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पार्षदों का आरोप 3 लोगों ने सदन काे कर रखा है हाइजैक, नहीं होने दे रहे काम, हर फाइल में कमेटी लगा देती है आब्जेक्शन

निगम सदन की बैठक के एक दिन पहले केंद्रीय राज्यमंत्री का पार्षदों को लंच कराना भी हंगामे काे नहीं रोक पाया। एनआईटी...

Danik Bhaskar

Jun 26, 2018, 01:45 PM IST
निगम सदन की बैठक के एक दिन पहले केंद्रीय राज्यमंत्री का पार्षदों को लंच कराना भी हंगामे काे नहीं रोक पाया। एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के पार्षदों ने पानी और सीवर जाम की समस्या को लेकर बैठक में जमकर हंगामा किया। उन्होंने निगम अफसरों को खूब खरी खोटी सुनाई। संतोषजनक जवाब न मिलने से नाराज 11 पार्षदों ने सदन का बहिष्कार कर बाहर चले गए। इन पार्षदों ने आरोप लगाया कि तीन लोग मेयर सुमन बाला, सीनियर डिप्टी मेयर देवेंद्र चौधरी और फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन धनेश अदलखा ने पूरे सदन को हाइजैक कर रखा है। पार्षद फाइल तैयार कराते हैं। इसके बाद आब्जेक्शन लगाकर उसे रोक दिया जाता है। वार्डों में विकास कार्य रुके पड़े हैं। जनता पार्षदों के कपड़े फाड़ रही है। पार्षदों ने यह भी कहा कि सदन गठन हुए डेढ़ साल हो गए। इस समयावधि में सीवर-पानी तक की समस्या का समाधान नहीं हो पाया तो बैठक में आने का मतलब क्या है। बार-बार सदन की बैठक से एक दिन पहले लॉलीपॉप दे दिया जाता है। कभी लंच तो कभी और लालच। अब ऐसा नहीं चलेगा। सोमवार सवा 11 बजे शुरू हुई सदन की बैठक महज सवा घंटे में 12.30 बजे खत्म हो गई।

पार्षदों ने कहा, जब सदन में सुनवाई नहीं हो रही है तो बैठक में आने का मतलब नहीं

पानी-सीवर को लेकर पार्षद अपनी बात रखते रहे, लेकिन न मेयर ने उनकी समस्या का पर कोई जवाब दिया और न अफसरों ने। इसके बाद 11 पार्षद सदन का बहिष्कार कर बाहर चले गए। इनमें पार्षद रतनपाल, सुरेंद्र अग्रवाल, मनबीर भड़ाना, नरेश नंबरदार, महेंद्र सरपंच, वीर सिंह नैन, ललिता यादव, ममता चौधरी, शीतल खटाना, जयवीर खटाना, सुमन भारती और सपना डागर शामिल थे। उक्त पार्षदों का कहना था कि जब सदन में उनकी बात की सुनवाई नहीं हो रही है तो बैठक में शामिल रहने का काेई मतलब नहीं।

दो करोड़ मिले या न मिलें वार्डों में काम होने चाहिए

फरीदाबाद. पानी व सीवरेज की समस्या को लेकर नगर निगम सभागार में सदन के मीटिंग में हंगामा करते पार्षद।

सब काम छोड़कर पानी-सीवर समस्या का समाधान करो

पार्षदों का कहना था कि उन्हें दो-दो करोड़ मिलें या न मिलें लेकिन वार्डों में विकास कार्य होने चाहिए। कितनी मुश्किल से काम की फाइल तैयार होती है। बाद में निगम अधिकारी फाइनेंस कमेटी के साथ मिलकर उसमें आब्जेक्शन लगाकर रोक देते हैं। दो-तीन लोगों ने पूरे सदन को हाइजैक कर रखा है। ये लोग अपने पॉवर का इस्तेमाल कर मनमानी कर रहे हैं। चुनाव में वोट मांगने पार्षद ही जाएंगे नगर निगम के अधिकारी नहीं। इस बार पता चल जाएगा। निगम के अधिकारी ही सरकार की लुटिया डुबोएंगे।

सोमवार सुबह 11.15 बजे सदन की बैठक शुरू हुई। इसके शुरू होते ही वार्ड पांच की पार्षद ललिता यादव व वार्ड-7 के पार्षद वीरसिंह नैन खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में पानी-सीवर की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। जनता उनके कपड़े फाड़ने को तैयार है। डेढ़ साल में छह बैठकें हो चुकी हैं। ऐसे में जब पानी और सीवर की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है तो बैठक करने का फायदा क्या है। वार्ड-1 की सपना डागर, वार्ड-2 की प्रियंका चौधरी, वार्ड तीन के जयवीर खटाना, वार्ड 4 की शीतल खटाना, वार्ड नौ के महेंद्र सिंह सरपंच आदि पार्षद खड़े हो गए और पानी व सीवर समस्या को लेकर मेयर व निगम अफसरों को घेरना शुरू कर दिया। पार्षदों ने कहा कि शर्म की बात है कि जनता गंदा पानी पीने के लिए मजबूर है। मेयर महोदय हम यहां समोसा-मिठाई खाने नहीं आते हैं। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं, लेकिन यहां कुछ भी नहीं होता है।

फरीदाबाद. सदन के मीटिंग का बहिष्कार कर निगम सभागार से बाहर आते पार्षद।

एक पार्षद को वीआईपी सुविधा मिल सकती है तो हमें क्यों नहीं

11 पार्षदों के सदन का बहिष्कार करने से पहले वार्ड 26 के पार्षद अजय बैसला खड़े होकर बोले इंद्रप्रस्थ काॅलाेनी में प्राइवेट कॉलोनाइजर ने पानी सप्लाई बंद कर दिया। क्योंकि नगर निगम ने उक्त काॅलोनी को टेकओवर कर लिया। निगम अफसरों के सहयोग से हमने तीन दिन में पानी की सप्लाई बहाल करा दी। उनकी बात सुन एनआईटी क्षेत्र के पार्षदों ने मेयर से पूछा कि जब एक पार्षद को वीआईपी सुविधा मिल सकती है तो हमारे इलाके में क्यों नहीं पानी मिल सकता।

पार्षदों ने निगम कमिश्नर को सुनाई खरी-खरी

निगम कमिश्नर मोहम्मद शाइन द्वारा पार्षदों से न मिलने का मुद्दा भी सदन में छाया रहा। कई पार्षदों ने उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई। वार्ड -36 के पार्षद दीपक यादव ने कहा कि अध्यक्ष महोदय हम लोग निगम कमिश्नर से मिलने जाते हैं तो वे मिलने से इंकार कर देते हैं। हमें जनता ने चुनकर भेजा है। जवाब हमें देना पड़ता है। कमिश्नर ऐसे मिलने से कैसे मना कर सकते हैं। कमिश्नर ने जो जवाब दिया सदन सुनकर सन्न रह गया। उन्होंने कहा हमारे से पहले कमिश्नर चंडीगढ़ से सदन चलाते थे। क्या अाप लोग चंडीगढ़ मिलने जाते थे। उनके जवाब को सुन वार्ड-22 के पार्षद जितेंद्र भड़ाना ने एतराज जताया और कहा कि कमिश्नर को ऐसा जवाब देना उचित नहीं है। कमिश्नर को पार्षदों से मिलना होगा। पार्षद को जब भी जरूरत होगी वह कमिश्नर से मिलेंगे। इसके बाद कमिश्नर ने चुप्पी साध ली।

19 पार्षदों का नया गुट महेंद्र सरपंच बने अध्यक्ष

सवा घंटे में ही सदन की बैठक खत्म होने के बाद 19 पार्षद गोल्फ क्लब पहुंच गए। पत्रकारों से वार्ता कर अलग गुट बनाने की घोषणा की गई। वार्ड नौ के पार्षद महेंद्र सिंह सरपंच को अपना अध्यक्ष चुना। नए गुट में रतनपाल, सुरेंद्र अग्रवाल, मनबीर भड़ाना, राकेश भड़ाना, नरेश नंबरदार, संदीप भारद्वाज, विकास भारद्वाज, वीर सिंह नैन, जितेंद्र भड़ाना, ललिता यादव, ममता चौधरी, शीतल खटाना, जयवीर खटाना, सुमन भारती, सपना डागर, कपिल डागर, दीपक चौधरी व दीपक यादव शामिल हैं। पत्रकारों से वार्ता में महेंद्र सिंह सरपंच ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी पार्षद अथवा अधिकारियों से नहीं है। लड़ाई सिर्फ मान सम्मान की है। हम सभी के वार्डों में विकास कार्य होने चाहिए। जिन लोगों ने सदन को हाइजैक कर रखा है उसे अब बदलने की जरूरत है।

चीफ इंजीनियर के खिलाफ विजिलेंस जांच की मांग

एकजुट हुए 19 पार्षदों ने एक स्वर से कहा कि पार्षदों पर चोरी का आरोप लगाने वाले नगर निगम के अधिकारी ही सबसे बड़े चोर हैं। वर्षों से यहां जमे निगम अफसरों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए। सैलरी हजारों में संपत्ति करोड़ों में। यह कहां से आ रहा है। पार्षदों पर चोरी का आरोप लगाना शहर की जनता का अपमान है। उन्होंने चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर के खिलाफ विजिलेंस जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पार्षद इस मुद्दे पर बैठने वाले नहीं हैं। नए गुट ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर सदन में उलटफेर होगा। यह सब जनता के सामने होगा।

पार्षदों पर लगाया पानी चोरी कराने का आरोप

11 पार्षदों के सदन का बहिष्कार करने के बाद पानी की समस्या पर निगम के चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर ने कहा कि रैनीवेल का वाटर लेवल भी डाउन हो रहा है। रिचार्ज तब होगा जब यमुना में पानी आएगा। कुछ लोगों ने पाइपों को पंचर कर रखा है। उन्होंने कहा कि पानी चोरी करने वालों का चालान करने के लिए सदन में प्रस्ताव लाना होगा। बात-बात में उन्होंने कहा जो पार्षद बहिष्कार करके गए हैं, उन्हीं के इलाके में सबसे अधिक पानी की चोरी हो रही है। 20 फीसदी लोगों के पास वैध कनेक्शन नहीं हैं। खुद पार्षद जबरन पानी का खेल करा रहे हैं। निगम अधिकारी बेबस हैं। डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग ने सदन में ऐसी पॉलिसी बनाने पर सहमति जताई और कहा कि पानी सप्लाई की प्रॉपर मॉनिटरिंग होनी चाहिए। इसके पूर्व महेंद्र सरपंच ने धनेश अदलखा पर पानी सप्लाई बंद कराने का आरोप लगाया।

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