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पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया तो अदालत ने 210 मामलों की सुनवाई कर डेढ़ साल में आरोपियों से ही लगवाए 50 हजार पौधे

हरियाणा में यमुनानगर के कलेसर जंगल में पेड़ काटने पर अब्दुल के खिलाफ वन विभाग ने केस दर्ज किया। पर्यावरण अदालत से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 25, 2018, 02:10 AM IST

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    हरियाणा में यमुनानगर के कलेसर जंगल में पेड़ काटने पर अब्दुल के खिलाफ वन विभाग ने केस दर्ज किया। पर्यावरण अदालत से अब्दुल को इस शर्त पर मिली जमानत मिली कि वह 51 पौधे लगाकर छह महीने तक उनकी देखरेख करेगा। ऐसे ही अम्बाला में स्क्रीनिंग फैक्टरी संचालक रामसिंह पर वायु प्रदूषण फैलाने के दोषी पाए गए, उन्हें भी 51 पौधे लगाने पड़े। कुरुक्षेत्र स्थित विशेष पर्यावरण अदालत के विशेष पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक दो साल में 210 मामलों में ऐसी अनूठी अतिरिक्त सजा दे चुके हैं। फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ एक्ट में जुर्माने या कैद की सजा का प्रावधान है, लेकिन पर्यावरण की कीमत का अहसास कराने के लिए जज पौधारोपण की अतिरिक्त सजा दे रहे हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद में पर्यावरण कोर्ट हैं। कुरुक्षेत्र कोर्ट के अंतर्गत 15 जिले हैं। वन, वन्य जीव और प्रदूषण से जुड़े केस यहां सुने जाते हैं। दो साल पहले विशेष पीठासीन अधिकारी ने वन अधिनियम में एक दोषी को हर्जाने के साथ ही पौधे लगाने की सजा दी। इसके बाद तय किया कि हर दोषी से खासकर फॉरेस्ट एक्ट के मामलों में सजा के रूप में पौधे भी जरूर लगवाएंगे। पिछले साल से जमानत में भी कम से कम 51 पौधे लगाकर 6 माह निगरानी करने की शर्त जोड़ दी। यह इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927, इंडियन वाइल्ड लाइफ एक्ट और वाटर पॉल्यूशन एवं एयर पॉल्यूशन एक्ट 1980 में दी गई सजा के अतिरिक्त है। कुछ आरोपी सहर्ष मानते हैं, तो कुछ मजबूरी में पौधरोपण करते हैं।

    सजा देकर संवार रहे हरियाणा की सेहत : 51 पौधे लगाने व 6 माह देखरेख की शर्त पर बेल

    फैसले के बाद.... 42718 पेड़ लगवाए

    जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक अदालत 130 मामलों में फैसला सुनाते हुए 42,718 पौधे लगवा चुकी है। जबकि जमानत के मामलों में 8,500 पौधे लगे हैं। वन अधिनियम में टहनी से लेकर पेड़ काटने पर अधिकतम एक साल की सजा होती है। अधिकांश मामलों में आरोपी से वन विभाग हर्जाना भरवाता है। हर्जाना न देने पर केस कोर्ट जाता है। कोर्ट भी अधिकतर मामलों में आरोपी से हर्जाना भरवाया जाता है। पिछले साल ही रिलायंस कर्मचारियों द्वारा कैथल, कुरुक्षेत्र व पंचकूला में 4जी केबल बिछाते समय पौधों को क्षति पहुंचाने का मामला सामने आया। कोर्ट ने वन विभाग द्वारा तय 20 लाख रुपए हर्जाना भरवाने के साथ ही तीनों जिलों में नौ हजार पौधे भी लगवाए।

    प्लांटेशन रिपोर्ट जरूरी

    जमानती व दोषी को पौधरोपण करने के बाद बाकायदा कोर्ट में प्लांटेशन रिपोर्ट देनी पड़ती है। पौधे लगाने के बाद गांव के मुखिया या शहर में वार्ड पार्षद की वेरीफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट व वन विभाग में जमा करानी होती है। पर्यावरण अदालत संबंधित एरिया के डीएफओ से क्रॉस चेक कराती है। रेंज या ब्लॉक अफसर क्रॉस चेक कर अलग से रिपोर्ट जमा करते हैं।

    कानून ऐसा नहीं, प्रयास सराहनीय ःसीनियर एडवोकेट जयसिंह देशवाल और एसएस जैदका कहते हैं कि एक्ट में ऐसी सजा या शर्त नहीं है। लेकिन कोर्ट पर पर्यावरण का जिम्मा है, ऐसे में जज विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सोच सराहनीय है और परिणाम सकारात्मक हैं। डीएफओ विरेंद्र गिल कहते हैं कि इससे पौधों या जीवों को क्षति पहुंचाने वाले को जिंदगी भर का सबक मिलता है।

    पौधे लगाने वाले को देनी पड़ती है प्लांटेशन रिपोर्ट, फिर वन विभाग से कराते हैं क्रॉस चेक

    अहसास कराना जरूरी

    विशेष पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक की सोच है कि सिर्फ हर्जाने से क्षति का अहसास संबंधित व्यक्ति को नहीं होगा। जब वह पौधे लगाएगा तो इसका महत्व भी समझेगा। उसे अपने खर्च पर नर्सरी से पौधे लाने होते हैं। गड्ढे कराने से लेकर पौधों को सींचने का जिम्मा भी उसका होता है। खास बात यह है कि अब तक एक भी मामले में नाफरमानी नहीं हुई है।

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