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वार्ड में सिजेरियन डिलीवरी मामले में बाल रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी लगाई गई

वार्ड में शिशु व माताओं को रिफर कर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 20, 2018, 07:52 AM IST

  • वार्ड में सिजेरियन डिलीवरी मामले में बाल रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी लगाई गई

    गुड़गांव.गुड़गांव के सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में शिशु व माताओं को रिफर कर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीती 9 फरवरी को सिविल अस्पताल के बाहर एक महिला की डिलीवरी होने के मामले की डायरेक्टर स्तर से जांच कराई जा रही है, वहीं उसी रात को लापरवाही का दूसरा मामला भी सामने आया। जहां सिजेरियन डिलीवरी केस होने के बाद मात्र 8 घंटे के अंदर शिशु व उसकी मां को डाक्टरों ने सफदरजंग के लिए रिफर दिया, लेकिन जब मां व बच्चे को वहां भी एडमिट नहीं किया तो बच्चे को दोबारा सिविल अस्पताल में ही करीब पांच घंटे बाद एडमिट कराना पड़ा। इस मामले में बच्चे के परिजनों ने पीएमओ को शिकायत दी है।

    - बीती 9 फरवरी को विनीत की पत्नी की सिविल अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी हुई, जन्म के कुछ समय बाद ही अस्पताल से सफदरजंग के लिए रिफर कर दिया गया। विनीत का आरोप है कि उन्हें सफदरजंग में जाकर पता चला कि उनके बच्चे का एक कान ही नहीं है। इसके अलावा एक आंख में कॉम्पलीकेशन व दिल में छेद भी है।

    - सफदरजंग के डाक्टरों ने भी मां व बच्चे को एडमिट करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद विनीत वापस सिविल अस्पताल में आए और उन्हें एडमिट कराया। विनीत ने पीएमओ से इस मामले की शिकायत कर जांच की मांग की।

    - जिस पर पीएमओ ने आनन-फानन में जांच कमेटी को इस मामले की जांच सौंपी। लेकिन दो बार उनसे कन्सेंट फार्म भी भरवाया, जिसमें लिखवाया कि मां व बच्चे को परिजन अपने रिस्क पर अस्पताल में भर्ती कर रहे हैं, कोई भी घटना होने पर डाक्टर जिम्मेदार नहीं होंगे।

    - वहीं इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पीएमओ डा. प्रदीप शर्मा ने बताया कि सभी सिजेरियन डिलीवरी वाले बच्चों की जांच के लिए अब गायनी वार्ड में एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती कर दी गई है। इससे पहले बाल रोग विशेषज्ञ कभी-कभी आता था, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ की उपस्थिति कंपलसरी कर दी गई है।


    सरकारी खर्च पर होगा बच्चे का इलाज
    - वहीं इस बारे में पीएमओ डा. प्रदीप शर्मा ने बताया कि इस मामले में बच्चे के साथ कई कॉम्पलीकेशन हैं। इसमें सर्जरी करने वाले डाक्टर, नर्स व हेंडओवर करने वाले स्टाफ का फॉल्ट पाया गया है। इसके अलावा परिजनों की भी लापरवाही रही है, जिन्होंने बच्चे को ठीक तरीके से जांच नहीं की।

    - इस मामले में डॉक्टर, नर्स व एक अन्य स्टाफ को वार्निंग दी है। साथ ही बच्चे के कान की प्लास्टिक सर्जरी, हॉर्ट सर्जरी व आंख का इलाज सरकारी खर्च पर किया जाएगा। करीब छह महीने बाद होने वाले इलाज के लिए बच्चे का नाम डिपार्टमेंट ऑफ अर्ली इंटरवेंशन में दर्ज कर लिया गया है।

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