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फरीदाबाद, शुक्रवार 15 जून, 2018

मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है। ऐसा सोचना विधर्म है, अगर कोई पाप है, तो वो यही है, ये कहना कि तुम निर्बल हो या...

Danik Bhaskar | Jun 15, 2018, 02:00 AM IST
मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है। ऐसा सोचना विधर्म है, अगर कोई पाप है, तो वो यही है, ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।

-स्वामी विवेकानंद


फरीदाबाद, शुक्रवार 15 जून, 2018

द्वितीय ज्येष्ठ (अधिक), शुक्ल पक्ष, द्वितीया, 2075

रमेश- यार! तुम्हें पता है... मेरे पापा के आगे अमीर से अमीर आदमी भी कटोरा लेकर खड़े रहते थे। नरेश- ऐसे कितने अमीर थे वो? रमेश- अमीर नहीं... वो क्या है कि मेरे पापा गोल-गप्पे का ठेला लगाते थे।