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निजी स्कूलों को बस के साइड शीशों पर लगाना होगी लोहे की जाली, तभी आरटीए से दिया जाएगा बस को परमिट

गुड़गांव-सोहना रोड पर 24 जनवरी को फिल्म पद्मावत के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने जनवरी...

Danik Bhaskar | Mar 17, 2018, 04:15 AM IST
गुड़गांव-सोहना रोड पर 24 जनवरी को फिल्म पद्मावत के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने जनवरी में जीडी गोयनका स्कूल की बस पर पथराव किया था। इस हमले में बच्चे चोटिल हुए थे। इस घटना से सबक लेते हुए आरटीए ने निजी स्कूलों के बस पासिंग में एक नया प्रावधान जोड़ा है। इसमें स्कूल बस के पीछे के शीशे और बस के दोनों ओर के साइड के शीशों के आगे लोहे की जाली लगी होनी चाहिए। जाली नहीं होने पर बस को विभाग पास नहीं करेगा। विभाग का मानना है कि यदि भविष्य में किसी हिंसक प्रदर्शन के दौरान किसी स्कूल बस पर पथराव होता है तो किसी बच्चे को कोई नुकसान नहीं होगा। आरटीए के एक अधिकारी ने बताया कि इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कदम अच्छा लेकिन वित्तीय बोझ बढ़ेगा

हरियाणा शिक्षण संस्थान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष व सीडी इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन यशपाल यादव ने बताया कि आरटीए ने नया आदेश जारी कर दिया है। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए अच्छा कदम है। इससे बच्चों की सुरक्षा और पुख्ता होगी। यशपाल ने कहा कि इससे स्कूलों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। दूसरा आरटीए ने अन्य बस के नियमों को कड़ा कर दिया है।

सुरक्षा को लेकर स्कूल गंभीर

स्कॉटिश हाई इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल सुधा गोयल ने बताया कि स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। स्कूल बसों में पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। फिर भी यदि प्रशासन ऐसा करने का निर्देश देगा तो किया जाएगा।

करीब चार हजार हैं बसें

गुड़गांव में सीबीएससी, हरियाणा बोर्ड समेत अन्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब साढ़े तीन सौ निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में करीब चार हजार बसें लगी हुई हैं। कुछ स्कूलों में बसों को आउटसोर्स किया हुआ है।

प्रशासन को विचार करना चाहिए

वहीं स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि अभी साइड में शीशे के बाहर लोहे की रेलिंग लगी हुई है। ऐसे में बस के अंदर कुछ होने पर शीशे को तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला जा सकता है। जाली होने से बच्चों को सिर्फ गेट से ही बाहर निकाला जा सकेगा। जाली तोड़ने में देर होगी। ऐसे में प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए।

इधर, पद्मावत विवाद में बस पर पथराव के 5 नाबालिग आरोपियों को डिस्चार्ज करने के आदेश

गुड़गांव|
भोंडसी गांव में फिल्म पद्मावत के दौरान सरकारी बस को नुकसान पहुंचाने व निजी स्कूल बस पर पथराव करने के मामले में पुलिस ने 18 आरोपियों को अरेस्ट किया था। इनमें से आठ जुवेनाइल को बाल सुधार गृह फरीदाबाद भेजा गया दिया था। इनमें से एक जुवेनाइल बालिग निकलने के बाद उसे भोंडसी जेल भेज दिया था। दो नाबालिग को 9 मार्च को जेजे बोर्ड ने रिहा करने का आदेश दिया था। शुक्रवार को 5 अन्य नाबालिग को डिस्चार्ज करने का आदेश दिया गया है। 24 जनवरी काे भाेंडसी गांव में करणी सेना के कथित कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था।

ये हैं प्रमुख नियम

स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, महिला परिचालक, प्राथमिक सहायता किट, स्पीड गवर्नर, अग्निशमन यंत्र, चालक का पांच साल पुराना ड्राइविंग लाइसेंस और चालक-परिचालक का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट व पुलिस वेरिफिकेशन लेने का नियम है। इसके अलावा आरटीए ने बसों के डेंट पेंट, लाइट ठीक होने और बस पर स्कूल का नाम सही तरीके से लिखा होना चाहिए।

15 स्कूलों की जांच अगले महीने से स्कूल सेफ्टी कमेटी करेगी

कमेटी सदस्यों की बैठक में डीसी बोले, बच्चों की सुरक्षा में अनदेखी बर्दाश्त नहीं

गुड़गांव. डीसी विनय प्रताप अपने कार्यालय में स्कूल सेफ्टी कमेटी सदस्यों की बैठक लेते हुए।

भास्कर न्यूज | गुड़गांव

जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उपायुक्त विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को स्कूल सेफ्टी कमेटी के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें डीसी ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसमें अनदेखी नहीं होनी चाहिए। बैठक में स्कूल सेफ्टी कमेटी द्वारा निरीक्षण किए गए स्कूलों की रिपोर्ट तलब की गई। उपायुक्त ने कहा कि कमेटी द्वारा बनाई गई स्कूल सेफ्टी चेक लिस्ट को इन स्कूलों को भेजकर उनसे इस बारे में जबाव तलब किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने स्कूलों में सेफ्टी उपायों की चेकिंग के लिए ड्रॉ के जरिए 15 स्कूलों का चयन किया था। चयनित स्कूलों में सुरक्षा उपायों की चेकिंग के लिए तीन टीमें बनाई गई थीं। टीम के सदस्यों ने बताया कि चेकिंग के दौरान कुछेक विद्यालयों के इंतजाम सही थे, कुछ में सुरक्षा को लेकर इंतजाम संतोषजनक नहीं थे। डीसी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। स्कूल गठित कमेटी द्वारा किए जाने वाले सेफ्टी ऑडिट को गंभीरता से लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। डीसी ने कहा कि स्कूल अपने यहां कार्यरत टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं।

निजी वैन पर नजर रखें

प्राइवेट वैन को लेकर डीसी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन बच्चों को लाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले निजी वाहन चालकों के नाम, उनका वाहन नंबर, मोबाइल नंबर व पता आदि जानकारी अपने पास रिकॉर्ड में जरूर रखें। स्कूलों के लिए सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य है। बसों में स्पीड गर्वनर होना अनिवार्य हैं। स्पीड 50 किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इन स्कूलों की होगी जांच

बैठक में ड्रॉ द्वारा स्कूल सेफ्टी ऑडिट के लिए 15 अन्य स्कूलों का चयन भी किया गया है। कमेटी 15 अप्रैल से निरीक्षण शुरू करेगी। एसेंट पब्लिक स्कूल डीएलएफ सिटी फेज-4, हैप्पी हाई स्कूल राजेन्द्रा पार्क, पंडित जयमल हाई स्कूल सरमथला, राव राम जीवन सिंह डीएवी पब्लिक स्कूल हेलीमंडी पटौदी रोड, संतोष हाई स्कूल, सेंट पॉल हाई स्कूल हरसरू, ब्ल्यू बेल्स मॉडल स्कूल सेक्टर-4 व डीएवी पब्लिक स्कूल भोंडसी में स्कूल प्रंबंधकों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, कमेटी द्वारा जीनियस कॉन्वेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल नानूकलां, जिंदल सीनियर सेकंडरी स्कूल सोहना, मेजर बिहारी लाल मेमोरियल सीनियर सेकंडरी स्कूल, बिलासपुर चौंक, राजाराम मेमोरियल पब्लिक सीनियर सेकंडरी स्कूल सुल्तानपुर, रॉयल पब्लिक सीनियर सेकंडरी स्कूल वजीरपुर, समरफील्ड स्कूल, डीएलएफ कुतुब एनक्लेव फेज-1 तथा द हेरिटेज स्कूल सेक्टर-62 सुशांत लोक-3 समेत अन्य का निरीक्षण किया जाएगा।

ये जांच की गई : टीम ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्डिंग क्षमता, बच्चों के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था, टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन, स्कूल बसों में सीसीटीवी तथा टॉयलेट की उचित व्यवस्था, नोटिस बोर्ड पर हेल्पलाइन नंबरों के चस्पा होने, स्वच्छता सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, बाउंड्री वॉल, स्कूल बसों में महिला अटेंडेंट, रैंप आदि की व्यवस्था सहित सुरक्षा के जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बारीकी से जांच की।

इधर, सेक्टर-9 कॉलेज के 250 स्टूडेंट ने कॉलेज से नाम काटे जाने पर किया हंगामा

शॉर्ट अटेंडेंस के कारण पांचवें सेमेस्टर की नहीं दे पाए थे परीक्षा, छठे को लेकर हैं चिंतित

भास्कर न्यूज | गुड़गांव

शॉर्ट अटेंडेंस के कारण सेक्टर-9 कॉलेज के स्टूडेंट्स ने शुक्रवार दोपहर करीब एक घंटे तक हंगामा किया। करीब 250 स्टूडेंट्स ने नाम काटने को लेकर पूर्व प्रिंसिपल पर मनमर्जी का आरोप लगाया। स्टूडेंट्स का आरोप था कि कॉलेज प्रबंधन की ओर से सितंबर 2017 में नाम काटे गए थे और नाम काटने के बाद उन्हें सीधा कॉलेज नहीं आने को कहा गया था, जिससे वो पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा नहीं दे पाए थे, अब छठे सेमेस्टर की परीक्षा में भी उन्हें कॉलेज में नहीं लिया गया। ना तो यूनिवर्सिटी और ना ही कॉलेज प्रबंधन कोई कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने डीसी व महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को भी शिकायत दी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उधर कॉलेज की कार्यकारी प्रिंसिपल सुशीला शर्मा ने स्टूडेंट्स को आश्वासन दिया कि सोमवार को कॉलेज के दो प्रोफेसरों को यूनिवर्सिटी भेजकर उन्हें राहत देने का प्रयास किया जाएगा।

स्टूडेंट्स का आरोप है कि अगस्त 2017 में सेक्टर-9 कॉलेज में इंदू जैन प्रिंसिपल ने कार्यभार संभाला था। सितंबर में शॉर्ट अटेंडेंस होने पर 300 स्टूडेंट्स के नाम काट दिए गए और पैरेंट्स से मिलने के बाद ही नाम दोबारा लिखे गए। अभी भी 250 स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जिनकी 2017 में इंटरनल असेसमेंट नहीं भेजी गई। हालांकि यूनिवर्सिटी से रोल नंबर जारी किए गए थे, लेकिन कॉलेज स्तर पर तत्कालीन प्रिंसिपल इंदू जैन ने 250 स्टूडेंट्स को रोल नंबर नहीं दिए। अब कार्यकारी प्रिंसिपल इस बारे में यूनिवर्सिटी स्तर पर दोबारा पोर्टल खोलकर स्टूडेंट्स की इंटरनल असेसमेंट डालने की मांग कर रही हैं।

कॉलेज से काटे गए थे 1400 स्टूडेंट्स के नाम

कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल ने बताया कि 2 से 3 फीसदी उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स के नाम काटे गए थे। 250 स्टूडेंट्स के नहीं, बल्कि 1400 स्टूडेंट्स के नाम काटे गए थे। ये ऐसे स्टूडेंट्स थे जिनकी यूनिवर्सिटी के नियमानुसार 65 फीसदी उपस्थिति नही थी। 1400 स्टूडेंट्स में से 1150 स्टूडेंट्स अपने पैरेंट्स को कॉलेज लाए थे और उनके आश्वासन पर 20 फीसदी उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया गया। इनमें से 250 स्टूडेंट्स ऐसे थे, जिनकी 2 से 3 फीसदी ही उपस्थिति थी।

गुड़गांव. विरोध करते हुए कॉलेज के छात्र।