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शहर से बाहर भेजने पर चार गुना अधिक करना होगा भुगतान

डाक विभाग ने शहर से बाहर भेजी जाने वाली स्पीड पोस्ट की दरें बढ़ा दी हैं। ऐसे में अब स्पीड पोस्ट से डाक भेजना महंगा...

Danik Bhaskar | Jun 23, 2018, 02:05 AM IST
डाक विभाग ने शहर से बाहर भेजी जाने वाली स्पीड पोस्ट की दरें बढ़ा दी हैं। ऐसे में अब स्पीड पोस्ट से डाक भेजना महंगा हाे गया है। ये दरें करीब तीन से चार गुना तक बढ़ाई गई हैं। इसका असर सभी वर्गों पर पड़ेगा। यानी अब भारतीय डाक सेवा और कोरियर कंपनियों की दरें लगभग समान हो गई हैं। खासकर इसका असर आरटीआई कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा। क्योंकि उन्हें सूचनाएं मांगने के लिए कई बार शहर के बाहर डाक से आवेदन भेजना होता है। शहर से बाहर विभागों से सूचनाएं मांगने के लिए शुल्क दस रुपए खर्च करने होंगे। लेकिन अावेदन विभाग तक पहुंचाने के लिए चार गुना पैसे खर्च करना पड़ेगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 50 ग्राम वजन तक फरीदाबाद में स्पीड पोस्ट का शुल्क 18 रुपए है। पहले फरीदाबाद सहित पूरे एनसीआर का 18 रुपए था। इसी अनुपात में फरीदाबाद से बाहर दिल्ली एनसीआर का शुल्क अब 41 रुपए तक हाे गया है। इसी तरह 51 ग्राम से 200 ग्राम पैकेट पर लोकल में 30 रुपए और बाहर के लिए 71 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। 201 ग्राम से 500 ग्राम तक वजन लोकल में 35 रुपए आैर शहर से बाहर का रेट अब 94 रुपए हो गया है। 500 ग्राम से एक किलोग्राम तक का पैकेट लोकल में 47 रुपए और बाहर भेजने पर 142 रुपए खर्च करने होंगे। यह व्यवस्था 19 जून से लागू कर दी गई है। प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर दीपक मल्होत्रा का कहना है कि मुख्यालय से ही दूरी और वजन के हिसाब से रेट तय किए गए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप अब सूचना मांगने का शुल्क 10 रुपए आैर पोस्ट भेजने में खर्च होंगे चार गुना

फरीदाबाद. फरीदाबाद के बीके चौक स्थित पोस्ट ऑफिस।

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी

डाक विभाग द्वारा स्पीड पोस्ट की दरें बढ़ाने पर नाराजगी जताई है। शहर के जाने माने आरटीआई एक्टिविस्ट पद्मश्री डॉ. ब्रह्मदत्त, रवींद्र चावला, अजय बहल आदि का कहना है कि स्पीड पोस्ट की दरें बढ़ाकर सरकार डाक विभाग को नुकसान पहुंचाना चाहती है। आरटीआई कार्यकर्ताओं को शहर से बाहर के विभागों से जवाब मांगने के लिए चार-पांच गुना राशि खर्च करना पड़ेगा। जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर विरोध प्रकट किया जाएगा। उनका कहना है कि एक तो वैसे ही लोग अब डाक विभाग से कटते जा रहे हैं। रही सही कसर सरकार पूरा करना चाहती है। गांव का व्यक्ति स्पीड पोस्ट के लिए कहां से इतना पैसा खर्च कर पाएगा।