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जलयुद्ध तो तब होगा जब पानी बचेगा : सीबी शर्मा

अगला विश्वयुद्ध जल के लिए होगा, लेकिन जल युद्ध तो तब होगा जब पानी बचेगा। आज के हालात के अनुसार तो जल बचेगा ही नहीं।...

Danik Bhaskar | Jun 25, 2018, 02:05 AM IST
अगला विश्वयुद्ध जल के लिए होगा, लेकिन जल युद्ध तो तब होगा जब पानी बचेगा। आज के हालात के अनुसार तो जल बचेगा ही नहीं। अत: इस तरह की स्थिति आने से पहले हमें बचना होगा और अपना स्वयं जीवन को भी बचाना है। अत: हमें इस विषय पर आगे बढ़कर काम करना होगा। उक्त विचार ग्रीन इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा बालाजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय जल एवं शां‍ति अधिवेशन के शुभारंभ अवसर पर एनआईओएस के चेयरमैन सीबी शर्मा ने व्यक्त किए। कार्यक्रम में प्रो. संतोष पांडा चेयरमैन एनसीटीई, प्रदीप कासनी आईएएस, ज्ञानेंद्र रावत पर्यावरण वैज्ञानिक, प्रो. सुबोध नंदन शर्मा पर्यावरण वैज्ञानिक, प्रो. अरविंद गुप्ता वाईएमसीए यूनिवर्सिटी, रमेश चंद शर्मा गांधी शांति प्रतिष्ठान, महेंद्र सांगवान चरखी दादरी, मो. इब्राहीम मेवात ने भाग लिया। सीबी शर्मा ने कहा धीरे-धीरे हम लोग पानी को बर्बाद करते हुए सूखे के नजदीक पहुंचते जा रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर आईएएस प्रदीप कासनी ने अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि पानी के ऊपर सरकार सिर्फ राजनीति करती आई है। कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। केवल भ्रष्टाचार के रास्ते निकाले जाते हैं। इसमें हम सभी को मिलकर काम करना होगा। ज्ञानेंद्र रावत ने बताया किस तरह से झील और तालाब को पाटकर उन पर मकान बना दिए गए हैं। इन सभी स्थानों पर अब पानी का प्राकृतिक रास्ता बंद हो चुका है। अब कभी भी भारी वर्षा की वजह से बाढ़ के हालात पैदा हो जाते है। झील-तालाब के समाप्त होने के कारण अब पानी के स्त्रोत भी समाप्त हो गए हैं। ग्रीन इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक जगदीश चौधरी ने बताया कि किस तरह कुछ वर्षों में फरीदाबाद की शान और पानी का एक बड़ा स्रोत बड़खल झील सूख गई और धीरे धीरे एक मृत झील बन गई। आज यह पर्यटन के नक्शे से बाहर हो गई है। हमें इस पर मिल जुलकर काम करना होगा और सरकार से आग्रह करना होगा कि इसके लिए एक बोर्ड का निर्माण करें जो इसके पुनरुद्धार पर काम करे। विकेश बैनीवाल ने मंच संचालन किया। इस मौके पर राजेश खुशदिल, राजेश सैन, अश्विनी कुमार, राम, रणधीर अत्री आदि मौजूद थे।