--Advertisement--

नाटक के जरिए बयां किया किराए की कोख का दर्द

फरीदाबाद|सेक्टर-12 स्थित कन्वेंशन सेंटर में चल रहे तीसरे संभार्य थिएटर फेस्टिवल में शुक्रवार को रबड़ी नाटक का मंचन...

Dainik Bhaskar

Jun 16, 2018, 02:00 AM IST
नाटक के जरिए बयां किया किराए की कोख का दर्द
फरीदाबाद|सेक्टर-12 स्थित कन्वेंशन सेंटर में चल रहे तीसरे संभार्य थिएटर फेस्टिवल में शुक्रवार को रबड़ी नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने किराए की कोख का दर्द बयां कर बताया कि गरीबी के चलते एक मां अपनी कोख को बेचकर कैसे पैसे कमाती है। केएल थिएटर ग्रुप सिरसा के कलाकारों ने नाटक पेश किया। इसके निर्देशक करण लाढ़ा हैं। यह नाटक एक पत्थर तोड़ने वाली महिला झमकू की कहानी पर आधारित है जिसकी एक दिव्यांग बेटी होती है। वह उसे पढ़ाना-लिखाना चाहती है, लेकिन गरीबी के कारण वह यह सब करने में असमर्थ है। एक दिन झमकू किसी के कहने पर अपनी बेटी की पढ़ाई के खर्च के लिए सरोगेसी मां बनने का फैसला लेती है। सभी मेडिकल टेस्ट के बाद उसे सरोगेसी मां बनने के लिए चुन लिया जाता है। नौ महीने बाद झमकू को लड़की होती है, लेकिन वह भी पहले बच्चे की तरह दिव्यांग होती है। इससे उस बच्ची के मां-बाप उसे अपनाने से मना कर देते हैं। जब इस बात का झमकू को पता चलता है तो बड़ी हिम्मत के साथ उस लड़की को अपनाकर उसे भी अपनी पहली बेटी की तरह पढ़ाने-लिखने का प्रयास करती है। नाटक में आशना अरोड़ा, दिव्या, यशस्विनी, सीमा, नितिन, राहुल वर्मा, नीरज ने अहम भूमिका निभाई।

X
नाटक के जरिए बयां किया किराए की कोख का दर्द
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..