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हॉस्पिटल में 11 साल के बच्चे की हुई मौत, घरवालों का आरोप - इलाज में की लापरवाही

एक निजी अस्पताल में डायरिया की शिकायत होने पर एडमिट बच्चे की बुधवार सुबह मौत हो गई।

Dainik Bhaskar

Nov 23, 2017, 06:03 AM IST
eleven years old children dead because of wrong treatment

गुडगांव। गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में डायरिया की शिकायत होने पर एडमिट बच्चे की बुधवार सुबह मौत हो गई। बच्चे को मंगलवार शाम 4 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ के गलत इंजेक्शन देने के बाद उसकी मौत हो गई। इकलौते बेटे की मौत के बाद परिजनों ने काफी हंगामा किया।


- बसई निवासी गंगा विष्णु दिल्ली नगर निगम में कार्यरत हैं। मंगलवार को बेटे प्रतीक (11) को बार-बार उल्टी-दस्त और हल्का बुखार होने पर उन्होंने उसे साउथ सिटी के पार्क अस्पताल में एडमिट कराया था।

- उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया, देर शाम तक वो बातचीत कर रहा था। अचानक साढ़े तीन बजे प्रतीक को हाथ-पैर में खुजली होने की शिकायत हुई। इसकी सूचना स्टाफ को दी।

- स्टाफ ने प्रतीक को इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने प्रतीक को आईसीयू में भर्ती कर दिया। इसके करीब 15 मिनट बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने और गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है।

15 मिनट में खो दिया घर का चिराग

- प्रतीक की मां निर्मला ने बताया कि उनका इकलौता बेटा बीमार होने के बावजूद भी अच्छी तरह बात कर रहा था।

- इंजेक्शन लगते ही 15 मिनट में उसकी हालत बिगड़ गई और मौत हो गई। मां ने सवाल उठाया कि आखिर उसे ऐसा कौन सा इंजेक्शन लगाया कि उसकी मौत हो गई।

ट्रैफिक जाम करने की चेतावनी
- प्रतीक के परिजनों ने डेडबॉडी लेते हुए सदर थाना प्रभारी विजय कुमार को चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो वे डेडबॉडी सड़क पर रखकर ट्रैफिक जाम करेंगे।

- इधर थाना प्रभारी विजय कुमार ने कहा कि सीएमओ इस मामले में जो रिपोर्ट देंगे, उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

ये भी लगाए आरोप: प्रिस्क्रिप्शन में बच्चे की मौत के बाद ओवर राइटिंग
प्रतीक के परिजनों का आरोप है कि बच्चे के प्रिस्क्रिप्शन में बच्चे की मौत के बाद ओवर राइटिंग की गई है।

गलत इंजेक्शन लिखा होगा, फिर उस पर ओवर राइटिंग की गई। इलाज में लापरवाही बरती गई है।इंजेक्शन की जरूरत नहीं थी, लेकिन उसे दिया गया।

अस्पताल केडॉ. महेंद्र मनोचा ने कहा किउनकी देखरेख में ही प्रतीक का इलाज हो रहा था। शाम को डायरिया के कारण उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रात को हल्का दौरा पड़ा था, ऐसे में उसे टीका लगाना पड़ा। सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर उसे आईसीयू में एडमिट किया, लेकिन किडनी के साथ उसके कई ऑर्गन्स ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उसे बचाया नहीं जा सका।

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