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फसलों को पेस्टीसाइड फ्री बनाने के साथ पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है जैविक खेती

जैविक खेती न सिर्फ फसलों को पेस्टीसाइड फ्री बनाती है, बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। किसानों को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:20 AM IST

फसलों को पेस्टीसाइड फ्री बनाने के साथ पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है जैविक खेती
जैविक खेती न सिर्फ फसलों को पेस्टीसाइड फ्री बनाती है, बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में वर्ष 2013 से कार्य किया जा रहा है, जहां पर विशेषज्ञ जैविक तरीकों से विभिन्न प्रकार की सब्जियां का उत्पादन करते हैं और साथ ही किसानों को जैविक खेती के महत्वों के बारे में भी बताते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और किसानों की मुख्य आय का साधन खेती है, लेकिन अधिक उत्पादन की चाह में खेतों में अंधाधुंध पेस्टीसाइड के इस्तेमाल ने फसलों को जहरीला बना दिया है। खेत में अधिक उत्पादन के लिए खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है, जिससे न सिर्फ अधिक लागत के साथ-साथ जल, भूमि, वायु और वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि खेतों में पैदा होने वाली फसल भी जहरीली होती जा रही है। जिसका हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए नवम्बर 2013 में सब्जी उत्कृष्टता केंद्र घरौंडा में जैविक खेती प्रदर्शन प्लांट का शुभारंभ किया गया। जहां विशेषज्ञ किसानों को जैविक खेती के लाभ व तरीकों के बारे में बताते है। केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. अतर सिंह सांगवान के अनुसार करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि पर जैविक खेती की जाती है। जिसमें रबी की फसल गाजर, मूली, मेथी, मटर, बंद गोभी, फूल गोभी, टमाटर की विभिन्न किस्मों की पैदावार की जाती है। वहीं खरीफ की फसल में गोल घिया, टिंडा, भिंडी, खरबूजा, तरबूज व तोरी की पैदावार ही जाती है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती करने से फसल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। उन्होंने भूमि की संरचना और उरवर्कता को बनाए रखने तथा उसे बढ़ाने के उपायों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फसल के कचरे और पशु खाद का पुन: नवीनीकरण करना चाहिए, खेतों की सही समय पर जुताई करनी चाहिए

1990 के बाद बढ़ा जैविक उत्पादों का बाजार

जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) कृषि की वह विधि है जो संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों के अप्रयोग या न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है तथा जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाये रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कम्पोस्ट आदि का प्रयोग करती है। सन् 1990 के बाद से विश्व में जैविक उत्पादों का बाजार काफ़ी बढ़ा है। जैविक खेती से मानव स्वास्थ्य का बहुत गहरा सम्बन्ध है। इस पद्धति से खेती करने में शरीर तुलनात्मक रूप से अधिक स्वस्थ रहता है। औसत आयु भी बढती है। हमारे आने बाले पीढ़ी भी अधिक स्वस्थ रहेंगी। कीटनाशक और खाद का प्रयोग खेती में करने से फसल जहरीला होता। जैविक खेती से फसल स्वास्थ्य और जल्दी खराब नहीं होता है।

जैविक खेती से किसानों को होने वाले लाभ

1. मिट्टी में होने वाले लाभ : जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है। भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं। भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम हो जाता है।

3. पर्यावरण का लाभ : भूमि के जल स्तर में वृद्धि हो जाती हैं। मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषणों मे भीकाफी कमी आ जाती है। कचरे का प्रयोग खाद बनाने में करने से बीमारियों में कमी आती है । फसल उत्पादन की लागत में काफी कमी हो जाती है और आय में वृद्धि होती है।

विवेक राणा | घरौंडा

जैविक खेती न सिर्फ फसलों को पेस्टीसाइड फ्री बनाती है, बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में वर्ष 2013 से कार्य किया जा रहा है, जहां पर विशेषज्ञ जैविक तरीकों से विभिन्न प्रकार की सब्जियां का उत्पादन करते हैं और साथ ही किसानों को जैविक खेती के महत्वों के बारे में भी बताते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और किसानों की मुख्य आय का साधन खेती है, लेकिन अधिक उत्पादन की चाह में खेतों में अंधाधुंध पेस्टीसाइड के इस्तेमाल ने फसलों को जहरीला बना दिया है। खेत में अधिक उत्पादन के लिए खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है, जिससे न सिर्फ अधिक लागत के साथ-साथ जल, भूमि, वायु और वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि खेतों में पैदा होने वाली फसल भी जहरीली होती जा रही है। जिसका हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए नवम्बर 2013 में सब्जी उत्कृष्टता केंद्र घरौंडा में जैविक खेती प्रदर्शन प्लांट का शुभारंभ किया गया। जहां विशेषज्ञ किसानों को जैविक खेती के लाभ व तरीकों के बारे में बताते है। केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. अतर सिंह सांगवान के अनुसार करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि पर जैविक खेती की जाती है। जिसमें रबी की फसल गाजर, मूली, मेथी, मटर, बंद गोभी, फूल गोभी, टमाटर की विभिन्न किस्मों की पैदावार की जाती है। वहीं खरीफ की फसल में गोल घिया, टिंडा, भिंडी, खरबूजा, तरबूज व तोरी की पैदावार ही जाती है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती करने से फसल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। उन्होंने भूमि की संरचना और उरवर्कता को बनाए रखने तथा उसे बढ़ाने के उपायों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फसल के कचरे और पशु खाद का पुन: नवीनीकरण करना चाहिए, खेतों की सही समय पर जुताई करनी चाहिए

2. किसानों को होने वाला लाभ : भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है। सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो जाती है। फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।

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