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लिफ्ट खराब, चेन्नई से आएगा पैनल तब चलेगी रैबीज के इंजेक्शन खत्म, मरीज खा रहे हंै धक्के

Faridabad News - यह है फरीदाबाद जिले का सबसे बड़ा अस्पताल बीके। इसे सुपर स्पेशलिटी का दर्जा हासिल है। यहां रोज 1000 से 1200 मरीजों की...

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2018, 02:05 AM IST
लिफ्ट खराब, चेन्नई से आएगा पैनल तब चलेगी रैबीज के इंजेक्शन खत्म, मरीज खा रहे हंै धक्के
यह है फरीदाबाद जिले का सबसे बड़ा अस्पताल बीके। इसे सुपर स्पेशलिटी का दर्जा हासिल है। यहां रोज 1000 से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन अस्पताल की हकीकत यह है कि कभी लिफ्ट खराब है तो कभी दवाएं नहीं हैं। इस समय लिफ्ट का पैनल खराब है। अब यह चेन्नई से आएगा, तब यह ठीक होगी। जब तक मरीज ऊपर के फ्लोर पर दूसरों के कंधों के सहारे ही चढ़ेंगे और उतरेंगे। यही नहीं अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टाक 4 जुलाई से खत्म है। इंजेक्शन 20 जुलाई तक आने की संभावना है। यह समस्या इतनी गंभीर है कि अस्पताल में हर 15 दिन में इंजेक्शन खत्म हो जाते हैं। इसके बाद डिमांड भेजी जाती है तब इंजेक्शन आते हैं। जबकि रैबीज के 50 से 60 मरीज रोज आते हैं। इस समय इंजेक्शन न होने से ये मरीज बाहर से महंगे इंजेक्शन लगवाने के लिए मजबूर हैं। यही नहीं अस्पताल में और भी समस्याएं हैं, जिनके कारण मरीज परेशान हो रहे हैं।

बीके में रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक खत्म

बीके अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टॉक भी खत्म है। इससे मरीजों को इंजेक्शन नहीं लग रहे हैं। डॉग बाइट व मंकी बाइट के मरीजों को वापस भेजा जा रहा है। ऐसे में मरीज बाहर से महंगा इंजेक्शन लगवाने के लिए मजबूर हैं। 20 जुलाई तक इंजेक्शन का स्टॉक आने की उम्मीद है। ऐसे में इंजेक्शन लगवाने के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। बीके में आए दिन रैबीज के इंजेक्शनों का स्टॉक खत्म हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे इंतजाम नहीं किए जा रहे, कि स्टॉक खत्म होने से पहले ही नया स्टॉक आ जाए। इंजेक्शन की शार्टेज न पड़े और मरीजों को परेशानी न झेलनी पड़े। अस्पताल में 4 जुलाई से रैबीज के इंजेक्शन खत्म हैं। अस्पताल में रोज लगभग 50 से 60 लोगों को यह इंजेक्शन लगाया जाता है। अब लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। बीके अस्पताल में इंजेक्शन के लिए 100 रुपए लिए जाते हैं। जबकि बाहर इसके लिए 350 रुपए तक वसूले जाते हैं। जवाहर कालोनी से राजबीर सिंह बच्चे को रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए सोमवार को बीके आए थे। यहां कार्ड बनाने से पहले ही कह दिया गया कि इंजेक्शन नहीं हैं। राजबीर के अनुसार वे बच्चे को इंजेक्शन तो लगवाएंगे। भले ही बाहर से महंगा इंजेक्शन लगवाना पड़े।

परेशानी| लिफ्ट का पैनल पूरी तरह से जल गया है। इसे मंगाने के लिए चेन्नई आर्डर किया गया है

फरीदाबाद. बीके हॉस्पिटल का दवाई सेंटर।

लिफ्ट बंद होने से मरीजों को परेशानी

बीके की लिफ्ट बंद होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। फिलहाल लिफ्ट जल्द ठीक होने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि का इसका पैनल पूरी तरह से जल गया है। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से नया पैनल मंगाया तो गया है, लेकिन इसमें काफी समय लगेगा। पैनल लगने के बाद ही लिफ्ट शुरू हो पाएगी। ऐसे में मरीजों की परेशानी अभी खत्म होने वाली नहीं है।


डिमांड भेज दी, जल्द इंजेक्शन आ जाएंगे

भास्कर न्यूज | फरीदाबाद

यह है फरीदाबाद जिले का सबसे बड़ा अस्पताल बीके। इसे सुपर स्पेशलिटी का दर्जा हासिल है। यहां रोज 1000 से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन अस्पताल की हकीकत यह है कि कभी लिफ्ट खराब है तो कभी दवाएं नहीं हैं। इस समय लिफ्ट का पैनल खराब है। अब यह चेन्नई से आएगा, तब यह ठीक होगी। जब तक मरीज ऊपर के फ्लोर पर दूसरों के कंधों के सहारे ही चढ़ेंगे और उतरेंगे। यही नहीं अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टाक 4 जुलाई से खत्म है। इंजेक्शन 20 जुलाई तक आने की संभावना है। यह समस्या इतनी गंभीर है कि अस्पताल में हर 15 दिन में इंजेक्शन खत्म हो जाते हैं। इसके बाद डिमांड भेजी जाती है तब इंजेक्शन आते हैं। जबकि रैबीज के 50 से 60 मरीज रोज आते हैं। इस समय इंजेक्शन न होने से ये मरीज बाहर से महंगे इंजेक्शन लगवाने के लिए मजबूर हैं। यही नहीं अस्पताल में और भी समस्याएं हैं, जिनके कारण मरीज परेशान हो रहे हैं।

बीके में रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक खत्म

बीके अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टॉक भी खत्म है। इससे मरीजों को इंजेक्शन नहीं लग रहे हैं। डॉग बाइट व मंकी बाइट के मरीजों को वापस भेजा जा रहा है। ऐसे में मरीज बाहर से महंगा इंजेक्शन लगवाने के लिए मजबूर हैं। 20 जुलाई तक इंजेक्शन का स्टॉक आने की उम्मीद है। ऐसे में इंजेक्शन लगवाने के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। बीके में आए दिन रैबीज के इंजेक्शनों का स्टॉक खत्म हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे इंतजाम नहीं किए जा रहे, कि स्टॉक खत्म होने से पहले ही नया स्टॉक आ जाए। इंजेक्शन की शार्टेज न पड़े और मरीजों को परेशानी न झेलनी पड़े। अस्पताल में 4 जुलाई से रैबीज के इंजेक्शन खत्म हैं। अस्पताल में रोज लगभग 50 से 60 लोगों को यह इंजेक्शन लगाया जाता है। अब लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। बीके अस्पताल में इंजेक्शन के लिए 100 रुपए लिए जाते हैं। जबकि बाहर इसके लिए 350 रुपए तक वसूले जाते हैं। जवाहर कालोनी से राजबीर सिंह बच्चे को रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए सोमवार को बीके आए थे। यहां कार्ड बनाने से पहले ही कह दिया गया कि इंजेक्शन नहीं हैं। राजबीर के अनुसार वे बच्चे को इंजेक्शन तो लगवाएंगे। भले ही बाहर से महंगा इंजेक्शन लगवाना पड़े।

लापरवाही| रैबीज का स्टॉक 4 जुलाई से खत्म, अधिकारी कह रहे हैं 20 जुलाई तक स्टाक आएगा

घर में लार्वा मिला तो एक हजार का जुर्माना

पलवल| डेंगू तथा मलेरिया की रोकथाम के लिए हेल्थ विभाग सख्ती के मूड में है। लोग भी अलर्ट हो जाएं। जिस घर में लार्वा पाया जाएगा उस पर 1000 रुपए का जुर्माना किया जाएगा। इस बार 10 टीमें बनाई गई हैं, जो फॉगिंग करने के साथ ही घरों में लार्वा की जांच कर रही हैं। एक टीम में पांच लोग शामिल हैं। इसके अलावा चार हेल्थ इंस्पेक्टर तथा 20 निरीक्षक लगाए गए हैं। हेल्थ विभाग की मलेरियारोधी टीमों ने दो माह से चलाए जा रहे अभियान में एक लाख से अधिक घरों व सार्वजनिक स्थानों पर पानी की जांच की है। इस दौरान 185 घरों में लार्वा पाया गया। इन्हें नोटिस दिया गया है। घर-घर चलाए जा रहे अभियान में करीब 24 हजार लोगों के रक्त की जांच की गई है। इनमें से 105 लोगों में मलेरिया के लक्षण पाए गए हैं। मलेरिया प्रभावित लोगों में पलवल में नौ, औरंगाबाद में 10, दुधौला में 14, हथीन में 31 व होडल में 31 लोग शामिल हैं। विभाग ने मलेरिया उन्मूलन अभियान के लिए मेवात विकास प्राधिकरण से 15 लाख रुपए की राशि की मांग भी की है।

कई दिन तक रहेगी मरीजों की परेशानी

हकीकत| रोज 1000 से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन मरीजों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं

शुक्रवार को बीके की लिफ्ट के पैनल में शॉट सर्किट होने से यह खराब हो गई। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को काफी दिक्कत हो रही है। लिफ्ट बंद होने से लोगों को सीढ़ी, रैंप या तीमारदारों के कंधों के सहारे ऊपर के फ्लोर पर आना-जाना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत सर्जरी वाले पेशेंट व बुजुर्गों को हो रही है। कुछ दिनों तक लोगों को इसी तरह से परेशानी झेलनी पड़ेगी।

एनक्यूएएस की परीक्षा में पास होने की तैयारी

बीके अस्पताल के हालात ठीक नहीं हैं जबकि तैयारी कर रहे हैं नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) की परीक्षा पास करने की। क्वालिटी सर्टिफिकेट के लिए एनक्यूएएस में अस्पताल को 70 फीसदी से ज्यादा अंक लाने होते हैं। अगर अस्पताल को यह सर्टिफिकेट मिलता है तो सरकार की ओर से 15 हजार रुपए प्रति बेड के हिसाब से सालाना प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि अस्पताल की सुविधाओं पर खर्च होती है, लेकिन हकीकत यह है कि क्या अस्पताल इन अव्यवस्थाओं के बीच यह परीक्षा पास कर पाएगा।

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