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पलवल-गाजियाबाद शटल में कोच कम करने से गुस्साए यात्रियों ने किया हंगामा

पलवल से नई दिल्ली होते हुए गाजियाबाद जाने वाली शटल में कोच की संख्या कम होने से नाराज यात्रियों ने बुधवार को...

Danik Bhaskar | Jun 28, 2018, 02:00 AM IST
पलवल से नई दिल्ली होते हुए गाजियाबाद जाने वाली शटल में कोच की संख्या कम होने से नाराज यात्रियों ने बुधवार को प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर खड़ी ट्रेन के सामने जमकर हंगामा किया और लाइन पर उतरकर ट्रेन चलने से रोक दिया। हंगामे की सूचना मिलने पर पहुंची आरपीएफ व जीआरपी कर्मियों ने यात्रियों को समझा-बुझाकर रेलवे लाइन खाली कराया। इसके बाद शटल दिल्ली के लिए रवाना हुई। हंगामे के कारण ट्रेन करीब 10 मिनट तक खड़ी रही। बाद में यात्रियों ने स्टेशन मास्टर के पास जाकर शिकायत भी दर्ज कराई। दैनिक यात्रियों का आरोप है कि पहले इस शटल में 12 कोच होते थे। दो सप्ताह से कोच कम कर 8 कोच लगा दिए गए। इससे दैनिक यात्रियों को सफर करने में परेशानी हो रही है। लोग जान जोखिम में डालकर दो कोचों के बीच में खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं।

पलवल स्टेशन से सुबह 8.20 बजे नई दिल्ली होते हुए गाजियाबाद के लिए 64055 शटल चलती है। पीक आवर्स होने से इस ट्रेन में दैनिक यात्रियों की संख्या दो से ढाई गुना अधिक होती है। लोग फरीदाबाद अौर तुगलकाबाद 9.30 बजे तक पहुंच जाते हैं। दैनिक यात्री दीपक मनचंदा, सुनीलदत्त शर्मा, कृष्ण कुमार, हेमंत कुमार, हनी मखीजा आदि का कहना है कि 15 दिन से इस ट्रेन में कोच कम कर दिए गए हैं। इससे दैनिक यात्री जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए मजबूर हैं। क्योंकि यात्रियों की संख्या अधिक है। इससे नाराज यात्री पलवल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर खड़ी शटल के सामने रेलवे लाइन पर खड़े होकर हंगामा किया। इन्होंने रेल अधिकारियों से उक्त शटल में कोचों की संख्या बढ़ाने की मांग की।

हंगामे के कारण ट्रेन 10 मिनट तक खड़ी रही

पलवल. शटल में कोच की संख्या में कम होने की शिकायत करते दैनिक यात्री संघ के पदाधिकारी।

यात्रियों के साथ हादसा होने पर कौन होगा जिम्मेदार

दैनिक यात्रियों का कहना है कि लोग जानवरों की तरह कोचों में भरे रहते हैं। अब कोच की संख्या कम करने से यात्री दो कोचों के बीच में बैठकर सफर करने को विवश हैं। सफर के दौरान किसी यात्री के साथ यदि कोई घटना हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। दैनिक यात्रियों का कहना है कि यदि रेलवे को आशंका है कि लोग बेटिकट चलते हैं तो उन्हें चेकिंग करानी चाहिए। कुछ यात्रियों के चक्कर में एमएसटी बनाकर चलने वाले यात्री क्यों परेशान हों।