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आयुध डिपो के 300 मीटर के दायरे का हाेगा सर्वे

प्रतिबंधित आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में होने वाले अवैध निर्माण को सील करके तोड़ा जाएगा। सील करने व तोड़ने की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 10, 2018, 02:05 AM IST

आयुध डिपो के 300 मीटर के दायरे का हाेगा सर्वे
प्रतिबंधित आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में होने वाले अवैध निर्माण को सील करके तोड़ा जाएगा। सील करने व तोड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की रहेगी। ये आदेश उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को दी। उपायुक्त ने आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में अवैध निर्माण रोकने तथा 300 मीटर दायरे में पहले से हुए निर्माण का सर्वे करके प्रभावितों के लिए मुआवजा निर्धारण करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वायु सेना केंद्र के अधिकारी एसएन सिंह भी उपस्थित थे। उपायुक्त ने बताया कि मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में न्यायालय का स्टे है, इसलिए पूरे क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण नहीं किया जा सकता है। नगर निगम की एन्फोर्समेंट विंग यह सुनिश्चित करे कि 900 के प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण ना हो और यदि कहीं होता पाया जाए तो उसे तत्काल सील किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि इस कार्य के लिए नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करवाया जाएगा व ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी लगाए जाएंगे। निगम के अधिकारियों से आयुध डिपो के 300 मीटर दायरे में बने निर्माणों का विस्तृत डाटा मांगा है जिसमें निर्माण का क्षेत्रफल, बिल्डिंग की किस्म जैसे वह आवासीय, कॉमर्शियल या औद्योगिक है, स्ट्रक्चर की प्रकार अर्थात बिल्डिंग किस प्रकार की बनी हुई है। उसका प्रयोग तथा मालिक का नाम इत्यादि होने चाहिए तभी मुआवजे का आंकलन किया जा सकता है। यदि आजीविका प्रभावित होती है, तो उस पहलु को भी मुआवजा निर्धारण में शामिल किया जाएगा। इस डेटा को तैयार करने के लिए नगर निगम अपने प्रापर्टी टैक्स के डाटा तथा सर्वे रिपोर्ट को आधार बना सकता है। इसके अलावा जीआईएस लैब का प्रयोग भी इस कार्य के लिए किया जा सकता है। डिफेंस एक्ट की धारा-8 के तहत वे जिलाधीश के तौर पर नगर निगम से आयुध डिपो के 300 मीटर क्षेत्र में रहने वाले लोगों का पूरा विवरण मांगेगे। इसके बाद धारा-9 के तहत आम जनता के साथ वह डाटा सांझा करते हुए उनसे दावे व आपत्तियां मांगी जाएंगी ताकि किसी व्यक्ति का नाम उसमें छूटे नहीं। उपायुक्त ने बताया कि नियमानुसार जिन व्यक्तियों के भवन 300 मीटर के दायरे में आएंगे उन्हें ही मुआवजा मिलना चाहिए। चूंकि अभी तक उच्च न्यायालय का स्टे आर्डर पूरे 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र पर लागू है, इसलिए आगामी आदेशों तक पूरे क्षेत्र में निर्माणों पर प्रतिबंध रहेगा।

आदेश

प्रतिबंधित 900 मीटर में हाेने वाले अवैध निर्माण को सील करने और तोड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी

गुड़गांव. उपायुक्त विनय प्रताप आयुध डिपो के 900 मीटर प्रतिबंध क्षेत्र में अवैध निर्माण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए बैठक की अध्यक्षता करते हुए।

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