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Rs.11.5 लाख खर्च करने के बाद भी नहीं मिला हेल्दी बच्चा, मामला नेग्लीजेंसी बोर्ड में पहुंचा

गुड़गांव फर्टिलिटी सेंटर ने अपने वायदे अनुसार सरोगेसी के तहत हेल्दी बेबी नहीं दिया। आरोप है कि आईवीएफ में करीब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 30, 2018, 02:00 AM IST

गुड़गांव फर्टिलिटी सेंटर ने अपने वायदे अनुसार सरोगेसी के तहत हेल्दी बेबी नहीं दिया। आरोप है कि आईवीएफ में करीब साढ़े 11 लाख खर्च करने के बाद भी बच्चे की ग्रोथ नहीं हुई थी। प्री-मेच्योर बच्चा दिया गया, जिसका दाहिना हिस्सा सामान्य से कम बढ़ रहा है। मामले की शिकायत डिस्ट्रिक्ट मेडिकल नेग्लीजेंसी बोर्ड के पास पहुंची है। मामले में बोर्ड ने गुरुवार को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए और फर्टिलिटी सेंटर की तरफ से वकील ने पहुंचकर अपनी दलील पेश की।

गांव इस्लामपुर के रहने वाले शिकायतकर्ता ने बताया कि बच्चे की चाह में वो और उनकी प|ी अगस्त 2016 में सेक्टर-46 स्थित गुड़गांव फर्टिलिटी सेंटर गए। इस आईवीएफ सेंटर के डॉक्टर ने इन्हें पूरी प्रक्रिया समझाकर हेल्दी बेबी देने के लिए 8 लाख रुपए का कांट्रेक्ट साइन किया। दंपती को बताया गया कि पहली बार में सफल सरोगेसी की जाएगी। कांट्रेक्ट के अनुसार सेंटर की टीम ने शिकायतकर्ता का स्पर्म हैदराबाद अपने दूसरे सेंटर पहुंचाया। पहली बार में स्पर्म काउंट कम होने की वजह से दोबारा सैंपल लिया गया। सरोगेसी की मई 2017 डिलिवरी डेट दी गई, जबकि उन्हें 30 मार्च को ही बच्चा पैदा होने की सूचना दी गई। अगले दिन वे हैदराबाद गए तो देखा कि एक प्री-मेच्योर बेबी वेंटिलेटर पर था। बच्चे का वजन केवल 1 किलो 400 ग्राम था। इस पर सेंटर की ओर से कहा कि गया बच्चा कुछ दिन में ग्रोथ करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब ढाई लाख रुपए वेंटिलेटर का खर्च भी शिकायतकर्ता से वसूला गया, जो कांट्रेक्ट में शामिल नहीं था। इसके अलावा बच्चे का एक अंडकोष के साथ पैदा हुआ था। शरीर का दाहिना हिस्सा बाएं की अपेक्षा कम बढ़ रहा है। कांट्रेक्ट के अनुसार बच्चे का डीएनए टेस्ट भी नहीं कराया गया और अनहेल्दी बेबी उन्हें दिया गया।

सेक्टर-46 के गुड़गांव फर्टिलिटी सेंटर की बोर्ड से की शिकायत

मेडिकल नेग्लीजेंसी बोर्ड के सदस्य डॉ. संजय नरूला ने बताया कि शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। आईवीएफ सेंटर की ओर से वकील ने अपनी दलील पेश की। बयानों को समझने के बाद ही बोर्ड कोई फैसला सुनाएगा।

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