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ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऐसे बना करोड़पति 'पैडमैन', महिलाओं को फ्री बांटता है सेनेटरी पैड

प्रमोद की सॉफ्टवेयर कंपनी में आज डेढ़ हजार से अधिक कर्मचारी हैं।

उज्जवल सिंह | Last Modified - Feb 11, 2018, 05:19 PM IST

ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऐसे बना करोड़पति 'पैडमैन', महिलाओं को फ्री बांटता है सेनेटरी पैड

गुरुग्राम. 16 साल तक अमेरिका में रहकर अपना बड़ा बिजनेस सेटअप करने के बाद ये बिजनेसमैन अब स्वदेश वापस आकर गरीबों की सेवा कर रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले प्रमोद राघव ने अपनी लगन और मेहनत से अमेरिका में कई कम्पनियां खड़ी की, लेकिन वो हमेशा से अपने देश के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे। इसी सोच के साथ प्रमोद वापस भारत लौट आए और अब अपनी एनजीओ 'निस्वार्थ कदम' के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। ये एनजीओ महिलाओं के लिए सैनेटरी नैपकिन भी बनाती है, जो ग्रामीण इलाकों में मुफ्त बांटी जाती है। DainikBhaskar.com से बातचीत में प्रमोद राघव अपनी लाइफ के अचीवमेंट्स को शेयर किया। 1996 में पहुंचे अमेरिका...

गुरुग्राम के घामडोज गांव के रहने वाले प्रमोद राघव साल 1996 में अमेरिका चले गए थे। वहां प्रमोद ने एक कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर जॉब शुरू किया था। लेकिन बचपन से ही कुछ बड़ा और अलग करने की चाहत रखने वाले प्रमोद राघव ने धीरे-धीरे अमेरिका में अपनी खुद की कंपनी खड़ी कर दी। 5 कर्मचारियों से कंपनी शुरू करने वाले प्रमोद की सॉफ्टवेयर कंपनी में आज डेढ़ हजार से अधिक कर्मचारी हैं और कंपनी का टर्नओवर 70 करोड़ रुपए सालाना है।

ऐसे हुई समाजसेवा की शुरुआत

- प्रमोद बताते हैं- "अमेरिका में रहने के दौरान भी मैं इंटरनेट से रोजाना अपने देश के कुछ अखबार पढता था। तकरीबन 10 साल पहले की बात है एक अखबार में खबर छपी थी कि एक पुलिसकर्मी की बदमाशों से मुठभेड़ में मौत हो गई। उसकी पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी। अखबार में लिखा था कि उसका इकलौता बेटा अब अनाथ हो गया था। इस खबर ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।"

- "मैं वापस इंडिया आया और पुलिस विभाग की मदद से मैं शहीद पुलिसकर्मी के बेटे से मिला। मैंने उसके आजीवन पढ़ाई और अन्य खर्च का जिम्मा उठा लिया। इसके बाद इसी तरह के चार और अनाथ बच्चों को एडॉप्ट किया और उनकी पढ़ाई का भी जिम्मा उठाया।

आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे की एनजीओ की शुरुआत....

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