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प्रदर्शन कर कर्मियों ने बोला, गिरफ्तार कीजिए, प्रशासन ने कहा नहीं कर सकते, हमारे पास इतनी व्यवस्था नहीं

मांगों को लेकर सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत गुरुवार को सेक्टर-12 स्थित जिला सचिवालय के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 29, 2018, 02:05 AM IST

मांगों को लेकर सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत गुरुवार को सेक्टर-12 स्थित जिला सचिवालय के बाहर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सुबह हुडा सिटी पार्क के पास इकट्ठा होकर सचिवालय पहुंचे। वहां इन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम सतवीर मान को सामूहिक गिरफ्तारियां करने के लिए कहा। इस पर जवाब मिला कि हमारे पास इतनी व्यवस्था नहीं है कि हम गिरफ्तार कर सकें। इसके बाद मुलाजिम इकट्ठा होकर सेंट्रल थाने गिरफ्तारियां देने पहुंच गए, वहां भी इनकी गिरफ्तार नहीं किया गया। इसके बाद कर्मचारी वापस हो लिए।

इन मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन था

कर्मचारियों ने सरकार की वादाखिलाफी, अध्यादेश के जरिए हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने व कच्चे कर्मियों को पक्का कराने आदि मांगों को लेकर राज्य के वरिष्ठ उपप्रधान नरेश शास्त्री, जिला प्रधान अशोक कुमार, सचिव युद्धवीर सिंह खत्री, सहसचिव धर्मवीर वैष्णव, आशा वर्कर हेमलता, आंगनबाड़ी की राज्य प्रधान देवेंद्री शर्मा रोडवेज के रविंद्र नागर, शिक्षा के राजसिंह, स्वास्थ्य के विनोद कुमार, औद्योगिक संस्थान के रविंद्र अत्री के नेतृत्व में जेल भरो आंदोलन किया। इस दौरान सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं, नगर परिषद, परियोजनाओं में कार्यरत लगभग 2600 कर्मचारी शामिल हुए। महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि भाजपा ने घोषणा पत्र में पंजाब के समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, 15 हजार न्यूनतम वेतनमान देने, शिशु शिक्षा भत्ता दोगुना करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने का वादा किया था। इनमें से मनोहर लाल सरकार ने एक भी वादे को पूरा नहीं किया। सरकार इसके विपरीत अब वर्क आउटसोर्स कर बेरोजगार युवाओं को ठेका प्रथा के तहत काम करने के लिए धकेल रही है। जहां कोई श्रम कानून लागू ही नहीं होता। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के बजाय सरकार की कमजोर पैरवी के कारण 2014 में पक्के हुए 4654 कर्मचारियों के कच्चे होने व विभिन्न विभागों में अनुबंध पर लगे लाखों कर्मियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है।

सरकार सभी राजनीतिक दलों द्वारा सहयोग देने के आश्वासन के बावजूद सरकार इनकी नौकरी बचाने के लिए न अध्यादेश लाने को राजी है और न विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बिल पारित करने को तैयार है। वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक केंद्र सरकार भत्तों में जुलाई 2017 में बढ़ोतरी कर चुकी है। लेकिन हरियाणा सरकार ने अभी तक मकान किराया व मेडिकल भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कर्मचारियों को 2500 से 10 हजार तक का नुकसान प्रति माह हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार न कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की कोई स्थाई नीति बनाने को तैयार है और न बिना भेदभाव के उन्हें समान काम, समान वेतन देने को तैयार है।

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