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कंपनियों की चिमनियों में लगेगा मॉनिटरिंग सिस्टम, पॉल्यूशन फैलाने वाली कंपनियों की बनाई कैटेगरी

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के गुड़गांव क्षेत्रीय अधिकारियों ने पॉल्यूशन फैलाने वाली गुड़गांव व मेवात की 802 कंपनियों का...

Danik Bhaskar

Mar 15, 2018, 02:05 AM IST
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के गुड़गांव क्षेत्रीय अधिकारियों ने पॉल्यूशन फैलाने वाली गुड़गांव व मेवात की 802 कंपनियों का चयन कर अलग-अलग कैटेगरी बनाई है। इनमें सबसे अधिक पॉल्यूशन फैलाने वाली आठ कंपनियों को नोटिस देकर उन्हें मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के आदेश दिए हैं। इन कंपनियों में गुड़गांव की 239 कंपनियों को रेड कैटेगरी में रखा है, जबकि 361 कंपनियों को ऑरेंज कैटेगरी, 20 को ग्रीन कैटेगरी व 10 वाइट कैटेगरी में रखा गया है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया रेड कैटेगरी में 8 कंपनियां ऐसी हैं, जो कि सबसे अधिक पॉल्यूशन फैला रही थीं। इन्हें डिवाइस लगाने के लिए आदेश जारी किए गए हैं, जिससे कि इन कंपनियों द्वारा फैलाए जा रहे पॉल्यूशन के स्तर को ऑनलाइन मॉनिटर किया जा सके। गुड़गांव व मेवात में बढ़ते पॉल्यूशन को देखते हुए उद्योगों को गंभीरता बरतने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने बॉयलर, चिमनी सहित बड़े स्तर पर धुआं छोड़ने वाली कंपनियों की पहचान करते हुए अलग-अलग कैटेगरी बनाई है। इनमें सबसे अधिक पॉल्यूशन फैलाने वाली कंपनियों को रेड कैटेगरी, उससे कम वाली कंपनियों को ओरेंज, ग्रीन व वाइट कैटेगरी में रखा गया है। इनमें से आठ बड़ी व नामी कंपनियों को सबसे अधिक एयर पॉल्यूशन फैलाने वाला माना है। इनके द्वारा किए जा रहे पॉल्यूशन को मॉनिटर करने के लिए डिवाइस लगाने के आदेश जारी किए हैं। इनमें गुड़गांव व मेवात की बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

गर्मी में पॉल्यूशन से नहीं मिल रही राहत

सर्दी के स्मॉग में जहां पॉल्यूशन काफी अधिक रहा था, लेकिन अब मौसम गर्म होने के बाद भी पॉल्यूशन से राहत नहीं मिल रही है। बुधवार को गुड़गांव में एयर क्वालिटी इंडेक्स अधिकतम 420 रही, जबकि न्यूनतम 82 रही। जबकि पीएम 2.5 का स्तर 173 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर रहा। पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने में उद्योगों के एयर पॉल्यूशन के अलावा वाहनों का धुआं व डस्ट आदि भी शामिल होता है।

वाहनों का धुआं भी बढ़ाता है पॉल्यूशन

शहर में मौजूद कंपनियों की चिमनियों ने निकलने वाले धुएं के अलावा शहर का हैवी ट्रैफिक भी पॉल्यूशन लेवल को बढ़ाता है। जाम के दौरान गाड़ियों से निकलने वाला धुआं इसमें और इजाफा करता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि हम कोशिश करें कि उन इलाकों से ना गुजरें जहां हैवी ट्रैफिक रहता है। लंबे लेकिन कम ट्रैफिक वाले रास्ते से जाने में भले ही वक्त ज्यादा लगे, लेकिन सेहत पर बुरा असर कम होगा। इसके अलावा अच्छी क्वालिटी का मास्क पहन कर रखें।

इन कंपनियों को दिया गया है डिवाइस लगाने का नोटिस

गुड़गांव. आईएमटी मानेसर स्थित उद्योग विहार। (फाइल फोटो)

हीरो मोटो कॉर्प लिमिटेड सेक्टर-33, वुल्कन वेस्ट मैनेजमेंट भोंडसी, मारूति सुजुकी इंडिया लि., स्टारलिट पॉवर सिस्टम लिमिटेड नूंह, भारत डेयरी उद्योग फिरोजपुर झिरका, नूंह रत्तन मिल्क स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, नूंह ई-वेस्ट रिसाइकिलर्स इंडिया शेड, नूंह डीएलएफ यूटिलिटीज लिमिटेड सेक्टर-43


इधर, बोर्ड ने बायो मेडिकल वेस्ट नियमों की अवहेलना पर 230 हेल्थ केयर सेंटरों को दी कार्रवाई की चेतावनी

गुड़गांव | पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने शहर के करीब 230 हेल्थ केयर फेसिलिटी सेंटर को बायो मेडिकल वेस्ट नियमों की पालना करने के लिए नोटिस भेजा है। नोटिस में सभी हॉस्पिटल और हेल्थ केयर सेंटरों को 31 मार्च से पहले बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के तहत लाइसेंस लेना व रिन्यू करवाना अनिवार्य होगा। यदि ये अस्पताल नियमों की पालना नहीं करते हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गुड़गांव से 1100 टन बायो मेडिकल वेस्ट हर साल निकलता है। शहर में छोटे बड़े मिलाकर कुल 285 अस्पताल हैं, जिसमें प्रदूषण विभाग की ओर से 230 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है। हाल में एनजीटी द्वारा प्रदूषण विभाग को लगाई गई फटकार के बाद इसे लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च तक जो अपने लाइसेंस का नवीनीकरण व बायो वेस्ट एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराएंगे उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जय भगवान ने बताया कि शहर के 230 अस्पतालों को नोटिस देकर उन्हें मेडिकल वेस्ट के सही तरह से निस्तारण करने व अपने अपने लाइसेंस रिन्यू कराने व नए लाइसेंस लेने को कहा गया है। 31 मार्च के बाद सूची के मुताबिक सभी की जांच होगी दोषी पाए जाने पर बायो वेस्ट एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। बोर्ड की ओर से वुल्कन वेस्ट मैनेजमेंट को शहर के मेडिकल वेस्ट उठाने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं वुल्कन वेस्ट मैनेजमेंट चेयरमैन अमित कुमार ने बताया कि हमारे पास अभी एक भी अस्पताल लाइसेंस या कांटेक्ट के लिए आया नहीं हैं। 31 मार्च तक इसे लेकर डेडलाइन दी गई है। जिसके बाद प्रदूषण विभाग की जिम्मेदारी होगी।

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