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दलितों व किसानों के भरोसे 2019 की चुनावी जंग जीतने की तैयारी में भाजपा

भाजपा वर्ष-2019 में होने वाले लोकसभा व विधानसभा के चुनावी जंग को दलितों और किसानों के सहारे जीतने की तैयारी में है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 08, 2018, 02:00 AM IST

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    भाजपा वर्ष-2019 में होने वाले लोकसभा व विधानसभा के चुनावी जंग को दलितों और किसानों के सहारे जीतने की तैयारी में है। सूरजकुंड में शनिवार को शुरू हुई दो दिवसीय भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लोकसभा व विधानसभा चुनाव में इन्हीं मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने खुद कहा कि बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए पार्टी पदाधिकारियों, जिला प्रभारियों एवं जिलाध्यक्षों ने शिरकत की। बैठक की शुरुआत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला एवं प्रदेश संगठन मंत्री सुरेश भट्ट ने की। दोपहर बाद करीब 3.30 बजे शुरू हुई बैठक में दलितों और किसानों के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इससे साफ है कि भाजपा 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दलितों और किसानों के भरोसे अपनी नैया पार कराने की जुगत में है।

    राजनीति के जानकारों का कहना है कि बसपा और इनेलो के बीच हुए गठबंधन से घबराकर भाजपा दलितों व किसानों पर अधिक फोकस कर रही है। क्योंकि हरियाणा में दलितों की आबादी 20 फीसदी से अधिक है। दलितों की राजनीति करने वाली बहुजन समाज पार्टी भी अभी तक हरियाणा के चुनावों में इन्हें नहीं भुना पाई है। अब भाजपा इन्हें अपना हितैषी बताकर भुनाने की जुगत में है।

    बैठक में प्रदेशभर से आए पार्टी पदाधिकारियों, जिला प्रभारियों एवं जिलाध्यक्षों ने शिरकत की

    पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दो गुना करने की घोषणा की थी

    सूरजकुंड के राजहंस होटल में बीजेपी की बैठक में भाग लेते प्रदेश पदाधिकारी, जिला प्रभारी व जिला अध्यक्ष।

    किसानों को फसल लागत का 50% से अधिक लाभांश देने की पक्षधर

    सुभाष बराला ने कहा कि चार दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को उनकी लागत का 50 फीसदी से अधिक लाभांश देने की घोषणा की है। उनकी पार्टी इसकी पक्षधर है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभालने के बाद ही किसानों की आय दो गुना करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने किसानों की लागत का 50 फीसदी से अधिक लाभांश देने के बारे में सोचा है। पार्टी इसे जमीनी स्तर पर लागू करेगी। पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के नारे जय जवान, जय किसान के नारे को वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया है। उन्होंने कहा भाजपा किसानों की फसल लागत का केवल 50 फीसदी ही नहीं बल्कि 90-96 फीसदी तक देने की पक्षधर है। केंद्र सरकार ने धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत का डेढ़ गुना करने का फैसला किया है। एमएसपी वह कीमत होती है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है। सरकार लागत के आंकलन के लिए ए2+एफएल फॉर्मूला अपनाया है। ए2+एफएल फॉर्मूले के तहत फसल की बुआई पर होने वाले कुल खर्च और परिवार के सदस्यों की मजदूरी शामिल होती है। देर शाम तक चली इस बैठक में प्रदेश महामंत्री संदीप जोशी, संजय भाटिया, वेदपाल एडवोकेट, महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला बैरागी, युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष मनीष यादव, किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष समय सिंह भाटी, अल्प संख्यक मोर्चा के इकबाल जेलदार, ओबीसी मोर्चा के मदन चौहान, एससी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष राम अवतार वाल्मीकि समेत प्रदेश के सभी उपाध्यक्ष, मंत्री, जिला प्रभारी एवं जिलाध्यक्ष शामिल थे।

    प्रदेश के 237 दलितों के गांवों में भाजपा पदाधिकारियों द्वारा किए गए रात्रि प्रवास कार्यक्रमों की हुई समीक्षा

    प्रदेश अध्यक्ष बराला व प्रदेश संगठन मंत्री सुरेश भट्ट।

    किसानों की फसल लागत का 50 फीसदी अधिक समर्थन मूल्य दिलाने का राजनीतिक प्रस्ताव पास करने पर भी हुआ मंथन

    95 फीसदी गांवों में पार्टी पदाधिकारियों ने रात्रि प्रवास किया

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों हरियाणा में बसपा और इनेलो के बीच हुए गठबंधन से घबराकर भाजपा दलितों पर तेजी से डोरे डालना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में दलित बाहुल्य गांवों में रात्रि प्रवास का कार्यक्रम बनाया गया। प्रदेश में चयनित 237 दलित बाहुल्य गांवों में भाजपा के मंत्री से लेकर जिलाध्यक्ष तक के पदाधिकारी और मंडल स्तर के पदाधिकारी उनके घर जाकर रात्रि प्रवास किया। उनकी समस्याएं सुनने के बहाने उनकी नब्ज टटाेली। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि कुल चयनित गांवों में से 95 फीसदी गांवों में पार्टी पदाधिकारियों ने रात्रि प्रवास किया। उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने बताया कि इसका मकसद केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उन तक लाभ पहुंचाना है।

    प्रदेश में बिखरे हुए हैं दलित वोटर

    राजनीति के जानकारों का कहना है कि हरियाणा में करीब 20 फीसदी से अधिक दलित आबादी की है। लेकिन दलितों की राजनीति करने वाली बहुजन समाज पार्टी कभी इन्हें भुना नहीं पाई। परिणाम यह है कि दलित वोटर बिखरे हुए हैं। विधानसभा चुनाव में एक-दो विधायक ही बीएसपी से अभी तक जीतते आए हैं। लेकिन कुछ दिन बाद ही वह सत्ताधारी पार्टी से मिलकर सत्ता का सुख भोगने में जुट जाते हैं।

    हरियाणा में 20 फीसदी दलितों को बसपा भी अपनी ओर नहीं कर पाई आकर्षित, अब तक राजनीतिक दलों ने वोट बैंक के रूप में करते रहे प्रयोग

    रात्रि प्रवास के दौरान सामने आई बातों की हुई समीक्षा

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने बताया कि रात्रि प्रवास के दौरान जब दलित परिवारों से सीधे संवाद किया गया तो कई बातें सामने अाईं। जैसे कुछ स्थानों पर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कतें आ रही थीं उन्हें दूर कराया गया। इसके अलावा योजना का लाभ कैसे आसानी से लिया जाए इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि बैठक में इस बात की समीक्षा की गई कि अभी तक सभी राजनीतिक पार्टियां दलितों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन भाजपा अब उन्हें उनका हक दिलाने की पक्षधर है। सरकार की मंशा भी है कि समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ बगैर किसी बाधा के मिले। बराला ने कहा कि जो फीडबैक मिले हैं उसका अध्ययन कर दलितों को उनका हक दिलाने पर सरकार का फोकस होगा।

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