--Advertisement--

देश में पहली बार ‘इंडियन ब्रेन टैंपलेट’ तैयार कर रहे वैज्ञानिक, भारतीयों के दिमाग को ‘पढ़कर’ होगा सटीक इलाज

ब्रेन की एनाटॉमी समझने में गाइड का काम करेगा 200 लोगों के एमआरआई से तैयार ब्रेन टैंपलेट।

Dainik Bhaskar

Apr 11, 2018, 08:54 AM IST
भारतीयों के ब्रेन  को टेक्निकल भारतीयों के ब्रेन को टेक्निकल

गुड़गांव. मानेसर स्थित देश के एकमात्र नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी) में पहली बार के मनोवैज्ञानिक इंडियन ब्रेन टैंपलेट (भारतीय मस्तिष्क का खाका) तैयार करने में जुटे हुए हैं। इसके लिए देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 200 वॉलंटियर्स के दिमाग का स्कैन किया जाएगा। टैंपलेट बनाने के लिए सभी ‘एमआरआई स्कैन इमेज’ को कंप्यूटर पर कंपाइल करके एक जटिल संरचना तैयार की जाएगी। इसकी डिटेल एनालिसिस करने के बाद कंप्यूटर पर एक आदर्श रूपरेखा बनेगी। यह साइंटिस्ट और डॉक्टरों को ब्रेन की एनाटॉमी (संरचना) समझने में गाइड का काम करेगी। इसी आधार पर इलाज और आगे रिसर्च में भी मदद मिलेगी।

भारतीय ब्रेन टैंपलेट से इलाज कितना बेहतर होगा यह कहना मुश्किल
- अभी तक कनाडा के ब्रेन टैंपलेट के आधार पर भारतीयों का इलाज किया जा रहा था। इंडियन ब्रेन टैंपलेट से जुड़ी रिसर्च टीम में शामिल प्रोफेसर पी मंडल ने बताया कि स्कैन की प्रक्रिया पूरी होने में करीब दो माह लगेंगे। कनाडा के अलावा चीन, फ्रांस, साउथ कोरिया ने अपने ब्रेन टैंपलेट तैयार कर रखे हैं।

- मंडल ने कहा कि भारतीय ब्रेन टैंपलेट से इलाज कितना बेहतर होगा यह कहना मुश्किल है। मगर इससे भारतीय लोगों के ब्रेन की जटिलताओं और बीमारियों को समझने में मदद जरूर मिल सकती है।

- इसका मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क काे और गहराई से समझना है ताकि आगे जो भी करें ज्यादा बेहतर अंडरस्टैंडिंग के साथ कर सकें। इस रिसर्च के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा फंड दिया जा रहा है।

रिसर्च के लिए दो सबसे अहम प्रोसेस

1. ब्रेन के छोटे से छोटे हिस्सों का भी स्कैन
रिसर्च सेंटर में विशेष उपकरणों से ब्रेन के छोटे से छोटे हिस्सों का भी स्कैन होगा। एमआरआई के पूरे प्रोसेस में करीब आधे घंटे का वक्त लगता है। हालांकि एमआरआई की मशीन पर लिटाने और हटाने के दौरान सिर्फ 10 मिनट का समय लिया जाता है। इसके बाद ब्रह्मा प्रोग्राम की मदद से एमआरआई इमेजेज को एकत्र किया जाता है।

2. ब्रह्मा प्रोग्राम से कंपाइल होंगी एमआरआई इमेज
रिसर्च के दौरान एमआरआई इमेज को कंपाइल करने के लिए ब्रह्मा प्रोग्राम की मदद ली जा रही है। यह एक विशेष सॉफ्टवेयर है। इसके जरिए मैथमेटिकल तरीके से इमेज कंपाइल हो जाएंगी। डॉक्टर पी. मंडल ने बताया कि फिलहाल 70 एमआरआई इमेज के लिए इसका इस्तेमाल करके देखा है। ब्रह्मा प्रोग्राम के जरिए 11 दिन में उनसे टैंपलेट तैयार कर लिया गया।

टैंपलेट के लिए हर देश में स्कैन संख्या अलग

चीन: 1000 लोगों के स्कैन पर आधारित ब्रेन टैंपलेट
कनाडा: 300 लोगों के स्कैन के आधार पर तैयार किया

भारत: 200 लोगों के ब्रेन का स्कैन किया जाएगा

ऑनलाइन होगा टैंपलेट ताकि सभी देख सकें

भारतीय ब्रेन टैंपलेट के अप्रूवल के बाद इसे ऑनलाइन किया जाएगा। ताकि देशभर में चिकित्सक इसे देख सकें और इसके आधार पर मरीज का इलाज कर सकें। साथ ही किसी इंटरनेशनल जर्नल में भी पब्लिश किया जाएगा। इसके बाद ही विश्व में यह मान्य होगा।

बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होने की बीमारी अल्जाइमर पर भी रिसर्च
रिसर्च सेंटर में ऑस्ट्रेलिया के साथ अल्जाइमर पर भी रिसर्च चल रही है। इसमें ब्रेन में पाए जाने वाले ग्लूटाथायोन के स्तर पर शोध हो रहा है। यह देखा जा रहा है कि उम्र के साथ इसमें क्या बदलाव होता है। उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होने में इसका रोल होता है। साथ ही ब्रेन में आयरन के स्तर को भी देखा जा रहा है।

भारतीय ब्रेन टैंपलेट से फायदा | एनालिसिस ज्यादा सटीक होगा

- कनाडा का ब्रेन टैंपलेट वहां के लोगों के हिसाब से बनाया गया है। इसलिए सटीक एनालिसिस संभव नहीं।

- भारतीय ब्रेन टैंपलेट के साइज-वॉल्यूम और संरचना के हिसाब से नतीजे ज्यादा सटीक मिलेंगे।

- आगे रिसर्च में दूसरे मॉडल्स की जगह इस ब्रेन टैंपलेट का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

- भारतीयों के ब्रेन को टेक्निकली समझने में चिकित्सकों को ज्यादा आसानी होगी।

टैंपलेट बना रही रिसर्च टीम के सदस्य प्रोफेसर पी. मंडल के मुताबिक, जल्द बच्चों के ब्रेन टैंपलेट पर काम शुरू किया जाएगा। अभी तक अमेरिका के वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं। भारतीय बच्चों के टैंपलेट बनाने में भी उनकी मदद ली जाएगी।

X
भारतीयों के ब्रेन  को टेक्निकलभारतीयों के ब्रेन को टेक्निकल
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..