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गऊरक्षा फोर्स करती है गायों की सेवा, पाकेट मनी से कराते हैं इलाज

पूरे देश में गायों की सेवा व उनकी देखभाल और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात बार-बार होती है। लेकिन सही मायने...

Danik Bhaskar

Jul 09, 2018, 02:00 AM IST
पूरे देश में गायों की सेवा व उनकी देखभाल और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात बार-बार होती है। लेकिन सही मायने में गऊ सेवा के लिए आगे कोई नहीं आता। सरकारी गऊशालाएं हैं, पर वहां गउओं की दुर्गति होती है। ऐसे में फरीदाबाद के 15 से 21 साल के बच्चों की अनूठी फोर्स मिसाल पेश कर रही है। इस फोर्स का नाम है गऊ रक्षा कांवड़िया फोर्स। इसमें सभी सभी बच्चे स्कूल-कालेज जाने वाले हैं। इनकी मुहिम समाज में नजीर बनी हुई है। यह ग्रुप गऊ सेवा में लगा है। जहां भी इन्हें एक्सीडेंटल, बीमार, ब्लाइंड गाय मिलती है, ये उसे पकड़कर ले आते हैं। उसका अपनी पाकेट मनी से इलाज कराते हैं। घावों पर मरहम पट्‌टी करते हैं। ज्यादा बीमार गायों को हास्पिटल पहुंचाते हैं। गाय के खाने-पीने के लिए चारे का इंतजाम करते हैं। इस ग्रुप को लीड कर रहे हैं 25 साल के बम लहरी। इनका गऊ सेवा के प्रति जज्बा ऐसा है कि इन्होंने नौकरी छोड़ दी। घर छोड़ दिया। तीन साल से ये नंगे पैर हैं। इन्होंने अपने बाल भी नहीं कटवाए। गायों को चारा खिलाने के बाद एक बार खाना खाते हैं।

अनूठी फोर्स

15-21 साल के बच्चों की यह टीम अनूठी मुहिम चला रही है। बिना किसी सरकारी मदद के गायों की सेवा में जुड़ा है यह ग्रुप

फरीदाबाद. गऊ रक्षा कांवड़िया फोर्स के सदस्य गायों की सेवा करते हुए।

बम लहरी ने बताया कि वह सड़क पर बेसहारा गायों को देखते। सरकारी गऊशाला में कंप्लेंट कर देते। पर कई बार सुनवाई ही नहीं हुई। ऐसे में वह खुद ही लग गए गऊ सेवा में। एक दिन नौकरी के दौरान उन्हें एक फोन आया कि एक गाय नाले में फंसी है। उन्होंने मैनेजर से छ़ुट्‌टी मांगी। मैनेजर ने मना कर दिया। उन्होंने नौकरी ही छोड़ दी। घर वालों ने विरोध किया। लेकिन बम लहरी अकेले जुट गए लोगों को अपने फोन नंबर देते ताकि उन्हें कहीं भी कोई बेसहारा गाय िदखे तो उन्हें जानकारी मिल सके। प्याली चौक पर खाली जमीन पर गऊशाला बनाई। यहां बेसहारा गाय लानी शुरू कर दी। गऊ सेवा के लिए शादी में मिली सोने की चेन व अंगूठी भी बेच दी। जज्बा ऐसा कि चाहे तपती गर्मी हो या कंपकंपाती ठंड ये नंगे पैर रहते हैं। बाल बनवाना छोड़ दिया। खाना भी तब खाते हैं, जब गायों का पेट भर जाता है।

यह है 60 बच्चों की गऊरक्षा फोर्स

गऊ रक्षा कांवड़िया फोर्स। में 15 से 21 साल तक के करीब 60 बच्चे हैं। 25 साल के बम लहरी जिन्होंने इस अभियान की शुरुआत की थी। अकेले ही मिशन शुरू किया था। उनसे प्रेरित होकर बच्चे जुड़ते चले गए। बम लहरी ने प्याली चौक पर बेसहारा गऊ वंश चिकित्सालय बना रखा है। जहां गऊरक्षा फोर्स की टीम सुबह-शाम नियमित आती है।

ऐसे बनी गऊरक्षा फोर्स

गऊवंश का करते हैं अंतिम संस्कार

गऊशाला में देखभाल व इलाज कराने के साथ-साथ ये बच्चे मृत गऊवंश का विधिवत अंतिम संस्कार भी करते हैं। बम लहरी की यह फोर्स अब तक 300 से अधिक गऊवंश का इलाज करा उन्हें ठीक कर चुकी है। 60 से अधिक गऊवंश का अंतिम संस्कार कर चुकी है।

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