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निगम के ट्यूबवेलों से पानी माफिया टैंकरों में भरकर कर रहे कमाई

निगम के ट्यूबवेलों से पानी माफिया टैंकरों में भरकर कर रहे कमाई भास्कर न्यूज | फरीदाबाद नगर निगम प्रशासन की...

Danik Bhaskar | Jun 20, 2018, 02:00 AM IST
निगम के ट्यूबवेलों से पानी माफिया टैंकरों में भरकर कर रहे कमाई

भास्कर न्यूज | फरीदाबाद

नगर निगम प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी पानी माफियाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। िनगम अधिकारी शहर में अलग अलग स्थानों पर लगे आरओ प्लांट को सील करने का दावा करते हैं जबकि हकीकत यह है कि अधिकांश आरओ फिर से चलने लगे हैं। जानकर हैरानी होगी कि शहर में सक्रिय पानी माफिया लोगों को पानी सप्लाई देने के लिए नगर िनगम के ट्यूबवेलों से पानी भरकर कमाई कर रहे हैं। क्योंिक ऐसे टैंकरों की काेई जांच पड़ताल करने वाला नहीं है। इस बात का खुलासा वार्ड नंबर-14 के पार्षद जसवंत सिंह ने किया। उन्होंने मेयर सुमन बाला से शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की है। शहर का जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में पानी का संकट गंभीर है। पिछले दिनों िनगम प्रशासन ने एनआईटी, डबुआ, जवाहर कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में अवैध रूप से चल रहे आरओ प्लांट को सील कर दिया था। बावजूद पानी माफियाओं पर रोक नहीं लग पाई। निगम पार्षद का कहना है कि जिन आरओ को सील किया गया था वह दोबारा से खुल गए। निगम अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं है।

टैंकर वाले के पास होना चाहिए अथॉरिटी लेटर

निगम पार्षद का कहना है कि जो टैंकर निगम के ट्यूबवेलों से पानी भरने के लिए आते हैं उनके ड्राइवरों के पास एक अथॉरिटी लेटर होना चाहिए। उसमें स्थानीय पार्षद के हस्ताक्षर होने चाहिए। जिससे यह पता चल सके कि टैंकर जरूरतमंदों के लिए पानी सप्लाई कर रहा है। उन्होंने मेयर सुमन बाला से शिकायत दर्ज कराते हुए इसकी जांच कराने की मांग की है।

अफसर बैठे हंै चुप, वार्ड 14 के निगम पार्षद ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, की जांच कराने की मांग

फरीदाबाद. ट़यूबवैल से पानी भरते टैंकर।

पानी सप्लाई की अाड़ में मािफया कर रहे वसूली

िनगम प्रशासन ने अपने ट्यूबवेलों से प्रभािवत क्षेत्रों में टैंकर से पानी भिजवाने की व्यवस्था की है। इसके लिए स्थानीय पार्षद के सुझाव पर टैंकर भेजा जाता है। लेकिन इसकी आड़ में पानी मािफया निगम के ट्यूबवेलों से पानी भरकर मोटी कमाई कर रहे हैं। क्योंकि किसी टैंकर में यह नहीं लिखा होता कि टैंकर नगर निगम का है। निगम पार्षद जसवंत सिंह ने बताया कि टैंकरों की जांच पड़ताल न होने से पानी मािफयाओं का धंधा निगम के ट्यूबवेलों से चलना शुरू हो गया है।