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बीके में लगे सीसीटीवी की िनगरानी को तय नहीं जवाबदेही, कैसे होगी मरीजों की सुरक्षा

िजले के सबसे बड़े अस्पताल बीके में िनगरानी के लिए 48 सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए लेकिन इनकी निगरानी के लिए कोई...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:05 AM IST
िजले के सबसे बड़े अस्पताल बीके में िनगरानी के लिए 48 सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए लेकिन इनकी निगरानी के लिए कोई गाइडलाइन तैयार नहीं की गई। यही नहीं किसी की जवाबदेही भी तय नहीं की गई कि सीसीटीवी की मॉनिटरिंग कौन करेगा। ऐसे में मरीजों खासकर महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है यह सोचने वाली बात है। मंगलवार रात 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद अब अस्पताल प्रबंधन यह िवचार करने में लगा है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए किसी न किसी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए जिससे आगे इस तरह की घटना न हो। यदि हो भी तो संबंधित जवाबदेह से सवाल जवाब किया जा सके।

लचर सुरक्षा, कोई भी आता-जाता रहता है

बीके अस्पताल में रोज 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। 200 बेड वाले इस अस्पताल में रात को बड़ी संख्या में मरीज रहते हैं। इनमें महिलाएं भी होती हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर सब कुछ भगवान भरोसे है। कहने को तो अस्पताल प्रबंधन ने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात कर रखे हैं। लेकिन रात में अस्पताल आने-जाने वालों की टोका-टाकी तक सुरक्षा गार्ड नहीं करते। कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी भी फ्लोर तक जा सकता है।

अब सिक्योरिटी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा

अस्पताल में हुई घटना के बाद यहां की सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। इसके अलावा रात 8 बजे के बाद अस्पताल में एक ही एंट्री को खुला रखना शुरू कर दिया गया है। शुक्रवार को सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की गई। बारिश के दिनों में भी कैमरे सही तरीके से काम करें, इसकी व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम है, इससे सभी जगह गार्डों की तैनाती नहीं हो पाती है। इस समय अस्पताल में केवल 25 सुरक्षाकर्मी हैं। ये भी तीन शिफ्टों में काम करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 15 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की मांग उच्चाधिकारियों से की है। महिला वार्ड में सुरक्षा की अधिक जरूरत होती है। इसलिए महिला सुरक्षा कर्मियाें की संख्या अधिक रखने की मांग की गई है। पीएमओ डा. वीरेंद्र यादव के अनुसार अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों को बढ़ाने का प्रस्ताव हमने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। हमारा प्रयास है कि महिला वार्डों में अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए।

दुष्कर्म की घटना के बाद अब अस्पताल प्रबंधन यह िवचार करने में लगा है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए किसी न किसी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए

रोज करीब 1500 मरीजों की होती है ओपीडी, रात के वक्त करीब 200 मरीज रहते हैं अस्पताल में

दो साल पहले अस्पताल मंे लगाए गए थे कैमरे

बीके अस्पताल में करीब दो साल पहले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। लेकिन उसके कंट्रोल रूम और जिम्मेदारी की कोई गाइड लाइन तैयार नहीं की गई। यानी सीसीटीवी कैमरे की मॉनिटरिंग की कोई जवाबदेही किसी की तय नहीं की गई। इसी लिए अस्पताल प्रबंधन भी सीधे तौर पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

सोमवार को आएगी मामले की जांच रिपोर्ट

भास्कर न्यूज | फरीदाबाद

िजले के सबसे बड़े अस्पताल बीके में िनगरानी के लिए 48 सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए लेकिन इनकी निगरानी के लिए कोई गाइडलाइन तैयार नहीं की गई। यही नहीं किसी की जवाबदेही भी तय नहीं की गई कि सीसीटीवी की मॉनिटरिंग कौन करेगा। ऐसे में मरीजों खासकर महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है यह सोचने वाली बात है। मंगलवार रात 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद अब अस्पताल प्रबंधन यह िवचार करने में लगा है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए किसी न किसी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए जिससे आगे इस तरह की घटना न हो। यदि हो भी तो संबंधित जवाबदेह से सवाल जवाब किया जा सके।

लचर सुरक्षा, कोई भी आता-जाता रहता है

बीके अस्पताल में रोज 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। 200 बेड वाले इस अस्पताल में रात को बड़ी संख्या में मरीज रहते हैं। इनमें महिलाएं भी होती हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर सब कुछ भगवान भरोसे है। कहने को तो अस्पताल प्रबंधन ने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात कर रखे हैं। लेकिन रात में अस्पताल आने-जाने वालों की टोका-टाकी तक सुरक्षा गार्ड नहीं करते। कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी भी फ्लोर तक जा सकता है।

अब सिक्योरिटी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा

अस्पताल में हुई घटना के बाद यहां की सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। इसके अलावा रात 8 बजे के बाद अस्पताल में एक ही एंट्री को खुला रखना शुरू कर दिया गया है। शुक्रवार को सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की गई। बारिश के दिनों में भी कैमरे सही तरीके से काम करें, इसकी व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम है, इससे सभी जगह गार्डों की तैनाती नहीं हो पाती है। इस समय अस्पताल में केवल 25 सुरक्षाकर्मी हैं। ये भी तीन शिफ्टों में काम करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 15 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की मांग उच्चाधिकारियों से की है। महिला वार्ड में सुरक्षा की अधिक जरूरत होती है। इसलिए महिला सुरक्षा कर्मियाें की संख्या अधिक रखने की मांग की गई है। पीएमओ डा. वीरेंद्र यादव के अनुसार अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों को बढ़ाने का प्रस्ताव हमने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। हमारा प्रयास है कि महिला वार्डों में अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए।

बीके हॉस्पिटल

अस्पताल में हुई घटना की जांच के लिए 7 लोगों की कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी को शुक्रवार को जांच रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अब सोमवार को जांच रिपोर्ट आने की बात कही जा रही है। पीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार जांच अभी जारी है। कमेटी सोमवार को जांच रिपोर्ट देगी।

बीके अस्पताल के

पीएमओ ने उठाए सवाल

कार्यकारी पीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव ने भी सीसीटीवी की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सबसे पहले यह पता किया जाना चाहिए कि िकस अधिकारी ने सीसीटीवी कैमरे लगाने की परमिशन दी। परमीशन दी तो किसी की जवाबदेही क्यों नहीं तय की गई। मॉनिटरिंग की कोई गाइडलाइन क्यों तय नहीं की गई। क्या सीसीटीवी कैमरे लगा देने से ही सारी समस्या का हल हो जाता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर कैमरे हाेने चाहिए। लेकिन उसके लिए प्रॉपर गाइड लाइन हो। साथ ही कंट्रोल रूम बनाकर किसी की जवाबदेही तय करनी चाहिए। अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर से किसे 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे की निगरानी के लिए बैठा सकता है।

भास्कर न्यूज | फरीदाबाद

िजले के सबसे बड़े अस्पताल बीके में िनगरानी के लिए 48 सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए लेकिन इनकी निगरानी के लिए कोई गाइडलाइन तैयार नहीं की गई। यही नहीं किसी की जवाबदेही भी तय नहीं की गई कि सीसीटीवी की मॉनिटरिंग कौन करेगा। ऐसे में मरीजों खासकर महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है यह सोचने वाली बात है। मंगलवार रात 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद अब अस्पताल प्रबंधन यह िवचार करने में लगा है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए किसी न किसी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए जिससे आगे इस तरह की घटना न हो। यदि हो भी तो संबंधित जवाबदेह से सवाल जवाब किया जा सके।

लचर सुरक्षा, कोई भी आता-जाता रहता है

बीके अस्पताल में रोज 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। 200 बेड वाले इस अस्पताल में रात को बड़ी संख्या में मरीज रहते हैं। इनमें महिलाएं भी होती हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर सब कुछ भगवान भरोसे है। कहने को तो अस्पताल प्रबंधन ने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात कर रखे हैं। लेकिन रात में अस्पताल आने-जाने वालों की टोका-टाकी तक सुरक्षा गार्ड नहीं करते। कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी भी फ्लोर तक जा सकता है।

अब सिक्योरिटी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा

अस्पताल में हुई घटना के बाद यहां की सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। इसके अलावा रात 8 बजे के बाद अस्पताल में एक ही एंट्री को खुला रखना शुरू कर दिया गया है। शुक्रवार को सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की गई। बारिश के दिनों में भी कैमरे सही तरीके से काम करें, इसकी व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम है, इससे सभी जगह गार्डों की तैनाती नहीं हो पाती है। इस समय अस्पताल में केवल 25 सुरक्षाकर्मी हैं। ये भी तीन शिफ्टों में काम करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 15 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की मांग उच्चाधिकारियों से की है। महिला वार्ड में सुरक्षा की अधिक जरूरत होती है। इसलिए महिला सुरक्षा कर्मियाें की संख्या अधिक रखने की मांग की गई है। पीएमओ डा. वीरेंद्र यादव के अनुसार अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों को बढ़ाने का प्रस्ताव हमने उच्चाधिकारियों के पास भेजा है। हमारा प्रयास है कि महिला वार्डों में अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए।