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न्यू पालम विहार में 70 निर्माण गिराने फोर्स के साथ आई टीम, लोग कोर्ट से ले आए स्टे, 32 मकान ही तोड़ पाए

Gurgaon News - द्वारका एक्सप्रेस-वे पर न्यू पालम विहार क्षेत्र में 11 वर्षों से बनी बाधा शनिवार को भी दूर नहीं हो पाई। इस बार सरकार...

Dainik Bhaskar

May 27, 2018, 02:00 AM IST
न्यू पालम विहार में 70 निर्माण गिराने फोर्स के साथ आई टीम, लोग कोर्ट से ले आए स्टे, 32 मकान ही तोड़ पाए
द्वारका एक्सप्रेस-वे पर न्यू पालम विहार क्षेत्र में 11 वर्षों से बनी बाधा शनिवार को भी दूर नहीं हो पाई। इस बार सरकार एक झटके में सभी बाधाएं दूर करना चाहती थी। इसके लिए महज 15 घंटे पहले मकान पर नोटिस चस्पा करके अगले दिन सुबह 7.30 बजे लगभग एक हजार पुलिस जवान और 12 जेसीबी के साथ धावा बोला। मगर, एक साथ 70 मकानों को ध्वस्त करने की प्रशासन की यह मनसा भी अधूरी रह गई। दोपहर 11.30 बजे तक केवल 32 मकान ही ध्वस्त किए गए थे कि प्रभावित लोग पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से स्टे लेकर आ गए। प्रशासन को पूरा विश्वास था कि सुबह 10 बजे कोर्ट खुलने से पहले सभी मकानों को ध्वस्त कर देंगे, मगर 38 मकान फिर बाधा बने रहे गए। हालांकि, लोगों ने उग्र प्रदर्शन नहीं किया, भारी पुलिस बल के सामने केवल चीखते-चिल्लाते ही रह गए। अपना आशियाना ध्वस्त होते देख कई महिलाओं को चक्कर आ गया, एक महिला तो घर के बाहर गेट पर ही बेहोश होकर गिर गई।

सुबह 6 बजे बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर जुटे

पूर्व योजना के अनुसार रोडवेज की बसें और ट्रकों में सवार होकर पूरी टीम सुबह 6 बजे बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में पहुंच गई। और 7 बजे सभी टीमों ने न्यू पालम विहार को ओर कूच करनी शुरू कर दी।

सुबह 7 बजे अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची थीं टीमें

गुड़गांव. न्यू पालम विहार क्षेत्र में द्वारका एक्सप्रेस-वे के बीच में आने वाले मकानों को तोड़ता जिला प्रशासन का दस्ता।

प्रभावितों को दिए गए हैं वैकल्पिक प्लॉट: सोलंकी

द्वारका एक्सप्रेस-वे पर न्यू पालम विहार क्षेत्र में डेढ़ किलोमीटर के दायरे में पहले भी कई बार तोड़-फोड़ की गई है। 150 से अधिक मकान तोड़े जा चुके हैं, शनिवार को 70 मकान तोड़े जाने थे। ज्वाइंट कमिश्नर मुकेश सोलंकी ने दावा किया कि इन मकान मालिकों को मकान कोई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। सभी के साथ कई बार बैठक की गई। सभी प्लॉट के बदले वैकल्पिक प्लॉट दिए गए हैं, मकान की लागत भी दी गई। ऊपर से जमीन का मुआवजा भी दिया गया। कुछ मामलों में जीपीए का झगड़ा है। मुआवजा के लिए रजिस्ट्री धारक और जीपीए धारक आपस में लड़ रहे हैं, जिनके मामले कोर्ट में लंबित हैं। फैसला होने पर मुआवजा दिया जाएगा।

देर रात लिया फैसला और झोंकी ताकत

दिल्ली के एनएच-8 स्थित शिव मूर्ति से गुड़गांव स्थित खेड़कीदौला तक लगभग 30 किलोमीटर के द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य 11 वर्षों से अधूरा पड़ा है। अब इसके विस्तार की भी तैयारी है। इसको 8 लेन का बनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से शिलान्यास करवाने की भी सरकार की तैयारी है। मगर, इसके बीच में आ रहे 70 मकान इसके निर्माण में बाधा बने हुए थे। इस पूरे मामले पर चंडीगढ़ में सीएम हाउस में रात 11 बजे तक मंत्रियों और अधिकारियों के बीच बैठक हुई। गुड़गांव से नगर-निगम के ज्वाइंट कमिश्नर मुकेश सोलंकी प्रतिनिधित्व कर रहे थे। देर रात सरकार द्वारा फैसला लेने के साथ ही गुड़गांव में तोड़-फोड़ की तैयारी शुरू हो गई। जीएमडीए व पुलिस अधिकारी सुबह 4 बजे चंडीगढ़ गुड़गांव पहुंच गए। सुबह 10 बजे से पहले-पहले सभी 70 मकान ध्वस्त करने की योजना बनाई गई। इसके लिए 6 टीमें गठित की गई थी, प्रत्येक टीम में 150-150 पुलिस जवान तैनात किए गए, जिसमें से 100 पुरुष और 50 महिला थीं।

गुड़गांव. घरों से बाहर निकला लोगों का सामान

नहीं हुआ उग्र विरोध, चीखतेे रह गए लोग

पूरी टीम लगभग 7.30 बजे मौके पर पहुंच गई और मकानों से लोगों के साथ सामान निकाला शुरू कर दिया। इस दौरान क्षेत्र के पूर्व पार्षद रिशीराज राणा अपनी टीम के साथ पहुंच गए। उन्होंने जेसी गौरव अंतिल से आपत्ति जताई कि लोगों को सामान निकालने के लिए भी समय नहीं दिया गया। शुक्रवार की रात को नोटिस दिया गया और सुबह होते ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई, यह गलत है। अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। लोगों ने उग्र प्रदर्शन नहीं किया, इसलिए पुलिस बल की जरूरत नहीं पड़ी। अधिकारियों ने अपनी शरीर पर पहने सेफ्टी जैकेट भी खोल लिए और राहत की सांस दी। कर्मियों ने सबसे पहले मकानों के गेट तोड़े और सामान बाहर करना शुरू कर दिया। सामान ढोने के लिए प्रत्येक टीम में 50-50 कर्मियों के साथ 5-5 (कुल 30) ट्रैक्टर ट्रॉली की व्यवस्था की गई थी। घर के सदस्यों के विरोध के चलते कर्मियों को घर से सामान निकालने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। इसमें अपेक्षाकृत अधिक समय भी लग गया। एक-एक करके मकान को खाली करते हुए जेसीबी से ध्वस्त किया जाता रहा। लगभग 11.30 बजे तक 32 बजे तक महज 32 मकान ही तोड़े गए थे कि लोग पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से स्टे ले आए, जिसका प्रशासन की उम्मीद नहीं थी। लोगों ने प्रशासन को स्टे आडर दिखा दिया। फिर क्या था, पूरी कार्रवाई बीच में ही स्थगित करनी पड़ी। भीषण गर्मी में सभी बाधा दूर करने की तैयारी अधूरी रह गई।

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