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बारिश में सब्जियां महंगी, सितंबर में लोकल सप्लाई आने से होंगी सस्ती

मानसून की शुरुआत महंगाई के साथ हुई है। बारिश के बाद से ही महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है। इस महंगाई से अगले डेढ़...

Danik Bhaskar

Jul 09, 2018, 02:00 AM IST
मानसून की शुरुआत महंगाई के साथ हुई है। बारिश के बाद से ही महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है। इस महंगाई से अगले डेढ़ महीने तक राहत मिलना मुश्किल है। सब्जियों के दाम बढ़ने से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ा है। हालात ये हैं कि कोई भी हरी सब्जी 40 रुपए प्रति किलोग्राम से कम नहीं है। वहीं सभी सब्जियों का जायका बनाने वाला टमाटर भी बारिश के बाद चार गुना तक महंगा होकर 40 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।

स्टॉकिंग के कारण मंडियों में सब्जी नहीं पहुंच पाती

सैलरी साल में एक बार बढ़ती है, लेकिन महंगाई कभी भी बढ़ जाती है। गुड़गांव जैसे महंगे शहर में आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। इस समय महंगाई की सबसे बड़ी वजह बारिश को माना जा रहा है। इसकी वजह से आवक तो प्रभावित है ही साथ ही फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। इसकी एक अन्य बड़ी वजह विक्रेताओं की ओर से की जा रही कालाबाजारी भी है। जानकारों का कहना है कि बरसात के समय इनकी स्टॉकिंग हो जाती है, जिसकी वजह से यह मंडियों में नहीं पहुंच पाते।

यहां से लें सस्ती सब्जी

शहर की सब्जी मंडियों में भी सब्जियों के रेट अलग-अलग हैं। शहर की सबसे सस्ती मंडी खांडसा है। थोक मंडी होने के कारण यहां अन्य मंडियों की तुलना में सबसे कम रेट होते हैं। इसके अलावा खुदरा मंडी में रेलवे स्टेशन के पास लगने वाली मंडी में सबसे सस्ती सब्जियां उपलब्ध हैं। यहां आसपास के कुछ गांव के किसान ट्रेनों में रखकर सीधे सब्जियां पहुंचाते हैं। शहर की सबसे बड़ी खुदरा मंडी गुरुद्वारा रोड पर है। यहां सब्जियों की कीमतें मिडिल क्लास के हिसाब से ही होती हैं।

गुड़गांव. सेक्टर-15 में एक स्टोर में सब्जी खरीदते लोग।

सितंबर में पहले सप्ताह बाद ही सस्ती होंगी सब्जियां

गुरुद्वारा रोड सब्जी मंडी के विक्रेता भगत ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र में लगातार लैंड स्लाइड व बारिश के कारण रास्ते बंद हैं। ऐसे में सब्जियों की आवक प्रभावित हो रही है। बारिश थमने के साथ ही सब्जियां एक बार फिर सस्ती हो जाएंगी। वहीं बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. दीन मोहम्मद ने बताया कि सितंबर के पहले हफ्ते के बाद सब्जियां सस्ती होने उम्मीद है। यहां लोकल सब्जियों में अभी पौध लगाई जा रही है, जबकि सर्दियों में लगाई गई सब्जियां बारिश के साथ ही खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में महंगाई बढ़ी है।

सब्जी रेट/किग्रा.

टमाटर 40 रु.

तोरई 45 रु.

भिंडी 40 रु.

घीया 48 रु.

टिंडा 50 रु.

करेला 30 रु.

शिमला मिर्च 65 रु.

खीरा 45 रु.

मिर्च 85 रु.

फूल गोभी 95 रु.

बंद गोभी 60 रु.

गर्मी व उमस के बीच 4-6 घंटे लग रहे बिजली कट

भास्कर न्यूज|गुड़गांव

पिछले चार दिन से एक बार फिर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही लोग बिजली कट से बेहाल हो रहे हैं। जहां शहरी क्षेत्र में 20 घंटे भी उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। रूरल क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बेशक 24 घंटे सप्लाई देने के लिए जगमग गांव योजना चल रही है, लेकिन दिन व रात में चार से छह घंटे के कट लग रहे हैं। वहीं मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों में एक बार फिर मौसम में बदलाव होगा और मंगलवार से एक बार फिर बारिश की उम्मीद है।

रविवार को शहर का अधिकतम तापमान बढ़कर 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। वहीं बारिश के बाद से उमस बढ़ गई है, जिससे बिजली खपत बढ़ी है। पिछले 5 दिन में बिजली की खपत 245 लाख यूनिट से बढ़कर 280 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। वहीं पारा चढ़ने से ट्रांसफार्मरों में भी लगातार फॉल्ट बढ़ रहे हैं। रूरल एरिया में 24 घंटे की बजाय 16 घंटे ही बिजली मिल पा रही हैं। रात 10.30 बिजली कट लगने के बाद रात 12 बजे के बाद सप्लाई शुरू होती है।

320 लाख यूनिट बिजली की मांग

गुड़गांव के दोनों सर्कल के अंतर्गत बिजली के करीब 4 लाख उपभोक्ता हैं। जिले में बिजली की मांग हर साल लगभग 20 से 25 फीसदी बढ़ जाती है। जहां पिछले साल 280 लाख यूनिट बिजली खपत रही थी वहीं इस साल यह बढ़कर 320 लाख यूनिट तक पहुंच गई। फिलहाल गुड़गांव सर्कल के तहत प्रतिदिन औसतन 220 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हो रही है।

लोग परेशान, 20 घंटे भी नहीं मिल रही बिजली

इधर, उमस व तेज धूप के कारण सिविल अस्पताल में बुखार व डायरिया के 20 फीसदी मरीज बढ़े

मौसम में हुए परिवर्तन के बाद अस्पताल में करीब 20 फीसदी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में डायरिया व बुखार के मरीज आने शुरू हो गए हैं। अस्पताल में जहां पहले 2000 की ओपीडी हो रही थी, वहीं बारिश के बाद बढ़ी उमस व भीषण गर्मी के चलते 2250 की ओपीडी हो गई हैं। अस्पताल के फिजिशियन डॉ. नवीन कुमार का कहना है कि अस्पताल में रोजाना डायरिया के 15 से 20 मरीज आने लगे हैं, जबकि बुखार के रोजाना करीब 40 से 45 मरीज आ रहे हैं।

मेंटिनेंस है वजह


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