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कहीं खुशी कहीं गम| मेवात क्षेत्र में नूंह, सोहना व दिल्ली अलवर की रेल लाइन परियोजना की स्वीकृति का भी स्वागत

बजट से उद्योग जगत में निराशा इस वर्ष का बजट भी पिछले वर्ष की तरह ही भास्कर न्यूज | गुड़गांव प्रदेश के वित्त...

Danik Bhaskar

Mar 10, 2018, 02:00 AM IST
बजट से उद्योग जगत में निराशा

इस वर्ष का बजट भी पिछले वर्ष की तरह ही

भास्कर न्यूज | गुड़गांव

प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु द्वारा पेश किए गए बजट 2018-19 को लेकर एक ओर जहां उद्योग जगत में उदासी है, वहीं आम लोगों में भी उत्साहित नहीं हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इस वर्ष का बजट भी पिछले वर्ष की तरह ही है। इसमें कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। ना तो औद्योगिक विकास के लिए विशेष प्रावधान किया गया है, ना ही रोजगार के अवसर बढ़ाने की कारगर पहल की गई है। हालांकि, किसी प्रकार के नए कर का प्रावधान नहीं किए जाने से आम जनता को थोड़ी राहत है। मेवात क्षेत्र में नूंह, सोहना व दिल्ली अलवर की रेल लाइन परियोजना की स्वीकृति का भी स्वागत किया जा रहा है। मेवात क्षेत्र के लोगों इसके लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे मेवात में 19 लाख लोगों में एक बार फिर आस बंधी है। पिछले वर्ष जीएसटी लागू किए जाने के बाद से एक ओर जहां प्रदेश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, वहीं सरकार के राजस्व स्रोत भी कमजोर हुए हैं। एनसीआर चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट एचपी यादव का कहना है कि जीएसटी लागू होने की स्थिति में प्रदेश सरकार के लिए नया कर का प्रावधान करने का विकल्प नहीं रह गया। इसलिए सरकार ने ना तो पिछले बजट में कोई नया कर का प्रावधान किया था और ना ही इस बार किसी क्षेत्र में अतिरिक्त कर लगाया गया है।

जीएसटी कलेक्शन के लिए गुड़गांव पर रहेगी नजर

प्रदेश सरकार के लिए राजस्व का प्रमुख स्रोत जीएसटी है। जीएसटी के एवज में 23,760 करोड़ रुपए कलेक्शन की आशा है। इसके लिए सरकार की नगर गुड़गांव पर रहेगी। अबतक के रुझान के अनुसार आधा राजस्व गुड़गांव से ही प्राप्त होने की आशा है। इसलिए इंडस्ट्री के साथ आईटी और सर्विस सेक्टर को बजट में विशेष प्रावधान के लिए सरकार से आशा थी।

औद्योगिक विकास को विशेष प्रावधान नहीं पर सरकार जीएसटी से कर रही 23,760 करोड़ कलेक्शन की आशा

ना तो औद्योगिक विकास के लिए विशेष प्रावधान हुआ और ना ही रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल की गई

गुड़गांव. ऑटोमाेबाइल कंपनी में काम करते कर्मी। फाइल फोटो

उद्योग के लिए नहीं बढ़ाया बजट

आगामी वित्त वर्ष के बजट में उद्योग एवं खनन के विकास के लिए मात्र 399.86 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 399.88 करोड़ रुपए के आवंटन के लगभग बराबर है। इससे पूर्व वित्त वर्ष 2016-17 में यह राशि 366.99 करोड़ रुपए की थी। एनसीआर चैंबर्स के प्रेसिडेंट एचपी यादव का मानना है कि उद्योग जगत की आवश्यकताओं को देखते हुए यह राशि बहुत कम है। इस तरह से उद्योग की लगातार उपेक्षा हो रही है, इसका असर रोजगार क्षेत्र पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लघु तथा उद्योग को सरकार से अन्य राज्यों की तरह विशेष बजट के प्रावधान की उम्मीद थी क्योंकि ये क्षेत्र अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।

रियल एस्टेट को प्रोत्साहन नहीं, कैसे होगी 4 हजार करोड़ ईडीसी की वसूली

ईडीसी से प्रदेश सरकार 4,000 करोड़ रुपए जुटाने की आशा कर रह है। इसके लिए भी सरकार की नजर गुड़गांव पर रहेगी। मगर, गुड़गांव में रियल एस्टेट सेक्टर की हालत खराब है। प्रदीप यादव का कहना है कि सरकार ईडीसी से आशा तो कर रही कर रही है, मगर रियल एस्टेट सेक्टर संकट के दौर से गुजर रहा है। संकट से उभारने के लिए सरकार ने बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया है। ऐसे में सरकार को निराशा हाथ लग सकती है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन के महासचिव दीपक मैनी ने चिंता जाहिर की कि हरवर्ष की तरह इस वर्ष भी दक्षिणी हरियाणा में गुड़गांव से मानेसर व रेवाड़ी तक दिल्ली मैट्रो के विस्तार संबंधी कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे उद्यमियों को निराशा हुई है।

कॉलेज खुलने से छात्रों को मिलेगी राहत

सीनियर सेकंडरी स्कूल खेड़की दौला के लेक्चरर महाराम यादव ने वित्त मंत्री द्वारा पेश किए बजट से शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार आएगा। राज्य के 35 राजकीय महाविद्यालयों में बेहतर शिक्षा के लिए स्मार्ट कक्षाएं स्थापित की गई हैं। स्कूलों में अध्ययन एवं संस्कार ग्रहण करने की प्रक्रिया के लिए कई कार्यक्रमों की नई योजनाएं शुरू की गई हैं। मानेसर, सेक्टर-52 व राजकीय महाविद्यालय खोलने का भी निर्णय लिया है। इससे क्षेत्र के बच्चों काे राहत मिलेगी।

आईटी-बीपीओ में भी निराशा

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए बजट में 148.66 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जोकि वित्त 2017-18 के 125.56 करोड़ रुपए से लगभग 18 फीसदी अधिक है। वित्त वर्ष 2016-17 के 88.69 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। उद्योग जगत का मानना है कि इस बार जीएसटी लागू होने के चलते आईटी सेक्टर के लिए दोगुनी राशि बढ़ाई जानी चाहिए थी। आईटी-बीपीओ और सर्विस सेक्टर से संबंधित हाईटेक एसोसिएशन के प्रदीप कुमार का कहना है कि आईटी-बीपीओ इंडस्ट्री अपने बल पर संघर्ष कर रही है। गुड़गांव में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की काफी संभावनाएं हैं, इसके लिए सरकार के प्रोत्साहन की आशा की जा रही थी। इसमें निराशा हाथ लगी है। सर्विस सेक्टर से प्राप्त होने वाले जीएसटी में प्रदेश सरकार को आधा राजस्व मिलेगा, इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने इस सेक्टर को बढ़ाने के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किया।

कॉलेज का स्वागत


होम मेकर्स पर ध्यान नहीं


सराहनीय प्रयास


यूनिवर्सिटी की मांग पूरी होने से राहत

मास्टर सुनील कुमार पंचगांव ने कहा कि वर्ष 2017 में गुड़गांव विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। कांकरौला-भांगरौला में यूनिवर्सिटी खाेली जानी है। इसके लिए फंड मिलने से काम में तेजी आएगी। गुड़गांव में लंबे समय से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। दूसरी अाेर सरकार ने प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर शिक्षा के लिए कुल 13,978.22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इससे स्कूलों में सुविधाएं बेहतर हाे सकेगी।

कैथ लैब मिलने से दिल के रोगियों का सस्ता इलाज

बजट में मिली गुड़गांव को दो बड़ी सौगातें….

भास्कर न्यूज | गुड़गांव

प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने शुक्रवार बजट में गुड़गांव के लोगों के लिए दो बड़ी सौगातों की घोषणा की। इन सौगातों में मेडिकल कॉलेज बनाए जाने व कैथ लैब की स्थापना शामिल हैं। हालांकि दोनों घोषणा इससे पहले भी प्रदेश सरकार की ओर से की जा चुकी थी, लेकिन अब बजट में इसके लिए प्रावधान किए जाने से इसकी उम्मीद बढ़ गई हैं। ऐसे में गुड़गांव के 20 लोगों को मेडिकल कॉलेज से फायदा होगा, जबकि कैथ लैब शुरू होने से जिला के करीब पांच हजार दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सस्ता इलाज मिल सकेगा।

आईएमए के प्रेजीडेंट डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि अभी तक चंडीगढ़ पीजीआई रोहतक पीजीआई में कैथ लैब की सुविधा है। गुड़गांव में शुरू होने से गुड़गांव के पांच हजार दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के मरीजों को भी सस्ता इलाज मिल सकेगा। अभी तक यह इलाज कारपोरेट अस्पतालों में होने से लोगों को काफी खर्च करना पड़ता था। दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज का स्वागत करते हैं। गुड़गांव मेडिकल हब के तौर पर पहचान बना चुका हैं। मेडिकल कॉलेज होने से कारपोरेट क्षेत्र के तुलना में बेहतर व सस्ती सुविधाएं मिल सकेंगी। गुड़गांव के सिविल अस्पताल रोजाना दो हजार से अधिक ओपीडी होती हैं। इसके अलावा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक अस्पताल खुलता है, लेकिन 30 फीसदी मरीजों को वेटिंग में अगले दिन के लिए बिना इलाज के लौटना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल के डाक्टर भी ओवर बर्डन रहते हैं। एक-एक डाॅक्टर रोजाना 150 से 200 मरीजों की जांच करता है।

ऐसे में गुड़गांव मेडिकल कॉलेज की जरूरत है। जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार यहां मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की गई है। गुड़गांव में नहीं कार्डियोलॉजिस्ट सिविल सर्जन ने बताया कि गुड़गांव में दिल के रोगियों के लिए कोई भी कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों या फिर पीजीआई रोहतक ही विकल्प रहता है। यहां पर मेडिकल कॉलेज बनने से हार्ट पेशेंट को काफी लाभ मिल सकेगा।

डॉ. नरेश कुमार


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