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ई-वे बिल लागू, टैक्स चोरी पकड़े जाने पर 200 फीसदी जुर्माना

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के दायरे में आने वाले उद्योगों के व्यापारी आज से अब टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:15 AM IST

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के दायरे में आने वाले उद्योगों के व्यापारी आज से अब टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगे। सेल्स विभाग ने गुरुवार से प्रदेश में ई-वे बिल लागू कर दिया है। इस बिल के तहत व्यापारी को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन अपने सामान की जानकारी देनी होगी और ट्रांसपोर्ट का पूरा ब्यौरा देना हाेगा। जिसके बाद व्यापारी के सामान व ट्रांसपोर्ट का बयोरा जीएसटी अधिकारियों के पास आ जाएगा। बड़ी बात यह है कि टैक्स चोरी पकड़े जाने के बाद व्यापारी को सामान की कीमत का 200 फीसदी जुर्माने के तौर पर भरना होगा।

व्यापार जगत को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक जुलाई 2017 को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू कर दिया है। व्यापारियों को सेंट्रल व स्टेट के अलग-अलग टैक्स अदा करने की जरूरत है। केवल जीएसटी ही अदा करना होगा। 50 हजार रुपये तक के सामान पर टैक्स नहीं लगेगा और व्यापारियों को इसके लिए ई-वे बिल तैयार करवाना होगा। डीईटीसी डाॅ.वीके शास्त्री की अगुवाई में जीएसटी अधिकारियों को इसकी ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिंग में बताया गया है कि ई-वे बिल कैसे तैयार होगा और किसी तरह से जांच होगी।

10 किलोमीटर के दायरे के लिए पार्ट-बी की छूट

क्षेत्र के व्यापारियों के लिए राहत की बात यह है कि 10 किलोमीटर के दायरे में भेजे जाने वाले सामान को लेकर ई-वे बिल का पार्ट बी भरना जरूरी नहीं है। यदि सामान बॉय हैंड व रिक्शा के माध्यम से भेजा रहा रहा है।

कहां-कहां चाहिए ई-वे बिल

जिस तारीख से ई-वे बिल लागू होगा उसे अलग से नोटिफाई कर दिया जाएगा। मल्टीपल कन्साइनमेंट के लिए ट्रांसपोर्टर्स को कनसॉलिडेटड ई-वे बिल बनवाना होगा। अगर गुड्स को एक व्हीकल से दूसरे में ट्रांसफर करना है तो ई-वे बिल की जरूरत होगी। ई-वे बिल की जरूरत नॉन-मोटर कन्वेंस, पोर्ट से ट्रांसपोर्ट होने वाले गुड्स, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स और लैंड कस्टम स्टेशन के लिए जाने वाले और आने वाले गुड्स पर नहीं होगी।

एचएसएन कोड से सामान की पहचान

जीएसटी इंचार्ज भूषण कुमार ने बताया कि व्यापारी द्वारा सामान का ऑनलाइन ई-वे बिल तैयार करना होगा। पार्ट ए व बी पूरा होने के बाद पोर्टल से एसएसएन कोड जनरेट होगा। कोड से जीएसटी अधिकारी पहचान कर पाएंगे कि टैक्स भरा है या नहीं।

ये प्रोडक्ट्स हैं ई-वे बिल से बाहर

ई-वे बिल से कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्यूडिशियल और नॉन ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूजपेपर, ज्वैलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्यूमन हेयर, काजल, दीये, चेक, म्युनिसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, कैरोसिन और करेंसी को ई-वे बिल से बाहर रखा गया है। वहीं अन्य राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनवाना होगा।

ई-वे बिल से व्यापार होगा सुगम-सरल : डीईटीसी

डीईटीसी डाॅ.वीके शास्त्री ने बताया कि एक फरवरी से ई-वे बिल लागू हो गया है। जिसके तहत टैक्स चोरी पर ज्यादा जुर्माना लगेगा। इस बिल के लागू होने से व्यापार पारदर्शी व सुगम-सरल तरीके से होगा। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान किया कि वे टैक्स चोरी न करके देश के विकास में अपनी भूमिका अदा करें।

ये रहेगी ई-वे बिल की वैधता

100 किलोमीटर तक 1 दिन

100 से 300 किलोमीटर तक 3 दिन

300 से 500 किलोमीटर तक 5 दिन

500 से 1000 किलोमीटर तक 10 दिन

1000 से ज्यादा किलोमीटर तक 15 दिन

पोर्टल पर होगा रजिस्ट्रेशन

व्यापारी को ई-वे बिल पोर्टल पर खुद का रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसके बाद पार्ट ए में अपने सामान की कीमत व जानकारी अपलोड करनी होगी। पार्ट बी में सामान को लेकर जाने वाले ट्रांसपोर्ट वाहन के नाम व नंबर की पूरी डिटेल बतानी होगी। यह बिल सप्लायर व रिसीवर के लिए जरूरी है। - डाॅ. वीके शास्त्री, डीईटीसी।

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