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इस गांव को खुद सजा रहे हैं ग्रामीण, ऐसे दिया जा रहा यूरोपीय लुक

हरियाणा के नूंह जिले का खेरला गांव इन दिनों काफी चर्चा में है।

Danik Bhaskar | Feb 15, 2018, 04:54 PM IST

नूंह. हरियाणा के नूंह जिले का एक गांव इन दिनों काफी चर्चा में है। ये गांव एक एनजीओ की मदद से टूरिस्ट प्लेस बनने की ओर अग्रसर है। गां के लोग गलियों और दीवारों को सजाने में जुटे हुए हैं। यूरोपीय देशों की तर्ज पर इस गांव को टूरिस्ट प्लेस बनाया जा रहा है। DainikBhaskar.com ने NGO 'डोनेट वन ऑवर' की संचालिका मीनाक्षी सिंह से बात की। इस दौरान उन्होंने इस गांव में चल रहे कार्य के बारे में तमाम बातें शेयर कीं।

नूह जिले के खेरला गांव के ग्रामीण अपने गांव को खुद से टूरिस्ट प्लेस बनाने में लगे हुए हैं। गांव के दो तिहाई लोगों को आर्ट में महारत हासिल है। बस यही कला उन्होंने अपने व्यवसाय को प्रतिस्थापित करने में यूज करना शुरू कर दिया है। गांव के लोग दीवालों पर सुंदर चित्रकारी करके कई सामाजिक सन्देश भी देने की कोशिश करते हैं।

इस NGO ने उठाई जिम्मेदारी

स्वयं सेवी संस्था 'डोनेट वन ऑवर' की संचालिका मीनाक्षी सिंह ने बताया- "पहले गांव में कोई व्यवसाय ना होने के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब रहती थी। गांव के लोग पढ़े लिखे भी नहीं थे। ये गांव बिल्कुल हाईवे के किनारे बसा है। हमारी संस्था शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करती है।"

आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे किया जा रहा गांव का सौंदर्यीकरण...

टूरिस्ट प्लेस के तौर पर किया जा रहा तैयार

 

मीनाक्षी कहना है कि- "हम इस गांव में भी शिक्षा की अलख जगाने ही गए थे, लेकिन हमने देखा कि ये गांव हाइवे के बिलकुल किनारे बसा है। गांव में प्रकृति की छटा भी देखने को मिलती है। तभी मेरे मन में ख्याल आया कि इस गांव को टूरिस्ट प्लेस बनाना चाहिए। इसके लिए हमने ग्रामीणों से बात की। ग्रामीण इसके लिए तैयार हो गए तो हम इसे संवारने में जुट गए।"

पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कला को बढ़ावा देने का प्रयास

 

मीनाक्षी सिंह के मुताबिक- "यहां के लोग खुद से चित्रकारी करने में लगे रहते हैं। हमारे वालंटियर्स भी उनकी मदद करते हैं। लोगों को ये काम करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हमारा मकसद गांव को विकेंड डेस्टिनेशन बनाना है। हमारा सपना है कि टूरिस्ट यहां पर आएं और स्थानीय भोजन और अन्य सुंदर स्थानों और गांव की सुंदर कला का लुत्फ उठा सके। इससे ग्रामीणों की भी आय हो जाए और गांव की कला का विदेश तक प्रचार-प्रसार हो।"

गांव का भ्रमण करने आते हैं विदेशी पर्यटक

 

ग्रामीण रामकुमार ने बताया- "पिछले कुछ महीनों में गांव में कुछ विदेशी पर्यटक भी देखे गए हैं। गांव की दीवारों पर बनी पेंटिंग्स लोगों को अलग-अलग मैसेज देती है। कुछ पेंटिंग्स महिला सशक्तिकरण का मैसेज देती हैं तो कुछ शान्ति और संपन्नता का। ऐसे में ये गांव और यहां की चित्रकारी लोगों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।"

 

ग्रामीण रामकुमार के मुताबिक- इस कार्य से हमारे गांव की पुरानी प्रथा जीवित है और रोजगार के तलाश में गांव के युवाओं को दर-दर भटकने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है।

कूड़े से बिजली बनाने वाला संयंत्र भी हो रहा तैयार

 

गांव में कूड़े से बिजली पैदा करने वाला संयंत्र भी लगाया जा रहा है। ऐसे में गांव को अब बिजली के लिए विद्युत् उपकेन्द्र के सहारे नहीं रहना पड़ेगा। इसके आलावा गांव में कई अन्य आधुनिक सुविधाओं का भी निर्माण कराया जा रहा है। महत्वपूर्ण बात ये है कि इसमें कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली है। ग्रामीण खुद और एनजीओ के सहयोग से ये सारा काम कर रहे हैं।