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श्रमिकों के बच्चों का एमबीबीएस में दाखिला न देने की साजिश

हरियाणा राज्य एटक ने श्रमिकों के बच्चों का दाखिला एमबीबीएस में न देने का विरोध किया है। उसने केंद्रीय स्वास्थ्य...

Danik Bhaskar | Jun 18, 2018, 02:05 AM IST
हरियाणा राज्य एटक ने श्रमिकों के बच्चों का दाखिला एमबीबीएस में न देने का विरोध किया है। उसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर ईएसआई मुख्यालय की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। एटक हरियाणा के महासचिव बेचू गिरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ईएसआई मुख्यालय द्वारा इस साल ईएसआई द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों में श्रमिकों के बच्चों को एमबीबीएस के कोर्स में प्रवेश देने से मना कर दिया है। ईएसआई के इस निर्णय से श्रमिकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि श्रमिक अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए किसी तरह प्री मेडिकल टेस्ट क्लियर कराते हैं। इसके बाद भी प्रवेश न देने से श्रमिकों में गुस्सा है। उन्होंने कहा इस साल ईएसआई कार्पोरेशन ने 5 जून को नीट परीक्षा का परिणाम आने से पहले 30 मई को ही प्रमाण पत्र देना बंद कर दिया। उन्होंने कहा 30 मई तक प्रमाण पत्र देने का प्रचार भी पूरी तरह नहीं किया गया। हरियाणा राज्य एटक, ईएसआई कार्पोरेशन द्वारा नीट परीक्षा के परिणाम आने से पहले ही प्रमाण पत्र बंद कर देने का विरोध करती है।

श्रमिकों के बच्चों के लिए 300 सीटें आरक्षित

देशभर में ईएसआई के 9 मेडिकल कॉलेज में बीमांकित मजदूरों के बच्चों के लिए 300 सीटें आरक्षित हैं। ईएसआई मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद में एमबीबीएस के लिए 100 सीटें हैं। इन सीटों पर 15 बच्चे ऑल इंडिया मैरिट लिस्ट से आते हैं। 50 बच्चे राज्य सरकार के कोटे से आते हैं जो हरियाणा राज्य के निवासी हैं। इसके लिए राज्य की अलग मैरिट लिस्ट बनती है।