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ये इंजीनियर ऐसे बना करोड़पति 'पैडमैन', महिलाओं को फ्री बांटता है सेनेटरी पैड

प्रमोद की सॉफ्टवेयर कंपनी में आज डेढ़ हजार से अधिक कर्मचारी हैं।

उज्जवल सिंह | Last Modified - Feb 14, 2018, 01:17 PM IST

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    गुरुग्राम. 16 साल तक अमेरिका में रहकर अपना बड़ा बिजनेस सेटअप करने के बाद ये बिजनेसमैन अब स्वदेश वापस आकर गरीबों की सेवा कर रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले प्रमोद राघव ने अपनी लगन और मेहनत से अमेरिका में कई कम्पनियां खड़ी की, लेकिन वो हमेशा से अपने देश के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे। इसी सोच के साथ प्रमोद वापस भारत लौट आए और अब अपनी एनजीओ 'निस्वार्थ कदम' के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। ये एनजीओ महिलाओं के लिए सैनेटरी नैपकिन भी बनाती है, जो ग्रामीण इलाकों में मुफ्त बांटी जाती है। DainikBhaskar.com से बातचीत में प्रमोद राघव अपनी लाइफ के अचीवमेंट्स को शेयर किया। 1996 में पहुंचे अमेरिका...

    गुरुग्राम के घामडोज गांव के रहने वाले प्रमोद राघव साल 1996 में अमेरिका चले गए थे। वहां प्रमोद ने एक कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर जॉब शुरू किया था। लेकिन बचपन से ही कुछ बड़ा और अलग करने की चाहत रखने वाले प्रमोद राघव ने धीरे-धीरे अमेरिका में अपनी खुद की कंपनी खड़ी कर दी। 5 कर्मचारियों से कंपनी शुरू करने वाले प्रमोद की सॉफ्टवेयर कंपनी में आज डेढ़ हजार से अधिक कर्मचारी हैं और कंपनी का टर्नओवर 70 करोड़ रुपए सालाना है।

    ऐसे हुई समाजसेवा की शुरुआत

    - प्रमोद बताते हैं- "अमेरिका में रहने के दौरान भी मैं इंटरनेट से रोजाना अपने देश के कुछ अखबार पढता था। तकरीबन 10 साल पहले की बात है एक अखबार में खबर छपी थी कि एक पुलिसकर्मी की बदमाशों से मुठभेड़ में मौत हो गई। उसकी पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी। अखबार में लिखा था कि उसका इकलौता बेटा अब अनाथ हो गया था। इस खबर ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।"

    - "मैं वापस इंडिया आया और पुलिस विभाग की मदद से मैं शहीद पुलिसकर्मी के बेटे से मिला। मैंने उसके आजीवन पढ़ाई और अन्य खर्च का जिम्मा उठा लिया। इसके बाद इसी तरह के चार और अनाथ बच्चों को एडॉप्ट किया और उनकी पढ़ाई का भी जिम्मा उठाया।

    आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे की एनजीओ की शुरुआत....

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    मकसद मिला तो जगी अलग करने की चाह

    - प्रमोद बताते हैं- "चार बच्चों की परवरिश का जिम्मा उठाने के बाद मुझे बार-बार इंडिया आने का मकसद मिल गया। इसके बाद मुझे लगा कि गरीबों और असहायों की मदद के लिए कुछ और अधिक करना चाहिए। फिर मैंने गुरुग्राम में 'निस्वार्थ कदम' नाम की संस्था बनाई।

    - इस संस्था का मकसद जरूरतमंदों को तलाशकर उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना है। नि:स्वार्थ कदम संस्था जहां गरीबी उन्मूलन के लिए विभिन्न कार्य कर रही है। वहीं, जरूरतमन्दों के लिए इलाज और शिक्षा के क्षेत्र में भी ये संस्था अग्रणी है।"

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    देश के हजारों युवाओं को दिया विदेश में रोजगार

    - प्रमोद बताते हैं- "इंडिया आने के बाद मैंने अपने देश के टैलेंटेड युवाओं की तलाश शुरू की जो सॉफ्टवेयर जानकारी रखते हों और विदेश जाकर नौकरी करना चाहते हों। एक-एक कर मैंने करीब 15 सौ से अधिक युवाओं को अमेरिका में अपनी कंपनी फॉल्कन फोर्स में नौकरी दी है। मैं चाहता हूं कि ये युवा आगे बढ़ें और मेरी तरह ही एक मुकाम पर पहुंचने के बाद देश के जरूरतमंदों के लिए काम करें।"

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    साथी ने भी दिया साथ तो लगे हौंसलों को पंख

    - "प्रमोद जब अमेरिका में थे उसी समय उनकी मुलाकात हरियाणा के ही रहने वाले अरविन्द सैनी से हुई थी। अरविन्द भी वहां एक कम्पनी में नौकरी करते थे और उनके दिल में भी प्रमोद की तरह ही कुछ अलग करने का उत्साह था।

    - इसके बाद प्रमोद ने अपनी संस्था के बारे में अरविन्द से बात की। अरविन्द भी नौकरी छोड़ कर निस्वार्थ कदम से जुड़ गए। अरविन्द का साथ मिलने से संस्था को काफी मजबूती मिली। अब दोनों मिलकर इसे एक नया आयाम दे रहे हैं।

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    बदल दी गौशाला की भी तस्वीर

    - तकरीबन दस साल पहले प्रमोद ने मेवात के संगेल गांव में स्थित श्री चेतन दास गौ संवर्धन संस्थान की जिम्म्मेदारी उठाई। डेढ़ साल पहले जब उन्हें इस गऊशाला का संरक्षक बनाया गया तो यहां लगभग 1500 गाय थी। उनके लिए सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज गऊशाला में 3000 से भी अधिक गायें हैं।

    गौ संरक्षण और सामाजिक उत्थान के लिए 'निस्वार्थ कदम' संस्था ने पंचगव्य से निर्मित धूप, हवन समिधा, फिनाइल, वर्मी कम्पोस्ट जैसे प्रोडक्ट तैयार किए हैं। इनकी बिक्री से होने वाली आमदनी से बीमार और अपाहिज गायों का इलाज और गौशाला के उत्थान का काम किया जाता है।

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    फ्री बांटते हैं सेनेटरी पैड

    - प्रमोद ने गुरुग्राम के गांव दौहला से महिला सशक्तिकरण के लिए एक अच्छी शुरुआत की है। निस्वार्थ कदम के बैनर तले यहां सेनेटरी नैपकीन बनाने का केन्द्र स्थापित किया गया है। यहां से महिलाओं को फ्री सेनेटरी नैपकीन वितरित किया जाता है।

    आठ जगह शुरू की नेकी की दीवार

    - प्रमोद ने अपनी संस्था के माध्यम से गुरुग्राम में आठ जगह नेकी की दीवार की स्थापना की। यहां जरूरतमंदों को कपड़े, दवाइयां और भोजन दिए जाते हैं। प्रमोद बताते हैं कि आज नेकी की दीवार के 5 सेंटरों पर भूखे निराश्रित लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की जा चुकी है। लगभग 600 लोग रोजाना इन सेंटर्स पर निशुल्क खाना खाते हैं।

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Web Title: Special Story Of Pramod Raghav As Padman From Gurugram
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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