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डवलपर्स को सरकार की आलोचना पड़ी भारी, सीईओ ने ईडीसी पर घेरा

Gurgaon News - नेशनल रियल एस्टेट डवलपर्स काउंसिल ऑफ हरियाणा (नारेडको) द्वारा आयोजित समिट में डवलपर्स को सरकार की आलोचना भारी...

Dainik Bhaskar

Jun 02, 2018, 02:00 AM IST
डवलपर्स को सरकार की आलोचना पड़ी भारी, सीईओ ने ईडीसी पर घेरा
नेशनल रियल एस्टेट डवलपर्स काउंसिल ऑफ हरियाणा (नारेडको) द्वारा आयोजित समिट में डवलपर्स को सरकार की आलोचना भारी पड़ी। हर बार की तरह इस बार भी समिट में नारेडको के सदस्यों ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उदारता का परिचय देने की अपील की। जवाब में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु और जीएमडीए के सीईओ वी उमाशंकर ने नारेडको सदस्यों को एक्सटर्नल डवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) पर घेरे रखा। दोनों ने इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी के लिए डवलपर्स और बिल्डर्स को जिम्मेदार ठहराने की पूरी कोशिश की। स्थिति को देखते हुए नारेडको सदस्य बीच-बीच में सरकार की तारीफ भी करते नजर आए।

डवलपर्स ने इस तरह से सरकार पर बनाया दबाव

नारेडको हरियाणा के चेयरमैन राजीव तलवार ने गुड़गांव का भौतिक और बुनियादी आधारभूत संरचना वैश्विक मानकों के रूप में विकसित करने के लिए मंत्री को प्रेरित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि हम गुड़गांव को विश्व स्तर का बनाने की बात नहीं कर रहे, मगर नई मुंबई जैसे बनाने की तो आशा कर सकते हैं। प्रेसिडेंट प्रवीण जैन ने प्रदेश में रियल एस्टेट के विकास के लिए राज्य सरकार के समर्थन और सक्रिय नीति बनाने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि पब्लिक पॉलिसी डॉक्यूमेंटेशन में भी किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

दिल्ली मेट्रो व नेशनल हाईवे से तुलना नहीं कर सकते

इस दौरान नारेडको चेयरमैन राजीव तलवार ने दिल्ली मेट्रो रेल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल के निर्माण में एक भी कोर्ट केस नहीं हुए। जवाब में उमाशंकर ने कहा कि हम दिल्ली मेट्रो और एनएचएआई से तुलना नहीं कर सकते। दिल्ली मेट्रो और एनएचएआई का जमीन अधिग्रहण कानून सख्त है, जिसमें जमीन देने से कोई मना नहीं कर सकता, मगर हरियाणा में राज्य भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ही जमीन अधिग्रहित की जा सकती है। हम दिल्ली मेट्रो की तरह सख्त नहीं हो सकते। हमें सड़क और मेट्रो लाइन के लिए राइट ऑफ वे की आवश्यकता होती है।

रोड के लिए बजट जरूरी

उमाशंकर ने कहा कि रोड आदि के लिए भारी बजट की आवश्यकता होती है, जिसमें बिल्डर्स का सहयोग नहीं मिल रहा है। गुड़गांव में एक्सटर्नल डवलपमेंट पर 21 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, मगर सरकार को इस मद में डवलपर्स से केवल 15.5 हजार करोड़ रुपए ही मिले हैं। प्रदेश में ईडीसी के एवज में डवलपर्स पर लगभग 16 हजार करोड़ रुपए बकाया है, जिसमें से 10 हजार करोड़ गुड़गांव का है। डवलपर्स यह राशि देने का नाम नहीं ले रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि ईडीसी की राशि नहीं मिली तो जीएमडीए आगे काम नहीं कर सकेगा।

प्रदेश गुड़गांव पर आश्रित नहीं

मंत्री अभिमन्यु ने कहा कि आम तौर पर यह कहा जाता है कि गुड़गांव पूरे प्रदेश को रेवेन्यू दे रहा है। मगर, यह जान लेना चाहिए कि स्टांप ड्यूटी में 33 फीसदी का ग्रोथ हुआ। इस एवज में प्रदेश सरकार को 1000 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे, जिसमें से गुड़गांव का हिस्सा महज 300 करोड़ रुपए था, शेष 7 हजार करोड़ अन्य राज्यों से प्राप्त हुए हैं।

3 महीने में चालू होगा केएमपी, 18 में द्वारका एक्सप्रेस-वे

इस दौरान कुंडली मानेसर पलवल हाई (केएमपी) और द्वारका एक्सप्रेस-वे का भी मामला उठा। मंत्री ने हरियाणा के हिस्से में केएमपी को तीन महीने में चालू करने का भरोसा दिलाया। मंत्री ने कहा कि द्वारका एक्सप्रेस-वे में कुछ हिस्से पर भूमि विवाद चल रहा है। सरकार जीपीए धारकों को प्लॉट के बदले प्लॉट कैसे दे सकता है। इसमें कानूनी अड़चन आ रही है। इस पर उमाशंकर ने कहा कि कानूनी अड़चन को दूर करते हुए इस एक्सप्रेस-वे को चालू करने में और 18 महीने लगेंगे।

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