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गुड़गांव में लगातार बढ़ती जा रही है काला मोतिया के मरीजों की संख्या

आंखों के मरीजों में इन दिनों ग्लूकोमा (काला मोतिया) नामक बीमारी घर कर रही है। इस बीमारी के कारण मरीज धीरे-धीरे अपनी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 16, 2018, 02:05 AM IST

आंखों के मरीजों में इन दिनों ग्लूकोमा (काला मोतिया) नामक बीमारी घर कर रही है। इस बीमारी के कारण मरीज धीरे-धीरे अपनी आंखों की रोशनी गवां बैठते हैं। सिविल हॉस्पिटल में आने वाले आंखों के मरीजों में 2 प्रतिशत मरीज ग्लूकोमा के शिकार हो चुके है। जोकि चौंका देने वाला आंकड़ा है। विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 11 से 17 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। ग्लूकोमा सप्ताह का इस वर्ष का थीम ‘ग्रीन गो’ रखा गया है। सिविल हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञ एसएमओ डॉ. रमन शुक्ला का कहना है कि ग्लूकोमा साइलेंट ब्लाइंडनेस है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति धीरे-धीरे आंखों की रोशनी गवां देता है। यह दो प्रकार का होता है ओपन एंगल और क्लोज एंगल। इसे काला मोतिया भी कहा जाता है। आंखों की बीमारी को गंभीरता से लेना चाहिए। आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी आने पर इसे नजरअंदाज किए बिना उपचार कराएं तो डैमेज होने से बचाया जा सकता है। यहां प्रतिदिन करीब 125 आंखों के मरीज आते हैं। अनुमान के अनुसार इनमें से 2 प्रतिशत लोग ग्लूकोमा का शिकार पाए गए हैं। जबकि आंकड़ों के अनुसार शहर में 5 हजार से अधिक लोग ग्लूकोमा के शिकार हैं।

सेंटर फॉर साइट मेडिकल की निदेशक रितिका सचदेव का कहना है कि ग्लूकोमा से बचने के लिए लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच के साथ ऑप्टिक नर्व की जांच भी करानी चाहिए। ऑप्टिक नर्व के कमजोर होने पर व्यक्ति ब्लाइंडनेस के प्रभाव में आ जाता है। नेशनल हेल्थ पोर्टल इंडिया सर्वे के मुताबिक पिछले साल देश में ग्लूकोमा के 18 लाख मामले सामने आए थे। यह लाइलाज नेत्रहीनता है। ग्लूकोमा से धीरे-धीरे नेत्रहीनता आती है, इसलिए समय रहते इसे कंट्रोल करना जरूरी है। अगर लोग जागरूक हों, तो इससे बचा जा सकता है।

सप्ताह की इस वर्ष की थीम रखी गई है ‘ग्रीन गो’

शहर में 5 हजार से अधिक लोग ग्लूकोमा के शिकार

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