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एडवांस नहीं देने पर सूर्यदीप अस्पताल में बच्चे का नहीं किया गया इलाज, दम तोड़ा

साइबर सिटी में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही का मामला दिन-प्रतिदिन देखने को मिल रहा है।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 08:14 AM IST

गुड़गांव। साइबर सिटी में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही का मामला दिन-प्रतिदिन देखने को मिल रहा है। गुरुवार को एक प्राइवेट अस्पताल ने एडवांस जमा नहीं कराने पर एक बच्चे को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया, जहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।


गुड़गांव के समसपुर गांव के नजदीक झुग्गी में रहने वाले अजय उनके सात वर्षीय बेटे देवराज को सिर पेट में दर्द होने पर वो सुबह करीब 11 बजे इलाज के लिए सेक्टर-46 स्थित सूर्यदीप अस्पताल गए थे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें 50 हजार रुपए एडवांस जमा कराने को कहा। अजय के पास उस वक्त नकद रुपए नहीं होने से अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को भर्ती करने से इनकार कर दिया। एडवांस नहीं दे पाने के बाद डाॅक्टरों ने बच्चे को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया। डॉक्टरों ने बच्चे को सिविल अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया, लेकिन सिविल अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिजन पृथ्वीराज ने बताया कि निजी अस्पताल के डॉक्टर्स ने उनकी मदद नहीं की। यहां तक की नागरिक अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगने पर एंबुलेंस तक देने से मना कर दिया।


बच्चे को जिस समय अस्पताल लाया गया उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बच्चे का पेट फूला हुआ था। डॉक्टरों ने बच्चे की जांच शुरू की, लेकिन कुछ ही मिनट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। -प्रदीपशर्मा, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल


बच्चे के पेट में पानी भरा था खर्च बताया था : डॉ. गुप्ता
सूर्यअस्पताल के डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि बच्चे को गुरुवार सुबह अस्पताल लाया गया था। उसके पेट में पानी भरा था और सांस लेने में भी दिक्कत थी। बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ ने देखा था। भर्ती करने से पहले इलाज में होने वाला खर्च बताया था। परिजन एडवांस देने में असमर्थ थे। उसे नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया।


गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में देरी होने के कारण गुरुवार दोपहर करीब एक बजे चलती गाड़ी में उसने बच्ची को जन्म दिया। शहर में ट्रैफिक जाम के कारण महिला समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी। मानेसर के नाहरपुर निवासी साहब सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी को गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे लेबर पेन शुरू हो गया। पीड़ा तेज होने पर वो पत्नी को निजी कैब से गांव से नागरिक अस्पताल लाने लगे, लेकिन खेड़की दौला टोल और हीरो होंडा चौक पर ट्रैफिक जाम के कारण कैब को सिविल अस्पताल तक पहुंचने में करीब एक घंटा लग गया। चलती गाड़ी में पत्नी ने लड़की को जन्म दिया। अब नागरिक अस्पताल में दोनों सुरक्षित हैं।