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तीन वार्डों में सीवर सफाई के लिए निगम ने दिया 2.62 करोड़ का ठेका, काम हुआ नहीं आैर कर दिया भुगतान

जनता के पैसे का नगर निगम अधिकारी और ठेकेदार किस तरह गोलमाल कर रहे हैं इसका ताजा मामला बल्लभगढ़ क्षेत्र में सामने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 27, 2018, 02:00 AM IST

  • तीन वार्डों में सीवर सफाई के लिए निगम ने दिया 2.62 करोड़ का ठेका, काम हुआ नहीं आैर कर दिया भुगतान
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    जनता के पैसे का नगर निगम अधिकारी और ठेकेदार किस तरह गोलमाल कर रहे हैं इसका ताजा मामला बल्लभगढ़ क्षेत्र में सामने आया है। यहां तीन वार्डों में सीवर की सफाई के लिए 2.62 करोड़ रुपए का टेंडर देकर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया लेकिन काम कहां हुआ किसी को पता नहीं। काम की जांच किए बगैर निगम ने ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया। जानकर हैरानी होगी कि उसी ठेकेदार को छह महीने के अंदर फिर से 1.55 करोड़ रुपए का ठेका दे दिया गया। मामला नगर निगम सदन की बैठक में उठा। नगर निगम अफसरों से सवाल जवाब किए गए लेकिन निगम का कोई भी अधिकारी गड़बड़ी की पोल खोलने वाले पार्षद के सवाल का जवाब नहीं दे पाया।

    यह है गड़बड़ी का पूरा मामला

    बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुल 8 वार्ड हैं। सभी वार्डों में सीवर मेंटिनेंस का काम ठेकेदार को सौंपा गया। प्रत्येक वार्ड के लिए 50-60 लाख रुपए निर्धारित कर सीवर सफाई का काम दिया गया। 3 जनवरी 2018 को ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया। बताया जाता है वार्ड नंबर 38, 39 व 40 के लिए कुल 2.62 करोड़ रुपए का ठेका सीवर सफाई और मेंटिनेंस के लिए दिया गया। अभी यह काम पूरा हो भी नहीं पाया कि दोबारा उसी ठेकेदार को छह माह के अंदर सेम काम के लिए फिर से 1.55 करोड़ रुपए का ठेका अलॉट कर दिया गया। नगर निगम की ओर से इसकी कोई जांच भी नहीं की गई।

    ठेकेदार के काम पर सवाल, जांच की मांग

    वार्ड-37 के पार्षद दीपक चौधरी ने ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए के गोलमाल का मुद्दा सदन की बैठक में उठाया। उन्होंने कहा कि जब ठेकेदार ने सीवर सफाई का काम पूरा ही नहीं किया तो उसे भुगतान कैसे कर दिया गया। यही नहीं दोबारा फिर उसी काम के लिए करोड़ों का ठेका दे दिया गया। इस पूरे मामले में निगम अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    निगम अफसरों को नहीं दिख रही गड़बड़ी

    पार्षद दीपक चौधरी ने सवाल किया कि जब संबंधित वार्ड का पार्षद किसी काम की फाइल तैयार कराता है तो उसमें अधिकारी किसी न किसी बहाने ऑब्जेक्शन लगाकर उसे रोक देते हैं। एक ठेकेदार बगैर काम किए नगर निगम से करोड़ों रुपए ले रहा है और कोई अधिकारी उसके काम की जांच क्यों नहीं कर रहा। इससे साफ है कि नगर निगम अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में है।

    फरीदाबाद. बल्लभगढ़ के पंजाबी मोहल्ला में लोग सीवरेज की समस्या से जूझ रहे है।

    इन कॉलोनियों में समस्या जस की तस

    जिन तीन वार्डों के लिए 2.62 करोड़ और 1.55 करोड़ रुपए का सीवर सफाई के लिए जो टेंडर जारी किया है उसमें सुभाष कॉलोनी, हरि विहार कॉलोनी, आदर्श नगर, पंजाबी मोहल्ला, मिल प्लांट रोड, भीमसेन कॉलोनी आती हैं। इन कॉलोनियों की आबादी 8-10 हजार है। काम कराने का दावा करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। किसी भी कॉलोनी में सीवर की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। मजबूरी में लोगों ने सीवर का कनेक्शन कटवा कर नालियों में कनेक्शन कराना शुरू कर दिया है।

    कॉलोनी में कहां सीवर की सफाई हुई इसका कुछ पता ही नहीं। हमारे मोहल्ले में सुबह-शाम आज भी सीवर ओवरफ्लो होती रहती है। सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया। कई बार नगर निगम जाकर इस समस्या की शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन हालात पहले जैसे ही हैं। अब लोगों ने अपना सीवर कनेक्शन कटवाकर सीधे नाली में पानी गिराना शुरू कर दिया है। इससे पूरे मोहल्ले में गंदगी फैल रही है। - सुधीर शर्मा, निवासी पंजाबी मोहल्ला, बल्लभगढ़।

    सीवर सफाई के नाम पर नगर निगम में बड़ा खेल चल रहा है। जनता के पैसों का बंदरबांट किया जा रहा है। यदि सीवर सफाई में 2.62 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं तो समस्या का हल क्यों नहीं हो रहा। नगर निगम का कोई अधिकारी इसका जवाब देने को तैयार नहीं है। हमने इस मामले को सदन में उठाया। इसकी जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। - दीपक चौधरी, पार्षद वार्ड नंबर-37।

    मामला सदन में उठा था। इसकी जांच की जाएगी। ठेकेदार ने कितना काम किया। नगर निगम उसे कितना भुगतान किया। वहां हुआ है या नहीं। इन सारे तथ्यों की गंभीरता से जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट तैयार कर सदन को अवगत कराया जाएगा। यदि जांच में ठेकेदार दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -सुरेंद्र कुमार, एडीशनल कमिश्नर नगर निगम।

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