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ऑपरेशन के बाद पैरों ने काम करना किया बंद, नेग्लीजेंसी बोर्ड में मरीज ने की शिकायत

शहर के फोर्टिस हॉस्पिटल के डाक्टरों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। मरीज के पैरों में ऑपरेशन के बाद से जलन...

Dainik Bhaskar

Apr 26, 2018, 02:05 AM IST
ऑपरेशन के बाद पैरों ने काम करना किया बंद, नेग्लीजेंसी बोर्ड में मरीज ने की शिकायत
शहर के फोर्टिस हॉस्पिटल के डाक्टरों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। मरीज के पैरों में ऑपरेशन के बाद से जलन होनी शुरू हुई। पैरों के तलवों में जलन का इलाज करने के लिए मरीज को भर्ती किया गया था। मरीज सामान्य हाल में हॉस्पिटल आया था, लेकिन यहां इलाज के बाद से उसके पैर ने काम करना बंद कर दिया। इलाज में करीब एक लाख रुपए खर्च करने के बाद वह अब अपाहिज की तरह जीवन यापन कर रहा है।

आरोप है कि सही इलाज न करने से उसके पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। इसके लिए मंगलवार को मेडिकल नेग्लीजेंसी बोर्ड ने दोनों पक्षों को बयान देने के लिए बुलाया लेकिन हॉस्पिटल की ओर से कोई भी बोर्ड के सामने हाजिर नहीं हुआ। पीड़ित ने अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। फोर्टिस प्रबंधन को बयान देने के लिए जल्द ही अगली तारीख दी जाएगी। मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी हरि सिंह तोमर ने बताया कि उन्होंने इसके लिए गुड़गांव के पुलिस कमिश्नर के नाम फोर्टिस हॉस्पिटल के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। पुलिस की ओर से यह मामला मेडिकल नेग्लीजेंसी बोर्ड को मिला है। शिकायत में उन्होंने बताया कि अप्रैल 2016 में एक दुर्घटना में उनके बाएं पैर में चोट आई थी। ग्वालियर के ही एक निजी हॉस्पिटल में उनके पैर में प्लेट डाली गई थी। जिसके बाद उसके पैर के तलवे में जलन होनी शुरू हुई। 9 अगस्त 2016 में पैर के तलवों में होने वाली जलन के कारण गुड़गांव के फोर्टिस हॉस्पिटल आया। यहां न्यूरोसर्जन डॉ. संदीप वैश्य से मिले। डाक्टर ने उन्हें बताया कि पैर में प्लेट डालने के कारण नसों में इरिटेशन है। ऑपरेशन से ठीक हो जाएगा। 10 अगस्त को ऑपरेशन किया गया। कुछ दिन भर्ती रहने के बाद पीड़ित को महसूस हुआ कि उसके पैर ने काम करना बंद कर दिया है। उन्हें बताया गया कि नसों में खून की सप्लाई बंद है, इसके लिए 2 महीने का समय लगेगा। यदि नसें डैमेज हुई तो करीब एक साल का भी समय लग सकता है लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित के बाएं पैर ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है। वे बताते हैं कि 12 फरवरी 2018 को हॉस्पिटल के खिलाफ मेडिकल नेग्लीजेंसी की शिकायत दर्ज करवाई है। फोर्टिस हॉस्पिटल की इलाज में हुई लापरवाही की वजह से उनकी जिंदगी खराब हो गई।

आरोप पूरी तरह से निराधार

फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रवक्ता का कहना है कि मरीज द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। मरीज का पूरा इलाज ग्लोबल गोल्ड स्टैंडर्ड का दिया गया था और बेस्ट क्लीनिकली टीम ने इलाज किया। उनका कहना है कि इस दौरान मरीज का बिहेवियर डाक्टरों के प्रति काफी खराब रहा था। मरीज को ग्वालियर में सर्जरी कराने के बाद यहां रेफर किया गया था।

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