6 साल से नहीं भरा तीन दुकानों का किराया, नगर परिषद अधिकारियों से मिलीभगत कर माफ करवा लिए 15 लाख

Fatehabad News - नगर परिषद की ऑटाे मार्केट की तीन दुकानों के 6 साल के 15 लाख रुपये बकाया किराये को मात्र एक शपथ पत्र के आधार पर माफ कर...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:20 AM IST
Fatehabad News - haryana news hire of three stores not filled for 6 years compromise with city council officials to pay 15 million
नगर परिषद की ऑटाे मार्केट की तीन दुकानों के 6 साल के 15 लाख रुपये बकाया किराये को मात्र एक शपथ पत्र के आधार पर माफ कर दिया गया है। यह तीन दुकानों एक महिला पार्षद के जेठ व उनके जानकारों के नाम से जारी थी। अब जब 15 लाख का बकाया हुआ तो दुकानदारों ने खुद को गरीब बताकर इस किराया राशि को भरने में असमर्थ बता दिया। इतना ही नहीं नगर परिषद ने भी केवल इन शपथ पत्र के आधार पर बिना काेई जांच पड़ताल किए किराया को माफ कर दिया। हालांकि अब दुकानें किसी ओर को किराए पर दे दी गई हैं।

नगर परिषद की ऑटो मार्केट में 300 से ज्यादा दुकाने हैं। नगर परिषद ने दुकानों को किराए पर दे रखा है। इसी बीच तीन दुकान ऐसी थी, जिसे महिला पार्षद के जेठ व उनके रिश्तेदारों ने ले रखी थी। जो कई सालों से दुकान तो बोली पर ले ली। इसके खुद दुकान लेने के बाद दूसरे का किराए पर ली दुकान आगे किसी दूसरे को दुकान दे दी। उनसे रुपये भी किराए के लेते रहे, लेकिन उनसे रुपये लेने के बाद नगर परिषद में कभी किराया जमा करवाया ही नहीं।

दुकानदारोें ने एफिडेविट में लिखा- मैं गरीब आदमी हूं और किराया भरने में असमर्थ हूं

ऑटो मार्केट में दुकान नंबर 369 को डीएसपी रोड निवासी विनोद कुमार ने वर्ष 2011 में बोली पर ली थी। जिसका मासिक किराया 9 हजार रुपये था। इसमें पगड़ी के रूप में 3 लाख रुपये जमा करवाये। 6 महीने का एडवांस किराया भी दिया। दुकान लेने के बाद वर्ष 2013 तक ही विनोद ने किराया भरा। इसके बाद वर्ष 2018 तक कोई किराया भरा ही नहीं। यह किराया करीब 7 लाख 25 हजार बना। अब जाकर एक नगर परिषद में एफिडेविट दिया जिसमें विनोद ने कहा- कि मैं गरीब आदमी हूं और मैं यह किराया भरने में असमर्थ हूं। इसलिए मेरा किराया माफ किया जाए। अधिकारियों ने किराया माफ भी कर दिया। विनोद कुमार एक महिला पार्षद का जेठ है और अच्छी खासी प्रोपर्टी का मालिक है।

केस-1

दुकान नंबर 221/ 244। जो लाजपत नगर निवासी नरेंद्र कुमार ने ली थी। जिसका किराया ब्याज सहित 5 लाख 25 हजार रुपये बनता है। इन्होंने भी एफिडेविट देते हुए कहा कि उनकी माली हालत कमजोर है। इसलिए वह दो लाख रुपये सिक्योरिटी को जब्त करते हुए बाकी किराया उसका माफ किया जाए। यहां भी किराया माफ।

केस-2

दुकान नंबर 222/ 245 । इसे लाजपत नगर निवासी राकेश कुमार ने किराया पर लिया। यहां भी अन्य दो केसों जैसा ही किया। इन्होंने भी कई सालों का किराया नहीं भरा हुआ। इनका वर्ष 2018 के सातवें महीने तक का किराया ब्याज सहित 5 लाख 34 हजार रुपये बना। इसमें भी एफिडेविट लेते हुए किराया माफ कर दिया।

केस-3

पार्षदों ने उठाया था कई बार मुद्दा

कुछ दिन पहले हुई बजट मीटिंग में इस मुद्दे पर पार्षद प्रतिनिधि डॉ. रणजीत ओढ़, वजीर जाखड़ ने नप अधिकारियों की मिलीभगत कर किराए में गड़बड़ी का आरोप लगाया। अब रिकॉर्ड सामने आया तो नगर परिषद अधिकारियों की पोल खोल गई।

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मार्च में करवाएं हैं एफिडेविट जमा

अब जो रिकॉर्ड पार्षदों को मिला है उसमें पार्षदों के रिश्तेदारों का किराया मिलीभगत से माफ करने का मामला साफ हो गया तो वही पाया कि जो एफिडेविट उन्हें रिकॉर्ड में मिले है। वह इस साल के मार्च महीने में जमा करवाया गया है।

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