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पार्षदों ने कहा, जब तक चीफ इंजीनियर माफी नहीं मांगते हैं, सदन का बहिष्कार जारी रहेगा

निगम सदन की 25 जून की बैठक में पार्षदों को चीफ इंजीनियर द्वारा पानी चोर कहने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पार्षदों...

Danik Bhaskar | Jun 29, 2018, 02:05 AM IST
निगम सदन की 25 जून की बैठक में पार्षदों को चीफ इंजीनियर द्वारा पानी चोर कहने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पार्षदों ने चीफ इंजीनियर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 25 जून को इसी मामले को लेकर सदन का बहिष्कार कर अलग गुट बनाने वाले पार्षदों ने कहा कि जब तक चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर माफी नहीं मांगते तब तक वे होने वाली निगम सदन की बैठकों का बहिष्कार करते रहेंगे। गुरुवार को पत्रकारों से पार्षदों ने कहा कि निगम सदन में उक्त चीफ इंजीनियर ने जिस तरह से एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के पार्षदों पर पानी चोरी का आरोप लगाया है उससे पूरे सदन का अपमान हुआ है। चोर कहने से पार्षदों की भावनाएं आहत हुई हैं। चीफ इंजीनियर के खिलाफ जो पार्षद मैदान में आ गए हैं उनमें विकास भारद्वाज, संदीप भारद्वाज, जयवीर खटाना, शीतल खटाना, सुमन भारती, ललिता यादव, महेंद्र सरपंच, नरेश नंबरदार, राकेश भड़ाना, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल, मनवीर भड़ाना, कपिल डागर, रतनपाल आदि हैं। गुरुवार को ये सभी पार्षद गोल्फ क्लब में मौजूद थे। इन्होंने कहा उक्त चीफ इंजीनियर को सबक सिखाकर ही हम सदन जाएंगे। कांग्रेस समर्थित एक पार्षद ने तो यहां तक कह दिया यदि चीफ इंजीनियर माफी नहीं मांगते हैं तो वह क्षेत्र की जनता के साथ आकर आगामी जब भी बैठक होगी सदन में तालाबंदी कर देंगे। बैठक में पार्षदों पर यह भी आरोप लगा था कि निगम के ट्यूबवेलों से पानी भरकर टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र में भिजवाते हैं। बदले में पार्षद पैसे लेते हैं। इस बात पर पार्षदों ने कहा कि यह सरासर गलत है।

पानी-सीवर समस्या को लेकर सदन का बहिष्कार कर दिया था : सदन की बैठक में एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के 11 पार्षदों ने पानी व सीवर की समस्या को लेकर सदन का बहिष्कार कर दिया था। उनके बाहर आने के बाद चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर ने बहिष्कार करने वाले पार्षदों पर पानी का खेल करने का आरोप लगाया था। इस बात की जानकारी जब पार्षदों को हुई तो उन्होंने इसे सदन का अपमान बताया अौर उक्त निगम अधिकारी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं सदन की बैठक में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और फाइनेंस कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पार्षदों के सुर चार दिन बाद ही बदल गए हैं।

पार्षदों की भावनाएं आहत हुई

अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों में खुद नहीं रहा विश्वास

चार दिन पहले सदन में परिवर्तन लाने का दावा करने वाले पार्षदों में खुद पर ही विश्वास नहीं रहा। पहले दिन सदन की बैठक खत्म होने के बाद 20 पार्षदों ने एकजुट होकर सदन में बड़ा परिवर्तन (अविश्वास प्रस्ताव) लाने का दावा किया था। लेकिन चार दिन बाद ही परिवर्तन लाने वाले पार्षदों के स्वर बदल गए। गुरुवार को प्रेसवार्ता में नए गुट के प्रधान बने महेंद्र सिंह सरपंच ने कहा कि उनकी लड़ाई अब मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर से नहीं बल्कि नगर निगम के अफसरों से है। उन्होंने अपनी बात से पलटते हुए कहा कि उन्होंने कभी अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात नहीं की। यही नहीं चार दिन पहले पार्षदों की संख्या 20 थी। जबकि गुरुवार को घटकर 17 रह गई। इससे साफ है कि पार्षदों काे अपने ऊपर ही विश्वास नहीं है।

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माफी न मांगने पर सदन में तालाबंदी करने की चेतावनी

महेंद्र सरपंच के गुट में शामिल कांग्रेस समर्थित वार्ड 21 के पार्षद जितेंद्र भड़ाना ने तो यहां तक कहा कि जिस अधिकारी ने सदन में मेयर व सीनियर डिप्टी मेयर की मौजूदगी में पार्षदों पर पानी चोरी का इल्जाम लगाया है उससे पूरे सदन का अपमान हुआ है। शर्म की बात है कि इतना सुनने के बाद भी मेयर व सीनियर डिप्टी मेयर चुप्पी साध रखी थी। अपमान का घूंट पीकर सदन ऐसे नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि चाेरी का आरोप लगाने वाले अधिकारी सदन से माफी नहीं मांगते तो वार्ड की जनता के साथ आगामी बैठक में सदन की तालाबंदी कर देंगे। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा में तालाबंदी हो सकती है तो नगर निगम सदन में क्यों नहीं। अपमान का घूंट पीकर कोई पार्षद काम नहीं करेगा। मान सम्मान सबसे पहले है।

कांग्रेस समर्थित पार्षद बोले माफी न मांगने पर जनता के साथ मिलकर निगम में कर सकते हैं तालाबंदी

किस मुंह से मंत्रियों के लिए मांगने जाएंगे वोट

भाजपा पार्षद एवं फाइनेंस कमेटी के सदस्य कपिल डागर ने कहा कि सदन में इतनी बड़ी बात हो गई लेकिन किसी मंत्री अथवा पार्टी पदाधिकारी ने इस बारे में पार्षदों से कोई बात नहीं की। उन्होंने कहा कि संगठन को जितनी जरूरत उनकी है उतनी ही जरूरत उनकी संगठन को भी है। मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं करेंगे। यह लड़ाई दलगत राजनीति से ऊपर है। डागर ने कहा चुनावी साल है। यदि हम अपने शहरवासियों को पानी तक नहीं दे पाएंगे तो किस मुंह से मंत्रियों के लिए वोट मांगने जनता के पास जाएंगे। उन्होंने कहा कि शहर के 40 वार्डों में रहने वाली 13 लाख की आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। वार्डों की जनता हमारे पास आकर कपड़े फाड़ने को तैयार रहती है। हम उन्हें क्या जवाब दें।

हाईकमान की फटकार के बाद नए मुखिया के स्वर बदले

भाजपा समर्थित पार्षदों के सदन बहिष्कार का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया था। माना जा रहा है वहां से इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई गई है। निगम अफसरों को तलब कर पानी चोरी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने और जनता को पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। यही कारण है कि नए गुट के मुखिया महेंद्र सरपंच के स्वर प्रेसवार्ता में बदले नजर आए। बैठक में मेयर व सीनियर डिप्टी मेयर समेत तीन लोगों द्वारा सदन को हाईजैक करने की अपनी बात से गुरुवार को वे मुकर गए। उन्होंने कहा अब उनकी लड़ाई सिर्फ मान सम्मान और पानी की है।

निमंत्रण देने वाले पार्षद ही वार्ता से गायब हो गए

बगावत का बिगुल बजाने के लिए प्रेसवार्ता बुलाने वाले पार्षद समेत तीन पार्षद गायब रहे। वार्ड-37 के पार्षद दीपक चौधरी ने गुरुवार को प्रेसवार्ता के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन वह खुद ही गायब रहे। इसके अलावा वार्ड-7 के पार्षद वीर सिंह नैन भी गैर-हाजिर रहे।

सबका मान सम्मान कायम रखा जाएगा