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बीके अस्पताल 48 सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में, पर रात को मॉनिटरिंग सिस्टम बंद रहता है ताले में

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बीके में मंगलवार देर रात एक नाबालिग के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने अस्पताल की...

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 02:00 AM IST
बीके अस्पताल 48 सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में, पर रात को मॉनिटरिंग सिस्टम बंद रहता है ताले में
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बीके में मंगलवार देर रात एक नाबालिग के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हैरत है कि 48 सीसीटीवी कैमरे के सहारे पूरे अस्पताल की निगरानी होती है, लेकिन रात को मॉनिटरिंग सिस्टम ताले में बंद रहता है। ऐसे में रात को अस्पताल के विभिन्न वार्डों में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा खतरे में रहती है। नाबालिग मरीज से दुष्कर्म के बाद अस्पताल प्रबंधन ने गुरुवार से रात आठ बजे के बाद तीमारदारों को मरीजों से मिलने पर रोक लगा दी है। यदि मरीज अपने तीमारदार को बुलाना चाहता है तो उसे अनाउंसमेंट कर बुलाया जाएगा। साथ में सुरक्षा गार्ड भी मौजूद होगा। रात में एक तीमारदार को अस्पताल के वेटिंग रूम में रहने की इजाजत होगी। इसके अलावा एक एंट्री को खोलकर अन्य सभी एंट्री गेट बंद कर दिए जाएंगे। अस्पताल प्रबंधन ने पूरी घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।

रात में आने-जाने वालाें का नहीं होता लेखा जोखा

बीके अस्पताल में दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन रात को कोई भी व्यक्ति आसानी से अस्पताल में प्रवेश कर सकता है। क्योंकि आने-जाने वालों की कोई इंट्री नहीं होती और न ही सुरक्षा गार्ड किसी से पूछताछ करता है। सब कुछ भगवान भरोसे चलता है। लापरवाही का आलम यह है कि कोई भी व्यक्ति इमरजेंसी गेट से प्रवेश कर किसी भी वार्ड में जा सकता है। यही नहीं किसी भी फ्लोर पर कोई टोका टाकी तक करने वाला नहीं होता। यह हाल तब है जब अस्पताल में से कई बार बच्चा चोरी होने की घटनाएं हो चुकी हैं।

फरीदाबाद. पीएमओ ऑफिस में हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी कैमरे की डिस्प्ले।

सिर्फ रिकॉर्डिंग के भरोसे अस्पताल की सुरक्षा

बीके अस्पताल परिसर को 48 सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है, लेकिन सीसीटीवी कैमरे की मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। अर्थात सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग से ही अस्पताल की सुरक्षा का दावा किया जा रहा है। अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर पीएमओ कार्यालय में तीन एलईडी लगी हैं। इसमें सभी 48 कैमरे डिस्प्ले होते रहते हैं। दिन में तो पीएमओ खुद बैठकर उस पर नजर रखते हैं, लेकिन रात के समय मॉनिटरिंग सिस्टम ताले में बंद हो जाता है। यानी कैमरे चलते रहते हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं होता।

दुष्कर्म की घटना के बाद प्रसूति वार्ड में जाने पर रोक

वारदात के बाद गुरुवार को अस्पताल के प्रसूति वार्ड में आने-जाने पर रोक लगा दी गई। अस्पताल में भी रात आठ बजे के बाद केवल एक गेट से ही लोगों की एंट्री हो सकेगी। कार्यकारी पीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार रात आठ बजे के बाद सुरक्षाकर्मी वार्डों में जाकर एक-एक व्यक्ति काे बाहर निकालेंगे। वार्ड के गेट को बंद कर दिया गया है। बगैर मरीज का पर्चा देखे किसी को आने जाने की इजाजत नहीं होगी।

बच्ची के साथ रेप नहीं, की गई थी छेड़छाड़

अस्पताल परिसर में बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना को अस्पताल के कार्यकारी पीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है आरोपी ने उसके साथ छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दिया था। मेडिकल जांच में यह बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि बच्ची के कपड़े पर सीमैन तो मिला है, लेकिन उसके प्राइवेट पार्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। खुद अस्पताल की महिला डॉक्टर ने बच्ची के मेडिकल परीक्षण में इसकी पुष्टि की है। यही नहीं डॉ. वीरेंद्र यादव ने बच्ची को उठाकर दूसरे बेड पर ले जाने की बात से भी इंकार किया है। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि आरोपी सारन निवासी मंजीत उर्फ राहुल को लैब में काम करने वाले किसी कर्मचारी ने बुलाया था। अस्पताल प्रबंधन लैब कर्मचारी की भूमिका की जांच कर रहा है।

फरीदाबाद. वार्ड में जाने वाले गेट पर लगी मरीजों से मिलने वाले लोगों की भीड़।

अस्पताल में हो चुकी हैं ये प्रमुख घटनाएं

27 अगस्त 2012| आवारा कुत्ता वार्ड से नवजात का शव लेकर भाग गया था।

11 दिसंबर 2014| आवारा कुत्ता वार्ड से नवजात का शव लेकर भाग गया था।

19 जुलाई 2016| अस्पताल से बच्चा चोरी हो गया था।

5 नंबर 2016| अस्पताल से बच्चा चोरी हो गया था।

20 जून 2017| अस्पताल से बच्चा चोरी









सिक्योरिटी एजेंसी के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई

कार्यकारी पीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है। फ्लोर वाइज किसी ने आरोपी पर ध्यान क्यों नहीं दिया। सुरक्षा में कहां कमी रही। उन्होंने कहा कि जांच में जाे भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इनपुट

अस्पताल में रोज 1500 की ओपीडी

मरीजों की परेशानी देख दो लिफ्ट लगवाने का प्रस्ताव

फरीदाबाद| बीके अस्पताल में मरीजों की परेशानी को देखते हुए यहां दो नई लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पीएमओ ने इस प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों के पास भेज दिया है। फिलहाल बीके में सिर्फ एक ही लिफ्ट है। इसके खराब होने पर मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की ओर से यहां दो नई लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव अधिकारियों के पास भेजा गया है। बीके अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां रोज हजार से 1500 मरीजों तक की ओपीडी होती है। अस्पताल में केवल एक ही लिफ्ट लगी हुई है। इस लिफ्ट से ही मरीज, डॉक्टर व मरीजों के मिलने वाले लोग ऊपरी मंजिलों पर आते-जाते हैं। दवाइयां आदि पहुंचाने के लिए भी इसी लिफ्ट का इस्तेमाल होता है। लिफ्ट कई बार खराब हो जाती है। कोई बड़ी खामी आने से कई बार लिफ्ट लंबे समय तक खराब पड़ी रहती है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी होती है। खासकर गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गों को। अस्पताल में लिफ्टें लगाने के लिए तीन प्वाइंटों पर जगह छोड़ी गई है, लेकिन केवल एक ही लिफ्ट चल रही है। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कई बार उच्चाधिकारियों के पास नई लिफ्ट लगाने का का प्रस्ताव व रिमाइंडर भेजे थे, लेकिन उच्चाधिकारियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। पिछले शुक्रवार को लिफ्ट का पैनल जल जाने से यह एक बार फिर से बंद हो गई थी। हालांकि अस्थाई इंतजाम कर लिफ्ट को शुरू कर दिया गया है। अस्पताल के पीएमओ की तरफ से एक बार फिर से अस्पताल में दो नई लिफ्टें लगाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों के पास भेजा है।

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