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सिविल अस्पताल के एक कमरे के आधे हिस्से में चलता है सखी सेंटर, केबिन नहीं होने से पीड़िता की काउंसिलिंग के वक्त कर्मचारी बाहर करते हैं इंतजार

सिविल अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर ‘वन स्टाप क्राइसिस (सखी) सेंटर’ की शुरुआत साल 2017 में अस्थायी तौर पर की गई। दरअसल...

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 02:05 AM IST
सिविल अस्पताल के एक कमरे के आधे हिस्से में चलता है सखी सेंटर, केबिन नहीं होने से पीड़िता की काउंसिलिंग के वक्त कर्मचारी बाहर करते हैं इंतजार
सिविल अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर ‘वन स्टाप क्राइसिस (सखी) सेंटर’ की शुरुआत साल 2017 में अस्थायी तौर पर की गई। दरअसल दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया कांड के बाद भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के 640 जिलों और 6 मेट्रो सिटी की 20 लोकेशन पर इन सेंटर्स को खोलने की घोषणा की थी। इनमें गुड़गांव भी शामिल था। योजना के तहत गुड़गांव के सिविल अस्पताल के एक कमरे के आधे हिस्से में ये सेंटर खोला गया। सुविधा के नाम पर यहां फिलहाल एक टेबल, कुछ कुर्सियां और एक बेड पड़ा है। कोई केबिन नहीं है। यदि कोई पीड़िता आती है तो उसकी काउंसिलिंग करने के लिए अन्य कर्मचारियों को बाहर इंतजार करना पड़ता है। फिलहाल सखी सेंटर फंड की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते यहां आने वाली पीड़िताओं को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं। कमरे के दूसरे आधे हिस्से में हरियाणा सरकार का सुकून सेंटर चल रहा है, इसमें भी घरेलू हिंसा और दुष्कर्म पीड़िताओं को लीगल और मेडिकल सेवाएं दी जाती हैं।

56 पीड़िताओं को लाभ

सखी सेंटर में पिछले चार महीने में 56 पीड़िताओं की मदद की गई। इनमें 26 घरेलू हिंसा से, 10 दुष्कर्म, 10 किडनैपिंग व 10 अन्य प्रकार की प्रताड़ना की शिकार हुई हैं।

इन सुविधाओं का अभाव

फंड नहीं आने से यहां महिलाओं को खाना और कपड़े जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सेंटर आने वाली महिलाओं को मेडिकल सुविधा, कानूनी सलाह, पांच दिन के लिए रहने और खाने की व्यवस्था, कपड़े आदि सुविधा देने का प्रावधान है। सेंटर की अपनी इमारत नहीं होने से महिलाओं के रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाती है।

पिछले साल का बजट लैप्स

पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में विभाग को 18 लाख रुपए का बजट मिला था। इनमें से 22 हजार रुपए ही खर्च हुए। तत्कालीन अधिकारी द्वारा बजट इस्तेमाल नहीं करने से कारण शेष फंड लैप्स हो गया। सेंटर को ट्रैक पर लाने को फिलहाल विभाग को दोबारा फंड आने का इंतजार है।

2018 जनवरी से सेंटर को लेकर जिला महिला एवं बाल विकास विभाग हुआ गंभीर

जनवरी 2017 में शुरू हुए सखी सेंटर को लेकर एक साल बाद जिला महिला एवं बाल विकास विभाग गंभीर हुआ। 2018 जनवरी से सेंटर का रिकॉर्ड मेंटेन करना शुरू किया गया। 11 कर्मियों की नियुक्ति की गई। इनमें एक सेंटर एडमिनिस्ट्रेटर, एक केस वर्कर, एक पैरामेडिकल, दो आईटी कर्मी, दो गार्ड, दो मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर, लीगल काउंसलर व एक साइको काउंसलर शामिल हैं। इन्हें फंड की कमी के कारण वेतन भी नहीं मिल पाया है।


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