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डॉक्टर और मरीज के बीच रिश्तों को मजबूत रखने की जरूरत

डॉक्टर जिन्हें भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। भगवान तो हमें एक बार जीवन देता है, पर डॉक्टर हमारे अमूल्य जान को...

Danik Bhaskar | Jul 01, 2018, 02:00 AM IST
डॉक्टर जिन्हें भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। भगवान तो हमें एक बार जीवन देता है, पर डॉक्टर हमारे अमूल्य जान को बार-बार बचाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां डाॅक्टरों ने भगवान से भी बढ़कर काम किया है। बच्चे को जन्म देना हो या किसी वृद्ध को बचाना हो। डॉक्टरों की मदद हमेशा हमें मुश्किल से बचाती है। यही एक पेशा है जहां दवा व दुआ का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इंसान को भगवान भी यहीं बनाया जाता है। डॉक्टर के इसी समर्पण और त्याग को याद करते हुए एक जुलाई का दिन भारत में डॉक्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस खास मौके पर भास्कर ने बात की चिकित्सा जगत से जुड़े शहर के कुछ डॉक्टर्स से। ये वे डाॅक्टर्स हैं, जो अपनी मेहनत, लगन व पेशे के प्रति इनकी ईमानदारी इन्हें भीड़ से अलग करती है।

डॉक्टर्स डे पर विशेष: सिर्फ मरीज को ठीक करने नहीं, समाज को कुछ देने के लिए कर रहे हैं ये डॉक्टर काम

मरीज के लिए डोनर नहीं मिलता तो खुद करते रक्तदान

फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल में सर्जन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे अब तक 48 बार रक्तदान कर चुके हैं। आम इंसान को अस्पताल में इलाज के दौरान ब्लड की जरूरत पड़ती है तो अस्पताल उन्हें ब्लड का इंतजाम करने को बोलता है और उसके बदले में डोनर चाहिए होता है, लेकिन डाॅ. हेमंत जरूरत पड़ने पर अपने मरीजों के लिए खुद रक्तदान कर देते हैं। इतना ही नहीं वह लोगों को अंगदान-रक्तदान के लिए भी प्रेरित करते हैं। वे खुद अपनी बाडी डोनेट कर चुके हैं। अंगदान को लेकर अभी तक काफी लोगों से फार्म भरा चुके हैं। अपनी प|ी के साथ मिलकर वे रक्तदान को लेकर अनूठी मुहिम चला रहे हैं।

डॉक्टर पर विश्वास रखे मरीज

डाॅ. हेमंत अत्री

डाॅ. राकेश गुप्ता

सर्वोदय अस्पताल के चेयरमैन डाॅ. राकेश गुप्ता ने अपने हास्पिटल के जरिए समाज को कुछ देने का काम कर रहे हैं।। समय-समय पर उन्होंने ऐसे मेगा कैंपेन शुरू किए, जो समाज के प्रेरणा बन गए। गर्भवती महिलाओं की फ्री डिलीवरी कराने का इनिशिएटिव लेना हो या ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए एक रुपए में मेमोग्राफी। इन्होंने समाज के गरीब वर्ग तक बेहतर चिकित्सा पहुंचाने का प्रयास किया। कटे-फटे होंठ के बच्चों की फ्री सर्जरी कराई। इसके साथ ही सरकार के साथ मिलकर कांकलियर इंप्लांट कैंपेन से जुड़े।

इनका सपना है कि हर गरीब को मिले बेहतर इलाज

पेशे से सीनियर हार्ट स्पेशलिस्ट। वर्तमान में बीके सिविल अस्पताल में बतौर कार्यकारी पीएमओ का चार्ज संभाल रहे हैं। इन्हें भी प्राइवेट अस्पतालों से अच्छे पैकेज के ऑफर मिले, लेकिन इनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं था। अपने प्रोफेशन के जरिए वह ऐसे मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना चाहते थे, जो गरीब हैं। प्राइवेट अस्पतालों का ट्रीटमेंट अफोर्ड नहीं कर सकते। डाॅ. यादव ने खुद से प्रयास करते हैं। सरकारी अस्पताल में सुधार को लेकर वह कदम उठाएं। जिनके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। समाजसेवी संस्थाओं की मदद से अस्पताल में कई सुविधाओं को अपग्रेड कराया।

डाॅ. वीरेंद्र यादव