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नई दिल्ली से पलवल तक 60 किलोमीटर रेलवे लाइन की सुरक्षा में कई लूज पोल, स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं

सीआरपीएफ की खुफिया एजेंसी के आतंकी संगठन अलकायदा के इरादे का इनपुट जारी करने से रेल अफसरों की नींद उड़ी हुई है।...

Dainik Bhaskar

Jun 28, 2018, 02:00 AM IST
नई दिल्ली से पलवल तक 60 किलोमीटर रेलवे लाइन की सुरक्षा में कई लूज पोल, स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं
सीआरपीएफ की खुफिया एजेंसी के आतंकी संगठन अलकायदा के इरादे का इनपुट जारी करने से रेल अफसरों की नींद उड़ी हुई है। क्योंकि इस सेक्शन में सुरक्षा के कई लूज पोल हैं। रेलवे की सुरक्षा एजेंसियों के लिए शत प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ट्रैकमैन से लेकर आरपीएफ व जीआरपी के पास मैनपॉवर की भारी कमी है। आरपीएफ और जीआरपी में कार्यरत मुलाजिमों में 70 फीसदी सुरक्षाकर्मियों की उम्र 45 के पार है। ऐसे में रेलवे लाइनों और यात्रियों की सुरक्षा कितनी मजबूत होगी अंदाजा लगाया जा सकता है।

270 से अधिक ट्रेनों की सुरक्षा का जिम्मा 134 सुरक्षाकर्मियों पर : नई दिल्ली से फरीदाबाद-पलवल सेक्शन होते हुए आगरा, झांसी, कोटा और मुंबई की लाइनों पर प्रतिदिन 270 से अधिक ट्रेनों का परिचालन होता है। इनमें शटल, मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या 107 है। इनमें कई वीकली ट्रेनें भी चलती हैं। इसके अलावा सेक्शन से प्रतिदिन 145 से अधिक माल गाड़ियों को चलाया जाता है। इन 270 से अधिक ट्रेनों की सुरक्षा का जिम्मा महज 134 सुरक्षाकर्मियों पर है। इनमें आरपीएफकर्मियाें की संख्या 55 और जीआरपी कर्मियों की संख्या 79 है। इन 134 सुरक्षाकर्मियों से ही 24 घंटे थाने व चौकियां चलाई जा रही हैं। इसमें भी कई मुलाजिम छुट्टियों पर अथवा अन्य सरकारी कामों में व्यस्त रहते हैं।

फरीदाबाद. ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन ट्रैक।

तीन लाइनों के लिए 165 ट्रैक व गैंगमैन

रेलवे लाइन मेंटिनेंस और देखभाल की असली जिम्मेदारी गैंगमैन और ट्रैकमैन की होती है। तुगलकाबाद केबिन से लेकर पलवल तक करीब 35 किलोमीटर की रेलवे लाइन का जिम्मा 165 कर्मियों पर है। इनमें भी 2-4 छुट्टियों पर तथा कुछ ट्रैक मेंटिनेंस के काम में लगे रहते हैं। हर पांच मिनट में एक गाड़ी इस सेक्शन से निकलती है। यूं कहें कि सुबह-शाम पीक आवर्स में एक के पीछे एक ट्रेन लगी रहती है। ऐसे में ट्रैकमैन व गैंगमैन अपनी लाइन देखने के अलावा दूसरी लाइन पर कैसे नजर रख पाएंगे। क्योंकि उन्हें ट्रेन से अपनी भी सुरक्षा करनी है।

ट्रैकमैन करते हैं काम, फरीदाबाद से पलवल तक स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे तक की नहीं है व्यवस्था

45 के पार हैं 70 % आरपीएफ व जीआरपी

जानकर हैरानी होगी कि ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही आरपीएफ और जीआरपी बूढ़ी हो चली है। सबसे बुरा हाल आरपीएफ का है। इसमें अधिकांश मुलाजिम 55 के पार हो चुके हैं। जबकि 70 फीसदी 45 से अधिक उम्र के हैं। यही हाल जीआरपी का है। इसमें भी 50 पार मुलाजिमों की संख्या अधिक है। 55 के पार हो चुके आरपीएफ कर्मी रात के वक्त रेलवे लाइन पर कितनी सतर्कता से पेट्रोलिंग कर पाएंगे सोचने वाली बात है।

इस सेक्शन में रोज एक लाख से अधिक यात्री दिल्ली तक करते हैं सफर

नहीं है सीसीटीवी कैमरे

फरीदाबाद सेक्शन से देश की कई महत्वपूर्ण गाड़ियों का परिचालन होता है। लेकिन एक भी स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे तक की व्यवस्था नहीं है। देश की सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, हमसफर, राजधानी, दूरंतो व गरीब रथ जैसी कई महत्वपूर्ण ट्रेनें तेज रफ्तार से गुजरती हैं। फरीदाबाद से पलवल के बीच में कुल पांच स्टेशन हैं। एक भी स्टेशन पर कैमरे की व्यवस्था नहीं है।

यात्रियों व ट्रेनों की संख्या के हिसाब से मैनपॉवर कम












चारों ओर से खुली है लाइन

गतिमान एक्सप्रेस की सुरक्षा के लिए रेलवे ने लाइनों के किनारे तार फैंसिंग तो कराई है, लेकिन स्टेशनों के दोनों ओर अभी भी खुला हुआ है। फरीदाबाद से लेकर पलवल तक यही हाल है। कोई भी शरारती तत्व आसानी से अपने मकसद में कामयाब हो सकता है। ओल्ड फरीदाबाद की बात करें तो यार्ड के दोनों ओर खुला है। लोगों ने यार्ड की दीवार तक तोड़ रखी है। अवैध वाहन यार्ड के अंदर ही खड़े रहते हैं। कभी इन वाहनों की जांच पड़ताल तक नहीं की जाती।

रेलवे के लूज पोल

तुगलकाबाद केबिन से लेकर पलवल तक रेलवे लाइनों के किनारे दर्जनों अवैध कॉलोनियां बसी हैं। इनकी संख्या एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों में है। नियमानुसार रेलवे लाइन से 50 मीटर की दूरी तक कोई आबादी नहीं होनी चाहिए। यानी निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए, लेकिन इस सेक्शन में लोग लाइन से पांच मीटर की दूरी पर ही झुग्गियां बनाकर बर्षों से रह रहे हैं। ये हालात खुद रेलवे ने पैदा किए हैं। क्योंकि उन्होंने ने ही दोनों ओर झुग्गियों को बसने दिया।

ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन यार्ड की टूटी दीवार और अंदर खड़े वाहन।

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