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इस अनोखी रसोई घर में मिलता मात्र 5 रुपए में देसी घी का बना गरमागरम खाना

संडे सुबह 11 बजे से एक अनोखी रसोई लगती है। इस सोच के साथ कि कोई भूखा पेट न रहे।

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 06:13 PM IST
Unique rasoi ghar in Faridabad

फरीदाबाद। फरीदाबाद के सेक्टर-46 स्थित हुडा स्टैंड मार्केट में हर संडे सुबह 11 बजे से एक अनोखी रसोई लगती है। इस सोच के साथ कि कोई भूखा पेट न रहे, यहां सिर्फ पांच रुपए में देसी घी में गर्मागर्म सब्जी व पूड़ी मिलती है। रसाेई का नाम है आशीर्वाद रसोई। यहां रिक्शेवाले से लेकर कार वाले तक लाइन लगाते हैं। इस रसोई को चला रहे हैं फरीदाबाद के बुजुर्ग दंपती 63 वर्षीय राजीव व उनकी पत्नी अल्का कोचर।

देसी घी में बनाया जाता है यहां पूरा खाना

अल्का कोचर के अनुसार, हम देसी घी में सब्जी बनाते हैं। इसके बाद मौके पर ही गर्मागर्म पूड़ी निकालकर देते हैं। पांच रुपए की प्लेट में आलू की सब्जी, चार पूड़ी, आचार, सलाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा ध्यान लोगों को पौष्टिक खाना देने में है। हम आगे भी यही सोच रहे हैं कि खाने को और पौष्टिक कैसे बनाया जाए। इसमें और न्यूट्रीशियन जोड़ा जाए। जिससे लोगों को हम एक हेल्दी खाना दे सकें।

हर संडे लगती है मार्केट में आशीर्वाद रसोई

इस रसोई की शुरुआत इसी साल अप्रैल से हुई। इस कार्य में कोचर दंपती के बच्चेव रिश्तेदार भी मदद करते हैं। पूरा खर्चखुद ही वहन करते हैं। उनके साथ इस मुहिम को शुरू करने व आगे तक ले जाने में उनके दोस्त व रिश्तेदार सरदार चरणजीत सिंह भी सहयोगी हैं। हर संडे सुबह 11 बजे एक रसोइए के साथ पूरा परिवार वहां पहुंच जाता है। रसोइया सब्जी बनाकर आटा गूंधता है। जैसे-जैसे लोग आते जाते हैं पूड़ियां गर्मागर्म निकाली जाती हैं। उन्होंने इस पहल को आशीर्वाद रसोई का नाम दिया है। कोचर दंपती के अनुसार खाने के लिए वे सिर्फ पांच रुपए लेते हैं। वे चाहते तो खाना मुफ्त में भी दे सकते थे, लेकिन वे न्यूनतम 5 रुपए लेते हैं ताकि यहां भोजन करने वाले लोगों का स्वाभिमान बना रहे। वे हक से अचार और सब्जी मांगते हैं। अगर यह फ्री होता तो शायद वे ऐसा नहीं करते। उन्होंने कहा कि कुछ भी अच्छा करना मुश्किल नहीं होता। सिर्फ पॉजीटिव सोच और हौंसला होना चाहिए। नीयत नेक हो ताे हर काम में सफलता मिलती है।

ऐसा करने के लिए सत्संग से मिली प्रेरणा

आराम की उम्र में इस सेवा कार्य में जुटे कोचर दंपती का कहना है कि सत्संग से मिली इस प्रेणा के बाद कि कोई भूखा न रहे तो उन्होंने सेवा के लिए आशीर्वाद रसोई की शुरुआत की। जब रसोई लगती है तो परिवार के सदस्य पूड़ी बेलने, थाली लगाने, सर्व करने आदि के काम में जुट जाते हैं। राजीव व अल्का कोचर ने कहा कि उनकी इच्छा तो है कि यह रसोई रोज लगाई जाए। लेकिन अभी न उनके पास पर्याप्त संसाधन हैं और न ही इतना वक्त।

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