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राम (गोपाल) वर्मा का वनवास

हर देश में महाकाव्य रचे गए हैं, क्योंकि अवाम को महाकाव्य की आवश्यकता होती है। अदालतों में सत्य वचन बोलने की शपथ...

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:00 AM IST
Faridabad - राम (गोपाल) वर्मा का वनवास
हर देश में महाकाव्य रचे गए हैं, क्योंकि अवाम को महाकाव्य की आवश्यकता होती है। अदालतों में सत्य वचन बोलने की शपथ लेने के लिए एक पवित्र पुस्तक की आवश्यकता होती है। अंग्रेजों ने अदालत की स्थापना की तो शपथ के लिए उन्होंने गीता को चुना जो महाभारत का हिस्सा है। उसका आकार सुविधाजनक होने के कारण ही उसे चुना गया। फिल्म ‘जॉली एलएलबी' में संवाद है कि देश में 3 करोड़ मुकदमें कतार में हैं, क्योंकि मात्र 21000 अदालतें बनी हैं। जजों की संख्या सीमित है। हजारों युवा हिरासत में हैं जिन पर न कोई एफआईआर दर्ज है, न ही उन्हें अदालत में पेश किया गया है। इन अभागों में अधिकांश लोग एक मजहब विशेष के अनुयायी हैं और वोट बैंक की राजनीति के कारण उस वर्ग को हाशिये में ढकेल दिया जाता है।

हिटलर ने यहूदियों के साथ ऐसा ही करके अपने विनाश की आधारशिला रख दी थी और हिटलर के अपराध को ही दोहराया गया, जब उसकी पराजय के बाद यहूदियों की मांग पर उन्हें इजरायल की स्थापना के लिए वह भू-भाग दिया गया जहां सैकड़ों वर्षों से रह रहे लोगों को खदेड़कर हाशिये पर भेज दिया गया। इस दुर्घटना ने जन्म दिया आधुनिक आतंकवाद को जिसकी लपटें सभी देश महसूस कर रहे हैं। अमेरिका के पास अपनी कोई मायथोलॉजी नहीं है, उनके पास महाकाव्य भी नहीं है। मारियो पूजो का उपन्यास ‘गॉडफादर' ही उनकी ‘महाभारत' मान लिया जाना चाहिए। दरअसल, पूंजीवादी व्यवस्था ही ‘गॉडफादर' में वर्णित क्रियाकलाप की तरह संचालित की जाती है। अमेरिका में यूरोप की सिसली नामक जगह से बेहतर अवसर की तलाश में लोग अमेरिका आए थे और काम नहीं मिलने पर उन्होंने अपराध करना प्रारंभ किए। उनमें मौजूद एक चतुर सुजान ने अपराध जगत को संगठित किया और संगठन को नाम दिया ‘परिवार' का इस ‘परिवार' के नियम है और नियम पर चलना अनिवार्य माना जाता है। नियम भंग करने पर ‘परिवार' का ही एक भाई उस दूसरे भाई को मार देता है, जिसने नियम भंग किया है। इसी कार्य प्रणाली को अपनाते हुए राजनीति में भी ‘परिवार' का उदय हुआ है। वही अनुशासन, वही परिश्रम और वही संकीर्णता का वृहद संचार है यह। मारियो पूजो के उपन्यास 'गॉडफादर' से प्रेरित फिल्म बनाई गई, जिसे दुनिया के सारे देशों में खूब सराहा गया। मार्लन ब्रांडो ने केंद्रीय भूमिका निर्वाह के लिए नया जबड़ा (डेन्चर) लगाया और माथे पर एक गांठ शल्यक्रिया द्वारा आरोपित करवाई। उन्होंने संवाद अदायगी में सिसिलियन भाषा का लहजा अपनाकर अंग्रेजी भाषा बोली। फिरोज खान ने ‘गॉडफादर' फिल्म से प्रेरित 'धर्मात्मा' बनाई। इसके वर्षों बाद रामगोपाल वर्मा ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘सरकार राज' बनाई जो सफल भी रही। बाला साहब ठाकरे भी ‘गॉडफादर' ही माने जाते थे और उन पर श्रद्धा रखने वाले अनेक लोग हैं। दाऊद भी गॉडफादर की तरह काम करता था। वह आज भी पाकिस्तान में रहते हुए मुंबई में अवैध वसूली करता है। बाला साहेब ठाकरे और दाऊद की शैलियों में कुछ हद तक समानता है परंतु दोनों ही ‘मेड इन इंडिया' हैं और इनका ‘फरमा' सिसली में बनकर अमेरिका होते हुए भारत आया।

राम गोपाल वर्मा ने अनेक फिल्मों का निर्माण किया और नए कलाकारों को अवसर भी दिया। वे फिल्म उद्योग में एक हस्ती की तरह उभरे परंतु उनकी व्यक्तिगत कमजोरियों के कारण उनका पतन भी हुआ। वे मुंबई से निष्कासित कर दिए गए। यह कानूनी निष्कासन नहीं था। कोई भी पूंजी निवेशक उनके सनकीपन के पोषण के लिए तैयार नहीं था। वे हैदराबाद चले गए, जहां उन्होंने फिल्म बनाने के प्रयास किए।

आज मुंबई में फिल्मकारों की कमी है और राम (गोपाल) वर्मा का ‘वनवास' भी पूरा हो चुका है तथा फिल्मी ‘अयोध्या' उनका इंतजार कर रही है। यह संभव है कि वह अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर चुके हों और अपने मिथ्या अहंकार भाव से मुक्त हो चुके हों। फिल्म के व्याकरण पर उनकी मजबूत पकड़ है और वे प्रयोग भी करते रहे हैं। आज गॉडफादर नुमा लोग हुक्मरान हो गए हैं। राम गोपाल वर्मा राजनीतिक गॉडफादर बना सकते हैं।

 

इस सुंदर दुनिया को बचाना है, तो घर

से भगवान गणेश के साथ शुरुआत करें

बुधवार सुबह जब मैं तमिलनाडु के मदुराई स्थित खूबसूरत मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश कर रहा था तो मेरा फोन बजा और इस अखबार का एक मिनट का गणेशोत्सव सोशल कैम्पेन बजने लगा :

‘…मिट्‌टी के गणेश लाखों में एक,

भोली है सूरत, सादा है वेश,

कुदरत बचाने का देते संदेश,

गमले में विसर्जन हो, घर में बस जाएंगे,

तुलसी रूप लेकर आंगन भी महकाएंगे,

…मिट्‌टी के गणेश लाखों में एक...’

अगले ही मिनट मेरे शरारती मन ने विशाल मंदिर के प्रवेश द्वार पर विराजे भगवान गणेश को व्यंग्यात्मक दृष्टि से देखा और कहा, ‘हे ईश्वर ऐसे पर्वों के लिए आपका अभियान अच्छा है लेकिन, धन के प्रति आसक्त इस दुनिया में ऐसे श्रेष्ठ विचार कौन अपनाएगा।’ मुझे अहसास नहीं था कि भगवान के पास 62 वर्षीय एके रमेश के व्यवसाय से संयोग से हुए परिचय के जरिये एक जवाब था। रमेश टाय एंड डाय एसोसिएशन और मदुराई सुनगु़डी मैन्यूफैक्चरर्स एंड सेलर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी हैं। ये संगठन तब परम्परागत कला को ज़िंदा रखने के लिए संघर्ष, कर रहे हैं जब बाजार रासायनिक रूप से रंगी गई साड़ियों से पटा है, जिन्हें राजस्थानी बांधनी साड़ी की तरह मशहूर ‘मदुराई सुनगुडी साड़ी’ के नाम से बेचा जाता है।

रंगानायगी अम्माल स्ट्रीट पर रमेश का घर शायद पूरे मदुराई शहर में एकमात्र जगह है, जहां कुछ प्रशिक्षित महिलाएं सुनगुडी की गठानें बांधने जुटती हैं। अपने घर में वे कड़ाई से उस पद्धति का पालन करते हैं, जिसका अनुसरण उनके पूर्वज करते थे। वे सूखे हुए फूलों, पत्तियों, पेड़ों की छालों, फलों के छिलकों और जड़ी-बुटियों के मिश्रण से हफ्ते में दो बार आर्गनिक डाई बनाते हैं। उनके पास साड़ियां रंगने के लिए 30 भिन्न रंगों के कॉम्बिनेशन हैं। जब महिलाएं गठानें लगा देती हैं तो वे साड़ी को क्लैम्प करते हैं, जिसमें कसकर चुन्नट डालना, मरोड़ना, दोहरा करना और लपेटना शामिल है, जिसके बाद इसे दो घंटे तक रंगा जाता है। भूतकाल में लकड़ियां जलाकर ऑर्गनिक डाई को घंटों उबाला जाता था। अब रमेश गैस बर्नर इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद इन्हें दो बार ठंडे पानी और आर्गनिक फिक्सिंग एजेंट में धोया जाता है। फिर सूखाकर उन पर इस्तरी की जाती है। न सिर्फ साड़ियां आसमान के तारों की तरह चमक उठती हैं बल्कि उन्हें सबसे बड़ा संतोष यह मिलता है कि वे मिट्‌टी, पानी या खुद उनकी सेहत को प्रदूषित नहीं करते।

आज़ादी के समय 30,000 बुनकरों व रंगरेजों के समुदाय से अब वे 200 से भी कम हैं। प|ी वासुमति के साथ वे 2010 में हुई क्राफ्ट्स काउंसिल वर्कशॉप में आए थे। यह ‘सुनगुडी’ को जीआई टैग मिलने के पांच साल बाद की बात है। इन 200 लोगों में सौराष्ट्र की चार महिलाएं भी काम करती हैं, जिनके पूर्वज बरसों पहले तमिलनाडु आ गए थे। इनमें से ज्यादातर महिलाओं ने अपने मां को काली मिर्च के गट्‌टे और सरसो के बीजों की मदद से सुनगुडी गठाने लगाते देखकर यह कला सीखी। एक दशक पहले क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें फिर यह काम करने लिए प्रोत्साहित किया।

रमेश 20 से अधिक महिलाओं को सहारा दे रहे हैं, जो दिन में औसतन चार घंटे काम करके महीने में 20 से 30 साड़ियां बना लेती हैं। पिछले माह उन्होंने अधिक समय काम करके 50 साड़ियां तैयार कीं, जिनमें से एक दर्जन अमेरिका, सिंगापुर, मलेशिया और श्रीलंका गईं। रमेश अपना छोटा-सा बिज़नेस घर से ही चलाते हैं, क्योंकि दुकान स्थापित करने के लिए बहुत ज्यादा स्टॉक चाहिए, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन व रसायनों का उपयोग होता है और धरती को बड़ा नुकसान पहुंचता है।

उनके यहां विदेशों से लोग और फैशन डिज़ाइनिंग के छात्र आते हैं, जो पूरी प्रक्रिया देखते हैं पर हैरत जताते हैं कि क्या इससे कला को सहारा मिलेगा। वे युवाओं को यह कला सिखाना चाहते हैं लेकिन, बहुत थोड़े लोग होते हैं, जो इस कष्टसाध्य कला को पेशा बनाने में उत्सुक होते हैं।

फंडा यह है कि यदि हम इस धरती के प्रति समर्पित हैं तो हमें घर से ही शुरुआत करनी होगी। चाहे रमेश जैसी छोटी शुरुआत या भगवान गणेश के साथ। याद रहे, ‘मिट्‌टी के गणेश की सूरत भोली है, क्योंकि वेश सादा है लेकिन, वह दीर्घायु है।’

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

जयप्रकाश चौकसे

jpchoukse@dbcorp.in

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

‘जीरो’ की थीम में है अधूरेपन का जश्न

अानंद एल राय की फिल्म ‘जीरो’ दिसंबर में रिलीज होगी। शाहरुख खान स्टारर इस फिल्म मेंे कटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा भी हैं। इसमें अनुष्का का किरदार आफिया ‘इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी’ का शिकार है। जानें फिल्म में और क्या खास है...

अमित कर्ण | मुंबई

शा हरुख खान अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जीरो’ में एक बौने का रोल प्ले कर रहे हैं। इस फिल्म में अनुष्का शर्मा का किरदार आफिया भी ‘इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी’ का शिकार दिखाया जाएगा। इस बीमारी से पीड़ित लोगों का आईक्यू लेवल कम होता है लेकिन आफिया इससे पीड़ित होने के बावजूद भी नासा में साइंटिस्ट हैं। फिल्म की थीम ‘अधूरेन का जश्न’ है। अभी तक फिल्म से सिर्फ शाहरुख का ही लुक सामने आया है। इसमें अनुष्का के लुक को सीक्रेट रखा गया है। उनके लुक के साथ कई तरह के एक्सपेरीमेंट्स भी किए गए हैं।

फिल्म में शाहरुख के बौने किरदार से लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे इसके लिए भी मेकर्स ने एक अलग हल निकाला है। फिल्म में शाहरुख को किसी प्रांत विशेष के बजाय दूसरे ग्रह से आए हुए शख्स के तौर पर दिखाया जाएगा। इसलिए फिल्म की कुछ शूटिंग नासा और अमेरिका के कई शहरों में भी हुई है। शाहरुख के सैटेलाइट के जरिए धरती पर आने के सीन वहीं फिल्माए गए हैं। इस तरह आमिर खान के बाद शाहरुख दूसरे स्टार होंगे जो किसी फिल्म में बतौर एलियन नजर आएंगे। बताया जा रहा है कि शाहरुख जिस ग्रह से आए हैं उस ग्रह के लोगों की एवरेज हाइट उतनी ही है। धरती पर आकर वे लोगों को समझाएंगे कि किसी की कद-काठी और अधूरेपन का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।



‘सरफरोश 2’ करना चाहते हैं जॉन

Snapped

सारा अली खान एक रेस्त्रां के बाहर नजर आईं। वे इन दिनों "सिम्बा' की शूटिंग में व्यस्त हैं। उनकी फिल्म "केदारनाथ' भी इस साल रिलीज हो सकती है।

did you know?

 फिल्म में मेकर्स ने काफी तकनीक का इस्तेमाल किया है। जहां शाहरुख को बौना दिखाने के लिए स्पेशल वीएफएक्स यूज किए जा रहे हैं वहीं अनुष्का के किरदार के लिए इंटरनेशनल प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट क्लोवर वूटन को हायर किया गया है। इससे पहले क्लोवर ने ‘परी’ में अनुष्का और ‘संजू’ में रणबीर कपूर का भी मेकअप किया था।

90's hit...

Áहाल ही में चर्चा थी कि जॉन अब्राहम 1999 में रिलीज हुई आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘सरफरोश’ के सीक्वल में नजर आ सकते हैं। हालांकि, इस बारे में ‘सरफरोश’ के डायरेक्टर जॉन मैथ्यू मैथन ने भी कहा था अभी कुछ भी फाइनल नहीं है। हम ‘सरफरोश 2’ की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। जॉन से इस फिल्म को लेकर कोई भी बात नहीं हुई है।’ लेकिन अब सुनने में आया है कि यह फिल्म जल्द ही फ्लोर पर जा सकती है और जॉन अब्राहम इसे करने के लिए इंटरेस्टेड हैं। जॉन ने कहा ‘इस बारे में मेरी अब तक आमिर से कोई बात नहीं हुई है। डायरेक्टर और आमिर इस बारे में विचार कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि मुझे इस फिल्म में करने के लिए आमिर की हामी मिलेगा। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं और उन्हें बेहद पसंद करता हूं। यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं उनका निभाया किरदार करूं।’

Still from the

film 'Sarfarosh'

Spotted

सुशांत सिंह राजपूत एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। वे फिल्म "किजी और मैनी' की शूटिंग में बिजी हैं और आयरनमैन ट्रायथलॉन की भी तैयारी कर रहे हैं।

कंगना के लिए क्लासिकल नंबर कोरियोग्राफ करेंगी सरोज खान

salon visit

दीपिका पादुकोण मुंबई स्थित एक सैलून के बाहर दिखाई दीं। चर्चा है कि वे नवंबर में रणवीर सिंह से शादी करेंगी।

In ‘Manikarnika’

Áमशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान इन दिनों फिल्म फिल्म ‘कलंक’ में माधुरी दीक्षित को लेकर एक गाना कोरियोग्राफ कर रही हैं। अब सुनने में आया है कि वे कंगना रनोट के लिए भी उनकी अपकमिंग फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ के लिए भी एक गाना कोरियोग्राफ करेंगी। जब से कंगना ने इस फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली है तभी से इस फिल्म में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट का बजट भी काफी बढ़ चुका है और इसी बीच कंगना एक क्लासिकल नंबर भी शूट करना चाहती हैं। फिलहाल इस गाने की रिहर्सल की जा रही है और इसकी शूटिंग 18 सितंबर से शुरू की जाएंगी। इसके लिए करजत में नितिन देसाई के स्टूडियो में सेट तैयार किया जा रहा है।

फरीदाबाद, गुरुवार 13 सितंबर, 2018 |

poster out

बुधवार को ‘सारागढ़ी दिवस’ के मौके पर अक्षय कुमार ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘केसरी’ का पोस्टर रिलीज किया। उन्होंने लिखा... On #SaragarhiDay, here’s the first look of #KESARI - our humble tribute to the martyrs of Saragarhi!

“Aaj meri pagdi bhi Kesari...Jo bahega mera woh lahu bhi Kesari... Aur mera jawaab bhi Kesari.”

करण जौहर के बैनर तले बनी यह फिल्म 12 सितंबर 1897 को हुए सारागढ़ी युद्ध पर आधारित है, जो ब्रिटिश भारतीय सेना और अफगानियों के बीच लड़ा गया था। फिल्म में अक्षय कुमार हवलदार ईशर सिंह के रोल में होंगे वहीं परिणीति चोपड़ा उनकी बेटी ईशा का किरदार निभा रही हैं।

For 'Andhadhun'

आयुष्मान खुराना ने ली थी ब्लाइंड स्कूल से ट्रेनिंग

Áआयुष्मान खुराना अपकमिंग फिल्म ‘अंधाधुंध’ में एक ब्लाइंड पियानिस्ट का रोल प्ले कर रहे हैं। इस रोल के लिए आयुष्मान ने अंधे लोगों के हावभाव और व्यवहार को जानने के लिए कई बार वर्ली स्थित ‘हैप्पी होम एंड स्कूल’ विजिट किया। ट्रेनिंग के बारे में आयुष्मान बताते हैं, ‘मैं इस विषय पर बनी मूवीज देखकर नहीं सीखना चाहता था। असली अनुभव लेना चाहता था इसलिए मैं वर्ली स्थित ब्लाइंड स्कूल में लगातर तीन महीने गया। वहां मैंने बच्चों की बॉडी लैंग्वेज, रिएक्शन आदि को बरीकी से ऑब्जर्ब किया। इसके अलावा राहुल नाम के एक ब्लाइंड पियानिस्ट से ही पियानो की ट्रेनिंग भी ली।’ आयुष्मान के अलावा फिल्म में राधिका आप्टे और तब्बू भी हैं।

आमिर के साथ काम नहीं कर रहा हूं : कुणाल कोहली

Áइंडस्ट्री में चर्चा थी कि डायरेक्टर कुणाल कोहली जल्द ही फिर से आमिर खान के साथ काम कर सकते हैं। वे आमिर के प्रोडक्शन में जल्द ही एक फिल्म का ऑफिशियल अनांउसमेंट करने वाले हैं। लेकिन इस खबर से इंकार करते हुए कुणाल ने कहा है कि, ‘मैं अभी आमिर के प्रोडक्शन में कोई फिल्म नहीं कर रहा हूं। फिलहाल अपनी फिल्म ‘रामयुग’ में बिजी हूं जो कुछ दिन पहले ही शुरू हुई है।’ आमिर और कुणाल ने 2006 में आई ‘फना’ में साथ काम किया था।

Heard This?

‘मुंबई सिटी’ में भी एक्टिंग करते दिखेंगे महेश भट्ट

Áसंजॉय नाग की फिल्म ‘योर्स ट्रूली’ के बाद महेश भट्ट एक और फिल्म ‘द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी’ में भी एक्टिंग करते नजर आएंगे। वे कहते हैं, ‘अभिनय मुश्किल काम है। इसमें आपको लाइनें याद रखनी होती हैं। कैमरे के पीछे रहकर एक्टिंग के बारे में बताना आसान है, लेकिन कैमरे के सामने मुस्कुराना मुश्किल है। मैं खुद को एक एक्टर कभी नहीं मानूंगा। यदि दर्शकों को मेरी परफॉर्मेंस पसंद आती है, तो इसका पूरा श्रेय मेरे डायरेक्टर को जाता है।’ यह फिल्म 5 अक्टूबर को रिलीज होगी। इसमें महेश के अलावा के.के मेनन भी होंगे।

First Look out

इन दिनों साउथ के सुपरस्टार और पॉलिटिकल आइकन एनटी रामाराव की बायोपिक काफी चर्चा में हैं। फिल्म में किरदारों की कास्टिंग की जा रही है। इस फिल्म में "बाहुबली' फेम राणा दग्गुबाती भी हैं। वे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का रोल प्ले कर रहे हैं। राणा ने फिल्म में उनका फर्स्ट लुक अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें वे यंग एज के चंद्रबाबू के लुक में दिख रहे हैं। इस फिल्म में एनटीआर के बेटे नंदमुरी बालाकृष्ण अपने पिता का रोल निभा रहे हैं। विद्या बालन उनकी प|ी का रोल प्ले कर रही हैं। वहीं रकुल प्रीत इसमें श्रीदेवी का किरदार निभाएंगी।

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