याला निवासी युवा इंजीनियर ललित रावत के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शक जताया था कि आगरा नहर की तलाश की जाए। परिजनों के मुताबिक ललित नहर में भी डूबा हुआ हो सकता है। लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी और न ही आगरा नहर के पानी को बंद कराया गया। मृतक ललित के चाचा वीरेंद्र रावत मंगलवार को बीके अस्पताल की मोर्चरी के बाहर उक्त आरोप लगा रहे थे। परिजनों को टीस है अगर आगरा नहर में एक बार देख लिया जाता तो 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता। इस मामले को लेकर गांव में कई पंचायत हुईं। पुलिस कमिश्नर से भी मिले। परिजनों व ग्रामीणों में पुलिस की लापरवाह कार्यप्रणाली को लेकर रोष है।

पति के आने की कामना करती थी रोज

ललित की मौत से परिवार बिखर गया है। गाजियाबाद निवासी शूरवीर सिंह ने 2013 में बेटी अंजली की शादी ललित के साथ की थी। अंजली 129 दिन पहले विधवा हो गई थी। लेकिन पता न होने से वह इसी आस में सिंदूर लगाती थी कि उनका पति जल्द लौट आएगा। जब कभी दरवाजे पर आहट होती तो लगता कि उनके पति आ गए हैं। इस दौरान आए सभी त्यौहारों पर अंजली को पति की कमी खली। ऐसा कभी नहीं सोचा था कि उनकी मौत हो चुकी होगी। मृतक की बेटी लावन्या इतनी छोटी है कि उसे नहीं पता कि क्या खो दिया है। प्याला गांव के सबसे साधन संपन्न देवेंद्र सिंह रावत के परिवार को चलाने वाला कोई वंशज नहीं रहा। देवेंद्र सिंह का छोटा बेटा नितेश रावत 2013 में ही ट्रेन हादसे का शिकार हो गया था। बड़ा और एकमात्र ललित था।

परिजनों व ग्रामीणों में पुलिस की लापरवाह कार्यप्रणाली को लेकर रोष

परिजनों को इसलिए शक






फरीदाबाद. बडौली पुल के पास आगरा नहर में निकाली गई कार, ड्राइविंग सीट पर युवक की डेड बॉडी। मृतक ललित का फाइल फोटो (इनसेट में)।

लोकेशन आई लेकिन नहीं बन सकी बात

ललित के गायब होने के बाद उसके फोन की आखिरी लोकेशन बड़ौली के पुल के आसपास की थी। पुलिस व परिजनों ने इसकी रिश्तेदारियों से लेकर बड़ौली पुल के आसपास व ग्रेटर फरीदाबाद की बिल्डिंगों के आसपास खूब तलाश की। 4 महीने तक परिजन चैन से नहीं बैठे।


चाचा का शिकायत बदलने का आरोप

मृतक के चाचा और पिता देवेंद्र सिंह का आरोप है कि उन्होंने गुमशुदगी नहीं बल्कि अपहरण की शिकायत सिटी बल्लभगढ़ थाने में दी थी, इसे बदल दिया गया। रावत के अनुसार ललित का परिवार साधन सम्पन्न है। ऐसे में उसके सुसाइड करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

इन पुलों से ग्रेफ की शहर से कनेक्टिविटी

आगरा कैनाल पर कई नए पुल बने, लेकिन पुराने कंडम पुल चालू होने से हो रहे हादसे

भास्कर न्यूज|फरीदाबाद

आगरा नहर पर बने कंडम पुलों से रोज वाहन चालक जान हथेली पर रख गुजर रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही से कई बार हादसे हुए हैं लेकिन इसके बावजूद उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। पिछले दिनों सेक्टर-25 और 55 को जोड़ने वाले पुल टूट गए थे। इसी तरह आगरा कैनाल पर 6 पुलों की हालत कंडम है। कई पुलों पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है। हालांकि आगरा कैनाल पर कई पुल नए बनाए जा चुके हैं लेकिन पुराने पुलों से अावागमन बंद नहीं हो सका है। बड़ौली का पुल भी जर्जर है। इसके दोनों तरफ रेलिंग न होने से अक्सर हादसे होते रहते हैं।

ग्रेटर फरीदाबाद को जोड़ते हैं पुल

नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद में 15 सेक्टर डेवलप हो रहे हैं। इनमें से 15 हजार परिवारों ने रहना शुरू कर दिया है। शहर से कनेक्टिविटी के लिए आगरा कैनाल पर कई नए पुल बनाए जा चुके हैं लेकिन पुराने कंडम पुल भी चालू हैं। इन पुलों से रोज बड़ौली, मिर्जापुर, प्रह्लादपुर माजरा, खेड़ीकलां, खेड़ीखुर्द, भूपानी, बुढ़ैना, भतला, फरीदपुर तिगांव, बदरौला, नवादा, नीमका, सदपुरा, भैंसरावली, ढैकोला, ताजूपुर, मंझावली, घुड़ासन, घरोंड़ा, प्रह्लादपुर, मिर्जापुर, मुजैड़ी, नवादा समेत 80 से अधिक गांवों के लोगों का गुजरना होता है।

आगरा व गुड़गांव नहर पर बना बडौली पुल । जो अब जर्जर हो चुका है ।

पुलिया टूटने से हुई थी मौत

गुड़गांव नहर पर फतेहपुर तगा के पास बनी पुलिया टूटने से 15 जुलाई 2015 काे सिंचाई विभाग के एक जेई लाजपत की मौत हो गई थी। वे अन्य कर्मचारियों के साथ पुलिया का निरीक्षण करने गए थे।

केस नंबर एक : आगरा कैनाल पर बने बड़ौली पुल पर कुछ महीने पहले पुल का एक दीवारी हिस्सा नहर में गिर गया था। इस हिस्से के गिरने से एक भूसे का बड़ा ट्राला नहर में गिरने से बाल-बाल बचा था। इसके बाद पुल से प्रशासन ने आवागमन बंद कर दिया था। प्रशासन ने दोनों पुलों की तरफ लोहे के एंगल लगवा दिए थे। जिससे कोई भारी वाहन इन पुलों से न गुजरे।

केस नंबर दो : बल्लभगढ़ से तिगांव को जोड़ने वाले पुल की हालत भी खस्ता है। इस पर गड्ढे हो गए हैं जबकि रोज 50 हजार से अधिक वाहन यहां से गुजरते हैं। इस पुल की साइड की दीवार टूटी हुई है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अंधेरा होने और दोनों साइड में गहरी खाई होने की वजह से खतरा मंडरा रहा है।

केस नंबर तीन : मार्च में सेक्टर-25 से 55 को जोड़ने वाला पुल टूटने से जान-माल की हानि हाेने से बच गई। कंडम पुल पर भारी वाहन आने से हादसा हुआ। यदि फैक्ट्रियों की छुट्टी के समय हादसा होता तो कई जान जाने का खतरा था। पुल की कंडम हालत के बारे में पता होने के बावजूद प्रशासन ने मरम्मत नहीं कराई।

ये पुल हो चुके हैं कंडम








पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
X
पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
पुलिस अगर परिजनों की सुनकर आगरा नहर तलाशती तो परिजनों को ललित का 129 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..