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अगले 5 महीनों में शहर की सरकार के पास खर्च करने को 1100 करोड़ रु., पर चुनौतियां भी कम नहीं

bhaskar news | Last Modified - Nov 05, 2017, 06:38 AM IST

जनप्रतिनिधियोंने करीब 17 महीने बाद आखिरकार नगर निगम की जिम्मेदारी संभाल ही ली।
अगले 5 महीनों में शहर की सरकार के पास खर्च करने को 1100 करोड़ रु., पर चुनौतियां भी कम नहीं
गुड़गांव. जनप्रतिनिधियोंने करीब 17 महीने बाद आखिरकार नगर निगम की जिम्मेदारी संभाल ही ली। जून 2016 में पहला कार्यकाल पूरा होने के बाद से अधिकारी अपनी मर्जी से निगम चला रहे थे। अब जिम्मेदारी नारी शक्ति के हाथ में है। विकास के कामों के लिए निगम में राजस्व की कमी नहीं है, फिर भी कई मामले उलझे होने से नई मेयर टीम के सामने चुनौतियां काफी हैं। सही मायनों में कहें तो नई टीम के लिए काफी कठिन डगर होगी।
बढ़ रहा है दायरा
नगरनिगम का गठन 2 जून 2008 में हुआ था। नगर निगम के अंतर्गत 34 गांव और 200 से अधिक कॉलोनियां हैं। इसके अलावा डीएलएफ सहित शहर के सभी कॉलोनाइजर एरिया और हुडा सेक्टर्स भी आते हैं। लगभग 4500 कर्मचारी हैं, जिनमें से अधिकतर ठेके पर हैं। खास बात ये है कि ये प्रदेश में सबसे अमीर निगम है, जिसके पास खर्च करने के लिए राजस्व की कमी नहीं है। खुले हाथों खर्च करने के बाद भी निगम द्वारा निर्धारित बजट का मुश्किल से 17-18 फीसदी खर्च होता है। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2016-17 में निगम के सभी मदों में केवल 315.15 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जो प्रस्तावित बजट का महज 17.8 फीसदी रहा। समस्या केवल व्यवस्था की है। निगम गठन से लेकर अब तक के 11 सालों में नगर निगम व्यवस्थित नहीं हो पाया है।
निगम के पास है पर्याप्त बजट
चालूवित्त वर्ष में नगर निगम द्वारा सभी मदों में कुल 1225.62 करोड़ रुपए खर्च करने और सभी स्रोतों से 2002.85 करोड़ रुपए जुटाने का प्रस्ताव है। बीते सात महीनों में नगर निगम ने 125 करोड़ रुपए से भी कम खर्च किए हैं। चालू वित्त वर्ष के 5 महीनों में खर्च करने के लिए 1100 करोड़ रुपए से अधिक हैं। बजट में विकास कार्यों के लिए 745 करोड़ का प्रावधान है। ऐसे में नवनिर्वाचित मेयर मधु आजाद की टीम के पास खर्च करने के लिए राजस्व की कमी नहीं है।
एक साल में कैसे दुरुस्त होंगी शहर की सड़कें
निगमक्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करना मेयर टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। निगम क्षेत्र की लगभग सभी सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। निगम में शामिल होने के बाद से हुडा के पुराने सेक्टर्स की सड़कों का बुरा हाल है। पिछले दिनों गुड़गांव विधायक उमेश अग्रवाल ने भी इस मसले को विधानसभा में उठाया था, जिस पर स्थानीय शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने एक साल का समय मांगा है। यह लक्ष्य ना केवल प्रशासन के लिए नहीं है, बल्कि मेयर टीम के लिए भी चुनौती है।
26 अक्टूबर को प्रकाशित खबर।
पर्याप्त बजट, पर शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल
सफाईव्यवस्था पर चालू वित्त वर्ष में निगम ने कुल 87 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जोकि गत वित्त वर्ष के कुल 32 करोड़ बजट की तुलना में 55 करोड़ अधिक है। पर, सफाई व्यवस्था ट्रैक पर नहीं आई। बंधवाड़ी कचरा निस्तारण प्लांट बीते 3 सालों से बंद है। निगम ने प्लांट संचालन की जिम्मेदारी नई कंपनी को सौंपी है, मगर निस्तारण और डोर-टू-डोर कलेक्शन का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। छह महीने और लग सकते हैं।
30 अक्टूबर को प्रकाशित खबर।

60% कॉलोनी अनियमित
शहरके विस्तार के चलते निगम क्षेत्र में अभी भी 60 फीसदी कॉलोनियां अनियमित हैं, जिसमें विकास कार्य कराने पर प्रतिबंध है। कॉलोनियां नियमित करने की प्रक्रिया काफी जटिल है। पार्षदों पर दबाव बनेगा।
900मी.में विकास मुश्किल
सीनियरडिप्टी मेयर प्रमिला कबलाना का अधिकतर क्षेत्र आयुध डिपो के 900 मी. प्रतिबंधित दायरे में आता है। यहां काम कराना नई टीम के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि, मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
पानी की भी किल्लत
वर्तमानमें जलापूर्ति की व्यवस्था अपर्याप्त है। गर्मी में काफी दिक्कत होती है। नई टीम को कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम करना होगा। जलभराव और सीवर समस्या भी गंभीर है।
एक्सपर्ट व्यू
विकास कार्यों के लिए नगर निगम के पास बजट की कोई कमी नहीं है। जरूरत व्यापक योजना पर काम करने की है। गुड़गांव में अव्यवस्थित विकास होने के चलते सड़क, सीवर और जलापूर्ति की समस्या बढ़ गई है। सड़कें चौड़ी नहीं होने के चलते जाम की समस्या बनी रहती है। जलभराव के चलते सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जलापूर्ति से संबंधित पाइप लाइन भी पुरानी हो रही हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए वृहद स्तर पर योजना बनाकर काम करने की जरूरत है। इसके लिए एक साल में 745 करोड़ रुपए का बजट पर्याप्त है। इसके लिए जरूरत पड़ने पर और भी राशि का प्रावधान किया जा सकता है। -एससी कुश,सेवानिवृत्त चीफ टाउन प्लॉनर।
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Web Title: agale 5 mhinon mein shhar ki srkar ke pass khrch karne ko 1100 karoड़ ru., par chuNaotiyaan bhi km nahi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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