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फरीदाबाद व गुड़गांव में सरकार ने 10 वर्षों में किन-किन विभागों से किए हैं समझौते, दंे सूचना: राज्य सूचना आयुक्त

राज्य सूचना आयुक्त ने एक महत्वपूर्ण मामले में राजस्व विभाग को आदेश दिया है कि फरीदाबाद और गुड़गांव में पिछले दस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 02:00 AM IST

फरीदाबाद व गुड़गांव में सरकार ने 10 वर्षों में किन-किन विभागों से किए हैं समझौते, दंे सूचना: राज्य सूचना आयुक्त
राज्य सूचना आयुक्त ने एक महत्वपूर्ण मामले में राजस्व विभाग को आदेश दिया है कि फरीदाबाद और गुड़गांव में पिछले दस वर्षों में विभिन्न विभागों से समझौते की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता को उपलब्ध कराए। क्योंकि समझौतों में करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत जिन विभागों से समझौता किया है उसमें महज 100 रुपए के स्टांप पेपर का काम चलाया गया है। इससे राजस्व विभाग को 500 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

सामाजिक संस्था एक संघर्ष के निदेशक एवं आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल ने राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से पांच जुलाई 2017 में सूचना मांगी थी कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने जिन-जिन संस्थाओं से समझौते किए हैं क्या उसमें निर्धारित स्टांप शुल्क जमा कराया गया है। विभाग ने सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद विभाग के पास प्रथम अपील की। वहां भी जवाब नहीं मिला। 18 सितंबर 2017 को राज्य सूचना अायोग में अपील कर जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।

आदेश

आरटीआई एक्टिविस्ट ने राजस्व विभाग से मांगी थी जानकारी, नहीं दिया जवाब, सही तरीके से अनुबंध न होने से सरकार को 700 करोड़ राजस्व का नुकसान

नौ जुलाई को चंडीगढ़ में मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त वाईपी सिंघल ने राजस्व विभाग की जमकर क्लास ली और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि फरीदाबाद-गुड़गांव में पिछले दस वर्षों में ऐसे सभी समझौतों की जानकारी दी जाए जो राज्य सरकार ने नगर निगम, एनएचएआई, डीएमआरसी, रैपिड मेट्रो व निजी व्यावसायिक कपंनियों से हुए हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी जाए कि सभी प्रोजेक्ट में कुल स्टांप ड्यूटी कितनी बनती है। राजस्व विभाग अब तक कितनी स्टांप ड्यूटी जमा करा चुका है। आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल का आरोप है कि संस्थाएं 100 रुपए के स्टांप पर समझौता कर लेती हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व का नुकसान होता है। उनका कहना है कि सरकार ने जितने भी दस साल में समझौते किए हैं उससे करीब 500 से 700 करोड़ रुपए का राजस्व का नुकसान हुआ है।

इन संस्थाओं से सही तरीके से नहीं किया गया समझौता

बहल के मुताबिक बदरपुर टोल प्लाजा, फरीदाबाद-गुड़गांव टोल प्लाजा, दिल्ली आगरा राजमार्ग प्राधिकरण, फरीदाबाद-बल्लभगढ़ मेट्रो विस्तार, गुड़गांव में हुडा सिटी सेंटर का मेट्रो का विस्तार, गुड़गांव में रैपिड मेट्रो, दिल्ली से गुडगांव के बीच बना एक्सप्रेस-वे, गुड़गांव-फरीदाबाद का बंधवाड़ी कूड़ा निस्तारण केंद्र आदि हैं जिन्होंने सही तरीके से अनुबंध नहीं किया है। राज्य सूचना आयोग ने 14 अगस्त तक राजस्व विभाग को सूचना देने का आदेश दिया है।

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