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चंद्रकांता ने नेत्र और देह दान कर की मिसाल कायम

जीवित रहते हुए भी 80 वर्षीया चंद्रकांता परोपकार के काम करती रहीं, वहीं मौत के बाद वो अपनी आंखें व देह भी दानकर मिसाल...

Danik Bhaskar | Jun 19, 2018, 02:00 AM IST
जीवित रहते हुए भी 80 वर्षीया चंद्रकांता परोपकार के काम करती रहीं, वहीं मौत के बाद वो अपनी आंखें व देह भी दानकर मिसाल कायम कर गईं। शिवाजी नगर के मेघराज आर्य ने बताया कि उनकी प|ी चंद्रकांता की सोमवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि अपने जीवनकाल में चंद्रकांता लोगों और उनके परिजनों से मरणोपरांत नेत्रदान करने का आग्रह करती रहीं, ताकि उनकी आंखों से कोई और ये दुनिया देख सके। उन्होंने सैकड़ों की संख्या में नेत्रदान कराए थे। अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान व देह दान करने की इच्छा व्यक्त की थी और इसके लिए सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली थीं। चंद्रकांता के पुत्र हरीश आर्य ने बताया कि जैसे ही उनके निधन की सूचना मिली तो सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के लोग उनके घर पहुंचने लगे। उनके शरीर को श्मशान ले जाने की जगह आर्य समाज मंदिर ले जाया गया और नेत्र व देह दान की प्रक्रिया कराई गई। उन्होंने बताया कि निरामया चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा नेत्रदान कराया गया और देहदान के लिए दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च सेंटर टीम गुड़गांव पहुंची और आवश्यक औपचारिकता पूरी कर चंद्रकांता की देह लेकर रिसर्च सेंटर रवाना हो गए, ताकि मेडिकल के छात्र रिसर्च कर सकें।