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सांठ-गांठ कर बनवाया मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, शिकायत के बाद 2 घंटे मेंे रद्द

पुलिस के एक डीसीपी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भारी पड़ गया। डीसीपी को...

Dainik Bhaskar

Jun 08, 2018, 02:00 AM IST
पुलिस के एक डीसीपी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भारी पड़ गया। डीसीपी को मेडिकल सर्टिफिकेट पुलिस मेडल के आवेदन के लिए लगाना था। सांठ-गांठ कर डीसीपी का मेडिकल फिटनेस का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया, लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर तक शिकायत पहुंच गई और इसकी जांच शुरू हुई तो दो घंटे में ही सांठ-गांठ करने का खुलासा हो गया। ऐसे में डीसीपी का मेडिकल सर्टिफिकेट भी आनन-फानन में रद्द करते हुए उन्हें अनफिट घोषित कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मानेसर में तैनात डीसीपी ने पुलिस विभाग में ‘पुलिस मेडल’ के लिए अप्लाई किया है। इस आवेदन के लिए अन्य औपचारिकताओं के साथ ही मेडिकल फिट सर्टिफिकेट भी लगाना होता है। इस सर्टिफिकेट के लिए उन्होंने गुड़गांव सिविल अस्पताल में आवेदन किया।

ये है मेडिकल बनवाने का नियम

.मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए विभाग से आर्थो सर्जन, न्यूरोसर्जन, नेत्र विशेषज्ञ व फिजिशियन की ओर से मेडिकल जांच करके एनओसी दी जाती है। इसके बाद सभी रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन ऑफिस मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है। डीसीपी ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके चारों जगहों से एनओसी ले ली। सर्टिफिकेट जारी करने वाली डिप्टी सीएमओ डाॅ. रेनू सरोहा ने बताया कि एसएमओ डाॅ. ब्रह्मदीप संधू ने उन्हें फोन पर डीसीपी का सर्टिफिकेट जारी करने को कहा था। फिर भी उन्होंने सभी चारों डॉक्टरों की एनओसी के आधार पर ही सर्टिफिकेट जारी किया है। जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि इसमें कुछ गड़बड़ है तो दो घंटे में ही मेडिकल सर्टिफिकेट रद्द करते हुए पुलिस अधिकारियों को भी इस बारे में सूचना दे दी गई। डीसीपी ने अपने विभाग की ओर से मिला मेडिकल परफार्मा नहीं दिखाया जिसके आधार पर मेडिकल फिटनेस होनी थी। हमने नियमानुसार उन्हें सर्टिफिकेट दिया था। बुधवार को 10 बजे सर्टिफिकेट जारी किया गया, लेकिन पुलिस विभाग और स्वास्थ्य मुख्यालय की ओर से आपत्ति के बाद 12 बजे ई-मेल के माध्यम से दोनों विभागों को सूचित कर कहा कि उनके द्वारा जारी किए मेडिकल सर्टिफिकेट को रद माना जाए। वहीं सीएमओ डाॅ. गुलशन अरोड़ा ने कहा कि यह उनका विभागीय मामला है। इस मामले को शार्ट आउट किया जा रहा है।

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